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‘...वह ताज तो हुसैन के कदमों की धूल है’

Sat, 30 Sep 2017 12:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी। 
अमर उजाला ब्यूरो हल्द्वानी।  Updated Sat, 30 Sep 2017 12:00 AM IST
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moharram festival preparation
हल्‍द्वानी मुहर्रम के अवसर पर इमामबाडे़ में नातिया कलाम पेश करते अकीदतमंद। - फोटो : अमर उजाला

‘जिसके लिए यजीद ने इतने सितम किए, वह ताज तो हुसैन के कदमों की धूल है।’ कुछ इसी तरह के नातिया कलाम इन दिनों मुहर्रम की मजलिसों में पढे़ जा रहे हैं। दरगाहों और इमामबाडे़ में शाम होते ही शुरू हो जाता है। नात-ख्वानी और कुरानख्वानी का सिलसिला, जो देर रात तक चलता है।

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यजीद के जुल्मों के खिलाफ पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने आवाज बुलंद की थी। करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन अपने 72 साथियों के साथ शहीद हो गए थे। उन्हीं की याद में माहे-मुहर्रम की दस तारीख पर खास आयोजन होते हैं। रविवार को ताजियों को जुलूस निकाला जाएगा। इसके लिए ताजियेदार तैयारियों में जुट गए हैं। लाइन लाइन 13 निवासी मोहम्मद यूसुफ  और नन्हें दुलदुल-बुराक का जोड़ा बनाने में जुटे हैं। यह जोड़ा ताजियों के जुलूस की शान माना जाता है। आजाद नगर, इंदिरा नगर, उजाला नगर, जवाहर नगर, गफूर बस्ती में ताजिये बनाने का काम तेजी से चल रहा है। अखाड़ा पार्टी और ढोल टीमें भी देर रात तक तालीम ले रही हैं। इधर, हज कमेटी के जिलाध्यक्ष जमीर अहमद ने बताया कि इस बार जुलूस में करीब तीन दर्जन ताजिये शामिल होंगे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए स्वयंसेवी बनाए गए हैं। उन्हें अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। 
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इमामबाडे़ में सज रही महफिल
 वारसी कॉलोनी स्थित दरगाह परिसर में इमामबाड़ा बनाया गया है। यहां शाम होते ही मजलिस शुरू हो जाती है। दूर-दराज से अकीदतमंद आते हैं और तबर्रुक लेकर जाते हैं। नातख्वानी का सिलसिला भी लगातार चल रहा है। शुक्रवार की देर रात तक यहां आजाद कमेटी के ढोल पार्टी ने तालीम ली। दरगाह कमेटी के सचिव हसीन अहमद खां वारसी ने बताया कि बृहस्पतिवार की शाम मेहंदी की रस्म की गई। शनिवार को भी विविध आयोजन होंगे। इसके लिए पुलिस से सुरक्षा की मांग की गई है। 
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तकरीर-ए-जुमा में सुनाए करबला के वाकियात
 शहर की मस्जिदों में तकरीर-ए-जुमा में उलेमा ने करबला के वाकियात सुनाए। कहा कि हजरत इमाम हुसैन ने जुल्म के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। इसलिए इस मौके पर बुराइयों से दूर रहने का संकल्प लें। इस खास मौके पर वाहियात बातों से बचें। जिन कामों का शरीयत से ताल्लुक नहीं, उन पर समय और पैसा खर्च करने से कोई फायदा नहीं।

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