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भाबर में सिंचाई को अधिक चाहिए पानी

Sun, 04 Dec 2016 01:31 AM IST
कैलाश्ा पाठक
कैलाश्ा पाठक Updated Sun, 04 Dec 2016 01:31 AM IST
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More irrigation water must Bhabar
DAM - फोटो : FILE

जमरानी बांध परियोजना में अब यूपी और उत्तराखंड के बीच सिंचाई के पानी के बंटवारे का पेच फंस गया है। यूपी ने साफ कर दिया है कि उत्तराखंड से बांध से 83.42 मिलियन घन मीटर पानी न मिलने तक करार पत्र पर हस्ताक्षर नहीं होेंगे।

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उत्तराखंड सिर्फ 61.58 मिलियन घन मीटर पानी ही देने पर सहमत है। अब उत्तर प्रदेश को मनाने के लिए उत्तराखंड ने भाबर में अधिक पानी की जरूरत के तर्क को ढाल बनाने की कोशिश की है।
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जमरानी बांध से सिंचाई के लिए कुल 100 मिलियन घन मीटर पानी उपलब्ध है। पूर्व में उत्तराखंड 57 प्रतिशत पानी देने पर सहमत था। अब यूपी 83.42 प्रतिशत पानी की मांग कर रहा है। इसमें से उत्तराखंड 61.58 प्रतिशत पानी देने की बात मान रहा है।
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सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि इससे ज्यादा पानी देना संभव नहीं हो पाएगा। अब यूपी को मनाने के लिए उत्तराखंड ने भाबर में यूपी की तुलना में अधिक पानी की जरूरत का तर्क दिया है।  उत्तराखंड का तर्क  है कि यूपी में सिंचाई के लिए जल की गहराई (सिंचाई की जरूरत आंकने का तकनीकी शब्द डैप्थ ऑफ वाटर) 0.4597 मीटर है।

उत्तराखंड के भाबर क्षेत्र में 3.58 मीटर गहराई तक सिंचाई के पानी की जरूरत होती है। इसका अध्ययन भी पंतनगर कृषि विवि के विशेषज्ञों ने किया था। जमरानी बांध की डीपीआर में 142.72 मिलियन घन मीटर पानी का प्रस्ताव है।

इसमें से 42.72 मिलियन घनमीटर पानी हल्द्वानी और आसपास की पेयजल व्यवस्था के लिए रखा गया है। इस पर यूपी को कोई एतराज नहीं है।

सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता डीसी सिंह के मुताबिक भाबर की जमीन ढलान वाली होने के साथ ही रेतीली और पथरीली है। पानी का अधिकांश हिस्सा जमीन में रिस जाता है। भाबर में हफ्ते भर में खेत सूख जाते हैं और दोबारा सिंचाई की जरूरत होती है।

यूपी में एक बार की गई सिंचाई के बाद तीन हफ्ते तक उसमें सिंचाई की जरूरत नहीं होती है। फिलहाल राहत है तो सिर्फ इतनी कि यूपी 37 नहरें उत्तराखंड को हस्तांतरित करने पर राजी है। दोनों ही राज्य जमरानी बांध को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कराने के लिए जोर लगाने पर भी सहमत हैं।


यूपी के अधिकारियों ने संयुक्त भ्रमण कर र्कोई सर्वमान्य हल निकालने का भरोसा दिया है। उधर, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के विभागाध्यक्ष सीडी राम का कहना है कि जमरानी बांध को लेकर उत्तराखंड के अधिकारियों के साथ बैठक हुई है। उच्च स्तर पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है।

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