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मधुमेह, ब्लड प्रेशर के चलते किडनी हो रही खराब
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हल्द्वानी। मधुमेह, ब्लड प्रेशर आदि के चलते लोगों की किडनी खराब हो रही है। हालत यह है कि प्रतिदिन केवल बेस अस्पताल के डायलिसिस सेंटर में ही करीब सत्तर लोग डायलिसिस कराने पहुंचते हैं, जिनकी किडनी फंक्शन प्रभावित हैं। सुशीला तिवारी अस्पताल में डायलिसिस के लिए भी रोगी पहुंचते हैं।
मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. यतींद्र सिंह कहते हैं कि ओपीडी की बात करें तो प्रतिदिन से आठ से दस किडनी संबंधित बीमारी से परेेशान लोग पहुंचते हैं। इसमें नए रोगी भी होते हैं। किडनी खराब होने का मुख्य कारण मधुमेह, हाइपरटेंशन है। इसके अलावा इंफ्ेक्शन के कारण भी किडनी खराब होती है। अस्पताल में जिन मरीजों की डायलिसिस होती है, पहले उन्हें भर्ती किया जाता है। इनकी संख्या प्रतिदिन पांच तक होती है। अधिकांश मरीज पचास साल से अधिक आयु के होते हैं। वहीं, बेस अस्पताल में कुमाऊं से बड़ी संख्या में रोगी पहुंचते हैं। यहां पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस सेंटर संचालित होता है। यहां के प्रबंधन से जुड़े लोगों के अनुसार प्रतिदिन साठ से सत्तर तक डायलिसिस होती है। जो रोगी पहुंचते हैं, उसमें 17 साल से आयु से अधिक उम्र के लोग शामिल हैं। निजी अस्पतालों में किडनी संबंधित दिक्कत को लेकर रोगी पहुंचते हैं।
मधुमेह को नियंत्रित रखें
हल्द्वानी। चिकित्सकों के अनुसार किडनी खराब होने से बचाव के लिए जरूरी है कि मधुमेह, हाइपरटेंशन को नियंत्रण में रखें। निश्चित अंतराल पर डॉक्टरों की सलाह पर लगातार जांच कराते रहना चाहिए। अगर कोई दिक्कत हो रही है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. यतींद्र सिंह कहते हैं कि ओपीडी की बात करें तो प्रतिदिन से आठ से दस किडनी संबंधित बीमारी से परेेशान लोग पहुंचते हैं। इसमें नए रोगी भी होते हैं। किडनी खराब होने का मुख्य कारण मधुमेह, हाइपरटेंशन है। इसके अलावा इंफ्ेक्शन के कारण भी किडनी खराब होती है। अस्पताल में जिन मरीजों की डायलिसिस होती है, पहले उन्हें भर्ती किया जाता है। इनकी संख्या प्रतिदिन पांच तक होती है। अधिकांश मरीज पचास साल से अधिक आयु के होते हैं। वहीं, बेस अस्पताल में कुमाऊं से बड़ी संख्या में रोगी पहुंचते हैं। यहां पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस सेंटर संचालित होता है। यहां के प्रबंधन से जुड़े लोगों के अनुसार प्रतिदिन साठ से सत्तर तक डायलिसिस होती है। जो रोगी पहुंचते हैं, उसमें 17 साल से आयु से अधिक उम्र के लोग शामिल हैं। निजी अस्पतालों में किडनी संबंधित दिक्कत को लेकर रोगी पहुंचते हैं।
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मधुमेह को नियंत्रित रखें
हल्द्वानी। चिकित्सकों के अनुसार किडनी खराब होने से बचाव के लिए जरूरी है कि मधुमेह, हाइपरटेंशन को नियंत्रण में रखें। निश्चित अंतराल पर डॉक्टरों की सलाह पर लगातार जांच कराते रहना चाहिए। अगर कोई दिक्कत हो रही है तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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