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Nainital: हाईकोर्ट ने पूछा- भूमि की धोखाधड़ी पर अंकुश लगाने के लिए गठित कमेटी क्या कर रही है?

Fri, 12 Jul 2024 05:16 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 12 Jul 2024 05:16 PM IST
सार

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में भूमि की धोखाधड़ी व अवैध खरीद फरोख्त पर अंकुश लगाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से पूछा है।

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Nainital High Court hearing on illegal purchase and sale of land in the state
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

नैनीताल हाईकोर्ट ने राज्य में भूमि की धोखाधड़ी व अवैध खरीद फरोख्त पर अंकुश लगाने को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से पूछा है कि 2014 में राज्य सरकार ने लैंड फ्रॉड समन्वय कमेटी गठित की थी वह किस तरह से कार्य कर रही है और अभी तक कमेटी के पास कितने लैंड फ्रॉड से संबंधित शिकायतें आई है। कोर्ट ने 16 जुलाई तक स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य न्यायाधीश रितु बाहरी एवं न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।

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मामले के अनुसार देहरादून निवासी सचिन शर्मा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने 2014 में प्रदेश में लैंड फ्रॉड व जमीन से जुड़े मामलों में होने वाले धोखाधड़ी को रोकने के लिए लैंड फ्रॉड समन्वय समिति का गठन किया था। जिसका अध्यक्ष कुमाऊं व गढ़वाल रीजन के कमिश्नर सहित परिक्षेत्रीय पुलिस उप महानिरीक्षक, आईजी, अपर आयुक्त, संबधित वन संरक्षक, संबंधित विकास प्राधिकरण का मुख्या, संबंधित क्षेत्र के नगर आयुक्त व एसआईटी के अधिकारियों की कमेटी गठित की थी। जिनका कार्य राज्य में हो रहे लैंड फ्रॉड व धोखाधड़ी के मामलों की जांच करना, जरूरत पड़ने पर उसकी एसआईटी से जांच करके मुकदमा दर्ज करना था। लेकिन आज की तिथि में लैंड फ्रॉड व धोखाधड़ी के जितनी भी शिकायतें पुलिस को मिल रही है पुलिस खुद ही इन मामलों में अपराध दर्ज कर रही है। जबकि शासनादेश के अनुसार ऐसे मामलों को लैंड फ्रॉड समन्वय समिति के पास जांच के लिए भेजा जाना था।

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याचिका में कहा कि पुलिस को न तो जमीन से जुड़े मामलों के नियम पता है और न ही ऐसे मामलों में मुकदमा दर्ज करने की पावर। शासनादेश में स्पष्ट उल्लेख किया गया है कि जब ऐसा मामला पुलिस के पास आता है तो लैंड फ्रॉड समन्वय समिति को भेजा जाय। वही इसकी जांच करेगी अगर फ्रॉड हुआ है तो संबंधित थाने को मुकदमा दर्ज करने का आदेश देगी। वर्तमान में कमेटी का कार्य थाने से हो रहा है। जो शासनादेश में दिए गए निर्देशों के विरुद्ध है। इस पर रोक लगाई जाए।

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