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नैनीताल-कैंची धाम: 35 हजार वाहनों का दबाव, पहले से तय वीकेंड में क्यों बिगड़ा ट्रैफिक प्लान?

Sun, 04 Oct 2026 11:32 AM IST
गायत्री जोशी माई सिटी रिपोर्टर
माई सिटी रिपोर्टर Published by: गायत्री जोशी Updated Sun, 04 Oct 2026 11:32 AM IST
सार

लंबा वीकेंड पहले से तय था, लेकिन 35 हजार से ज्यादा वाहनों के दबाव ने ट्रैफिक प्लान की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए। पिछले वर्षों में पार्किंग, शटल और एंट्री कंट्रोल की व्यवस्था के बावजूद इस बार अगले दिन यातायात रोकने की नौबत क्यों आई?

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Nainital-Kainchi Dham: Pressure of 35,000 vehicles—why did the traffic plan fail during a scheduled weekend?
कैंची धाम में भक्तों की भीड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

लंबा वीकेंड कैलेंडर में अचानक नहीं आया था। गांधी जयंती और दशहरा से जुड़ी लगातार छुट्टियों की तारीखें महीनों पहले तय थीं। मौसम भी साफ था और नैनीताल-कैंची धाम की पर्यटक व श्रद्धालु क्षमता से पुलिस-प्रशासन अनजान नहीं था। इसके बावजूद दो अक्तूबर को जब 35 हजार से अधिक वाहन पहाड़ की ओर पहुंच गए और कैंची धाम से नैनीताल तक यातायात दबाव बढ़ गया, तब अगले दिन पुलिस को नया प्लान जारी कर शाम चार से रात दस बजे तक हल्द्वानी-काठगोदाम से नैनीताल, भवाली और भीमताल की ओर यातायात रोकने का फैसला करना पड़ा। सवाल सीधा है कि जब पिछले दो वर्षों में भीड़ के अनुमान के आधार पर पार्किंग, शटल, भारी वाहनों पर रोक, वैकल्पिक मार्ग और एंट्री कंट्रोल की व्यवस्था की जाती रही, तो इस बार वही होमवर्क पहले क्यों नहीं किया गया।

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पुराने अफसरों ने समझा था भीड़ का गणित

2024 में कैंची धाम स्थापना दिवस से पहले पुलिस-प्रशासन ने सिर्फ डायवर्जन का नक्शा जारी नहीं किया था, बल्कि 14 पार्किंग स्थल चिह्नित किए थे। भवाली, भीमताल और खैरना से श्रद्धालुओं को शटल से कैंची धाम पहुंचाने की व्यवस्था बनाई गई थी। पुलिस ने यह भी माना था कि कैंची धाम में सीमित पार्किंग क्षमता के कारण हर वाहन को सीधे मंदिर क्षेत्र तक जाने देना संभव नहीं है। इसलिए प्रवेश बिंदुओं पर वाहनों को रोकने की रणनीति बनाई गई थी। इसी प्लान में हल्द्वानी और पहाड़ के बीच यातायात को अलग-अलग कॉरिडोर में बांटते हुए क्वारब, रामगढ़, खुटानी, धानाचूली और भीमताल जैसे वैकल्पिक मार्ग तय किए गए थे। यानी सोच साफ थी जाम लगने के बाद उसे खोलने के बजाय जाम बनने से पहले ट्रैफिक का दबाव बांटा जाए।

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2025 में मॉडल और हुआ मजबूत

2025 में इसी व्यवस्था को और विस्तार दिया गया। कैंची धाम के लिए 500 से अधिक शटल वाहनों की व्यवस्था की गई। हल्द्वानी-काठगोदाम, भीमताल, भवाली और नैनीताल से अलग-अलग शटल कॉरिडोर बनाए गए। बाहरी दोपहिया वाहनों को काठगोदाम और कालाढूंगी में रोकने तक का निर्णय लिया गया। यानी पिछले साल पुलिस ने यह मानकर तैयारी की थी कि हर वाहन को पहाड़ पर भेजना समाधान नहीं, बल्कि समस्या बढ़ाने वाला कदम हो सकता है। इसी दौरान कैंची धाम की यातायात व्यवस्था के लिए आईआईएम की स्टडी टीम के सहयोग से समग्र ट्रैफिक प्लान तैयार करने की प्रक्रिया भी शुरू हुई थी। इसमें तत्कालीन सीओ हल्द्वानी नितिन लोहनी समेत पुलिस और प्रशासन के अधिकारी शामिल थे।

