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एसआर की कमी से जूझ रहा पीजी तैयार करने वाला मेडिकल कॉलेज
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हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज में पीजी (एमडी, एमएस) तैयार हो रहे हैं जबकि मेडिकल कॉलेज खुद सीनियर रेजीडेंट की कमी से जूझ रहा है। हालात यह हैं कि मेडिसिन जैसे महत्वपूर्ण विभाग में एक भी सीनियर रेजीडेंट नहीं है। ऐसे में आने वाले समय में पीजी कोर्स की मान्यता खतरे में पड़ सकती है।
मेडिकल कॉलेज में पीजी कोर्स करने के बाद तैयार चिकित्सक एसआर के पद पर तैनात होते हैं। यही एसआर अस्पताल की बैक बोन माने जाते हैं। यह इलाज करने के साथ एमबीबीएस और पीजी करने वालों को पढ़ाते भी हैं। एसआर की समय सीमा पूरी करने और असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के बाद आगे के पदों पर जा सकते हैं।
नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) के मानकों में एसआर होना बेहद जरूरी है। कमी होने से पीजी कोर्स की मान्यता संकट में पड़ सकती है। इस साल 54 डॉक्टरों ने पीजी कोर्स किया है जबकि स्थिति यह है कि जिस मेडिकल कॉलेज से पीजी तैयार किए जा रहें वहां एसआर की काफी कमी है। जून में मेडिकल कॉलेज में दौरे पर आए चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने एसआर की कमी दूर करने की बात कही थी, इनमें अनुबंधधारी डॉक्टरों को तैनात करने की बात हुई थी। फिलहाल, अभी तक स्थिति जस की तस है।
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मेडिकल के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। सीनियर रेजीडेंट अगर मिल जाते हैं तो स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने में और मदद मिल सकेगी।
75 पदों के सापेक्ष सिर्फ 12 की तैनाती
हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट के 75 पद स्वीकृत हैं। एनएमसी के मानकों की बात करें तो 32 सीनियर रेजीडेंट होेने चाहिए जबकि वर्तमान में 12 ही कार्यरत हैं। इसमें मेडिसिन विभाग में कोई भी नहीं है। स्त्री एवं प्रसूति रोग, सर्जरी और अन्य विभागों में चार के सापेक्ष केवल एक-एक तैनात है। रेडियोलॉजी विभाग में तीन पद हैं, यहां एक सीनियर रेजीडेंट मिल सका है।
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मेडिकल कॉलेज में पीजी कोर्स करने के बाद तैयार चिकित्सक एसआर के पद पर तैनात होते हैं। यही एसआर अस्पताल की बैक बोन माने जाते हैं। यह इलाज करने के साथ एमबीबीएस और पीजी करने वालों को पढ़ाते भी हैं। एसआर की समय सीमा पूरी करने और असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के बाद आगे के पदों पर जा सकते हैं।
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नेशनल मेडिकल काउंसिल (एनएमसी) के मानकों में एसआर होना बेहद जरूरी है। कमी होने से पीजी कोर्स की मान्यता संकट में पड़ सकती है। इस साल 54 डॉक्टरों ने पीजी कोर्स किया है जबकि स्थिति यह है कि जिस मेडिकल कॉलेज से पीजी तैयार किए जा रहें वहां एसआर की काफी कमी है। जून में मेडिकल कॉलेज में दौरे पर आए चिकित्सा शिक्षा निदेशक ने एसआर की कमी दूर करने की बात कही थी, इनमें अनुबंधधारी डॉक्टरों को तैनात करने की बात हुई थी। फिलहाल, अभी तक स्थिति जस की तस है।
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मेडिकल के प्राचार्य डॉ. अरुण जोशी का कहना है कि मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट की कमी है। इस कमी को दूर करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। सीनियर रेजीडेंट अगर मिल जाते हैं तो स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने में और मदद मिल सकेगी।
75 पदों के सापेक्ष सिर्फ 12 की तैनाती
हल्द्वानी। मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेजीडेंट के 75 पद स्वीकृत हैं। एनएमसी के मानकों की बात करें तो 32 सीनियर रेजीडेंट होेने चाहिए जबकि वर्तमान में 12 ही कार्यरत हैं। इसमें मेडिसिन विभाग में कोई भी नहीं है। स्त्री एवं प्रसूति रोग, सर्जरी और अन्य विभागों में चार के सापेक्ष केवल एक-एक तैनात है। रेडियोलॉजी विभाग में तीन पद हैं, यहां एक सीनियर रेजीडेंट मिल सका है।