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Nainital News: फोटो भी<bha>--</bha>वन्यजीव संरक्षण के लिए भारत-नेपाल के बीच एमओयू
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रामपुर रोड स्थित एक होटल में वन्य जीव संरक्षण के लिए आयोजित सेमिनार में मौजूद भारत में नेपाल के
हल्द्वानी। भारत और नेपाल के बीच वन्यजीव संरक्षण को लेकर बुधवार को आयोजित सेमिनार में दोनों देश के वनाधिकारियों ने साझा सीमाओं पर वन्यजीव संरक्षण की मजबूती पर बात की। वन्यजीव गलियारे के संरक्षण और पशु निगरानी प्राथमिकता रही। साथ ही सीमापार क्षेत्रों में चुनौतियों के समाधान पर चर्चा और संयुक्त प्रबंधन रणनीति विकसित करने पर जोर दिया गया। भारत-नेपाल सीमा पार वन्यजीव संरक्षण में सहयोग के लिए एमओयू को अंतिम रूप दिया गया।
सेमिनार में ब्रह्मदेव, किलपुरा-खटीमा-सुरई (केकेएस), लग्गा-बग्गा और खता कॉरिडोर सहित प्रमुख सीमा पार वन्यजीव गलियारों पर चर्चा हुई। हाथियों, दलदली हिरणों, गैंडों, घड़ियालों और बाघों जैसी प्रमुख प्रजातियों के आवागमन के पैटर्न का उल्लेख हुआ। इन प्रजातियों के परिदृश्य स्तर के संरक्षण के लिए इन गलियारों के पारिस्थितिक महत्व पर जोर दिया गया। लग्गा-बग्गा, खता कॉरिडोर और चितवन-परसा-वाल्मीकि में संयुक्त गश्ती पर बात की गई। प्रवासी वन्यजीवों की सुरक्षा के कदम पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सरकारी एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। नेपाल ने भी अपनी वन रणनीति की जानकारी सांझा की। हेमराज बिष्ट प्रांत वन प्रबंधक नेपाल, डॉ. धीरज पांडे सीसीएफ कुमाऊं, डॉ. विनय भार्गव सीएफ पश्चिमी सर्कल, डॉ. साकेत बडोला एफडी कॉर्बेट, हिमांशु बागरी डीएफओ तराई पूर्वी, आशुतोष सिंह डीएफओ पिथौरागढ़ ने अवैध वन्यजीव व्यापार के बारे में चिंता जताई। कहा कि शिकारी अक्सर सीमा का फायदा उठाते हैं। ऐसे में दोनों देश सूचना के आदान-प्रदान और वास्तविक समय संचार को बढ़ाने के महत्व पर सहमत हुए।
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सेमिनार में ब्रह्मदेव, किलपुरा-खटीमा-सुरई (केकेएस), लग्गा-बग्गा और खता कॉरिडोर सहित प्रमुख सीमा पार वन्यजीव गलियारों पर चर्चा हुई। हाथियों, दलदली हिरणों, गैंडों, घड़ियालों और बाघों जैसी प्रमुख प्रजातियों के आवागमन के पैटर्न का उल्लेख हुआ। इन प्रजातियों के परिदृश्य स्तर के संरक्षण के लिए इन गलियारों के पारिस्थितिक महत्व पर जोर दिया गया। लग्गा-बग्गा, खता कॉरिडोर और चितवन-परसा-वाल्मीकि में संयुक्त गश्ती पर बात की गई। प्रवासी वन्यजीवों की सुरक्षा के कदम पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि सरकारी एजेंसियों और स्थानीय समुदायों के बीच सहयोगात्मक प्रयासों ने सकारात्मक परिणाम दिए हैं। नेपाल ने भी अपनी वन रणनीति की जानकारी सांझा की। हेमराज बिष्ट प्रांत वन प्रबंधक नेपाल, डॉ. धीरज पांडे सीसीएफ कुमाऊं, डॉ. विनय भार्गव सीएफ पश्चिमी सर्कल, डॉ. साकेत बडोला एफडी कॉर्बेट, हिमांशु बागरी डीएफओ तराई पूर्वी, आशुतोष सिंह डीएफओ पिथौरागढ़ ने अवैध वन्यजीव व्यापार के बारे में चिंता जताई। कहा कि शिकारी अक्सर सीमा का फायदा उठाते हैं। ऐसे में दोनों देश सूचना के आदान-प्रदान और वास्तविक समय संचार को बढ़ाने के महत्व पर सहमत हुए।
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