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2026 में क्या बदला

दो अक्तूबर 2026 के लिए जारी प्लान में पार्किंग और शटल की व्यवस्था तो रखी गई। भीमताल विकास भवन और भवाली सैनिटोरियम में वाहनों को रोककर शटल से कैंची धाम पहुंचाने का प्रावधान किया गया। भारी वाहनों को नियंत्रित करने और दबाव बढ़ने पर वैकल्पिक मार्गों के इस्तेमाल की व्यवस्था भी थी।

असली परीक्षा कागज पर नहीं, सड़क पर हुई

लंबे वीकेंड के पहले दिन 35 हजार से अधिक वाहन नैनीताल, भवाली, भीमताल और कैंची धाम की ओर पहुंचे। कैंची धाम क्षेत्र में भारी भीड़ के बीच जाम की स्थिति बनी। इसके बाद अगले दिन पुलिस को व्यवस्था बदलनी पड़ी। शाम चार से रात दस बजे तक हल्द्वानी-काठगोदाम से नैनीताल, भवाली और भीमताल की ओर यातायात रोकने और पहाड़ से नीचे आने वाले वाहनों को प्राथमिकता देने का फैसला किया गया। यानी प्रवेश रोकने का फैसला उस समय आया, जब भारी संख्या में वाहन पहले ही पहाड़ की ओर जा चुके थे।

ट्रैफिक प्लान बना या ट्रैफिक का अनुमान भी लगाया

यही सबसे बड़ा सवाल है। समस्या केवल यह नहीं थी कि सड़क पर वाहन ज्यादा हो गए। असली सवाल यह है कि क्या संभावित वाहन संख्या और पहाड़ी सड़कों की वास्तविक क्षमता का पहले से मिलान किया गया था। अगर एक दिन में 35 हजार से अधिक वाहनों के पहुंचने के बाद छह घंटे के लिए पहाड़ की ओर यातायात रोकना पड़े, तो इनफ्लो और आउटफ्लो का संतुलन चुनौती बन गया था। अगले दिन पुलिस ने इसी को साधने के लिए पहाड़ से लौटने वाले वाहनों को प्राथमिकता दी। 2024 और 2025 की तैयारियां सवाल खड़े करती हैं। तब पार्किंग क्षमता, शटल संख्या, वैकल्पिक कॉरिडोर और बाहरी वाहनों की रोक जैसे उपायों पर पहले से काम हुआ था। आईआईएम की मदद से समग्र ट्रैफिक प्लान बनाने की पहल भी हुई थी। तो फिर इस बार लंबे वीकेंड से पहले प्रति घंटे पहाड़ पर भेजे जा सकने वाले वाहनों की सीमा, पार्किंग की वास्तविक क्षमता, शटल की जरूरत और प्रवेश बिंदुओं पर चरणबद्ध रोक का स्पष्ट गणित क्यों नहीं सामने आया।

अचानक भीड़ कह देना काफी नहीं

दो अक्तूबर के जाम को सिर्फ अचानक उमड़ी भीड़ कहकर खत्म करना आसान है, लेकिन सवाल इससे बड़ा है। भीड़ का आकार बदल सकता है, मगर लंबा वीकेंड अचानक नहीं आया था। छुट्टियों की तारीखें पहले से तय थीं और पिछले वर्षों के अनुभव भी सामने थे। 2024 में पार्किंग और शटल के साथ वैकल्पिक कॉरिडोर पर काम हुआ। 2025 में शटल की संख्या बढ़ाई गई, बाहरी वाहनों पर नियंत्रण किया गया और विशेषज्ञ अध्ययन की पहल हुई। ऐसे में 2026 के लिए उसी अनुभव को जोड़कर पहले से वाहन सीमा तय करना, प्रवेश बिंदुओं पर फिल्टरिंग करना और पार्किंग-शटल क्षमता के हिसाब से वाहनों को पहाड़ पर भेजना ज्यादा प्रभावी तैयारी हो सकती थी। क्योंकि ट्रैफिक प्लान सिर्फ रूट का नक्शा नहीं होता। वह भीड़ का गणित होता है।

 

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