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Nainital: खड़िया खनन से दरार मामले में सर्वे के लिए बतानी होंगी जरूरतें, बागेश्वर प्रकरण पर अगली सुनवाई 13 जून

Tue, 10 Jun 2025 04:03 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 10 Jun 2025 04:03 PM IST
सार

हाईकोर्ट बागेश्वर जिले की तहसील कांडा के कई गांवों में खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में 13 जून में अगली सुनवाई करेगा। स्वतः संज्ञान लेकर पंजीकृत की गई जनहित याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई के बाद यह तारीख तय की गई।

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Nainital High Court will hear the case of cracks caused by chalk mining in Kanda villages on June 13
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट बागेश्वर जिले की तहसील कांडा के कई गांवों में खड़िया खनन से आई दरारों के मामले में 13 जून में अगली सुनवाई करेगा। स्वतः संज्ञान लेकर पंजीकृत की गई जनहित याचिकाओं पर सोमवार को सुनवाई के बाद यह तारीख तय की गई।

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मामले में राज्य सरकार की ओर से प्रार्थना पत्र दायर कर कहा कि बागेश्वर में खड़िया के खनन से जो गड्ढे हुए थे, उनमें बारिश में पानी भरने से भू-स्खलन व आपदा का खतरा बना हुआ है। कोर्ट से प्रार्थना की गई थी कि मानसून को देखते हुए ये गड्ढे भरे जाने की अनुमति दी जाए। कोर्ट ने कहा कि केंद्रीय भू-जल बोर्ड और केंद्रीय भूतत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा निरीक्षण कराकर राज्य सरकार की इस आशंका की पुष्टि की जा सकती है। इसलिए केंद्रीय भू-जल बोर्ड व केंद्रीय भूतत्व सर्वेक्षण को कोर्ट ने नोटिस जारी कर एक सप्ताह के भीतर जवाब देने को कहा है कि निरीक्षण करने के लिए क्या आवश्यकताएं हैं।

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मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति आलोक मेहरा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पूर्व में कांडा तहसील के ग्रामीणों ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र भेजकर कहा था कि अवैध खड़िया खनन से उनकी खेतीबाड़ी, घर और पानी की लाइनें चौपट हो चुकी हैं। वहां 147 खड़िया की खदान हैं। वहां पर पोकलैंड जैसी भारी मशीनों से खनन हुआ है। जिससे वहां दरारें आई हैं।

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सक्षम लोगों ने तो अपने मकान हल्द्वानी व अन्यत्र बना लिए, लेकिन निर्धन लोग यहीं रह कर त्रासदी भुगतने को मजबूर हैं। उनके आय के जो भी साधन थे, उन पर भी खड़िया खनन वालों की नजर टिकी हुई है। इस संबंध में कई बार उच्च अधिकारियों को प्रत्यावेदन भी दिए, लेकिन उनकी समस्या का हल नहीं निकला। इसलिए वे लोग न्यायालय आए हैं, ताकि उनकी समस्या का समाधान किया जा सके।

कोर्ट खदानों की पहले ही मांग चुका है रिपोर्ट
इस प्रकरण पर पूर्व में हुई सुनवाई पर कोर्ट ने एसपी बागेश्वर से पूछा था कि 55 खदानों की रिपोर्ट पेश करने के बाद और कितनों की रिपोर्ट बनाई है। सरकार से यह बताने को भी कहा था कि किस तरह से खनन कार्य किया गया है, उसका प्रमाण भी प्रस्तुत करें। जांच कमेटी के अध्यक्ष से पूछा था कि खदानों की जांच करने के लिए किस-किस चीज की कमी है, उससे अवगत कराएं। सुनवाई पर एसपी बागेश्वर व जांच कमेटी के अध्यक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कोर्ट में पेश हुए थे। एसपी ने कोर्ट में कहा कि अभी तक उनकी ओर से 72 खुदानों का निरीक्षण कर लिया गया है और 55 की रिपोर्ट न्यायालय में पेश की जा चुकी है। खदान स्वामियों की तरफ से कहा गया कि खनन नियमों के तहत ही किया गया और कोई अवैध खनन नहीं किया गया इसलिए इस पर लगी रोक हटाई जाए।

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