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Almora Accident: लाशों के ढेर में दब गए लापरवाही के निशान, हादसे वाली जगह पर न पैरापिट और न ही क्रश बैरियर
Tue, 05 Nov 2024 11:10 AM IST
हीरा मेहरा
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
Published by: हीरा मेहरा
Updated Tue, 05 Nov 2024 11:10 AM IST
सार
अल्मोड़ा के सल्ट विकासखंड के मरचूला में यात्रियों से भरी एक बस 150 फुट गहरी खाई में गिर गई। हादसे में 36 लोगों की मौत हो गई। जबकि 27 घायल हैं। जहां पर हादसा हुआ वहां पर न क्रश बैरियर लगाए गए थे और न ही पैरापिट का ही निर्माण किया गया था।
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सड़क हादसा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
कूपी बैंड के पास सोमवार सुबह हुआ हादसा कई परिवारों को गहरा जख्म दे गया। क्षेत्र से सुबह के समय गुजरने वाली एकमात्र बस के दुर्घटनाग्रस्त होने की खबर सुनते ही हर घटनास्थल की ओर दौड़ पड़ा। मौके पर लाशों के ढेर देख लोग सहम गए और किसी का ध्यान सुरक्षा उपायों पर नहीं गया।
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हादसा जिस तीखे मोड़ पर हुआ वहां पर न तो दुर्घटनाएं रोकने के लिए क्रश बैरियर लगाए गए थे और न ही पैरापिट का ही निर्माण किया गया था। इन दोनों में से एक भी होता तो 36 लोगों की जान शायद बच जाती। लोगों का गुस्सा पुलिस प्रशासन पर भी दिखा क्योंकि घटनास्थल से मरचूला चौकी करीब है। इसके बावजूद पुलिस को आने में घंटेभर लग गए। इस दौरान एक पुलिसकर्मी ग्रामीणों संग बचाव कार्य में जुटा रहा।
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जांच क्या सिर्फ वसूली के लिए परिवहन और पुलिस विभाग समय-समय पर ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान चलाते हैं। इसके बावजूद 42 सीटर बस में 63 लोगों को ढोया जा रहा था। इससे तो लगता है कि इस लापरवाही की जानबूझकर अनदेखी की जाती है ताकि बस मालिक की जेब भरे और उनकी भी जिनके ऊपर ओवरलोडिंग के खिलाफ अभियान चलाने की जिम्मेदारी है।
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मजबूरी में बस में चढ़े थे लोग
इसे शासन प्रशासन की नाकामी ही कहेंगे कि हजारों की आबादी वाले क्षेत्र के लिए सुबह-शाम केवल एक ही बस का संचालन हो रहा है। यही कारण था कि लोग अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए मजबूरी में ओवरलोड बस में चढ़ गए और चालक के कहने के बावजूद नहीं उतरे। अगर क्षेत्र में सुगम यातायात की व्यवस्था होती तो शायद 63 जिंदगियां यूं ही खत्म नहीं हो जातीं।