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ठग गिरोह की दो महिलाओं संग मास्टर माइंड गिरफ्तार, ठगी के बाद तीनों भाग जाते थे विदेश
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बहुदेशिय भवन में खुलासे के दौरान पुलिस गिरफ्त में ठगी के आरोपी। अमर उजाला
- फोटो : HALDWANI
हल्द्वानी। ठग गिरोह की दो महिलाओं के साथ मास्टर माइंड आरोपी को जयपुर से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। जांच में पता चला कि आरोपी ठगी के बाद खाड़ी देश या सिंगापुर भाग जाते थे। पुलिस तीनों का आपराधिक इतिहास दिल्ली और राजस्थान पुलिस से मांगेगी।
सीओ भूपेंद्र सिंह धोनी ने बहुउद्देशीय भवन में बताया कि पुरानी आईटीआई रोड निवासी करन सिंह ने ठग गिरोह के खिलाफ पांच जनवरी 2020 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि गिरोह के सदस्यों ने करन के भाई से कस्टम विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर नौ लाख रुपये ठग लिए थे। गिरोह ने नियुक्ति पत्र भी दिया था लेकिन कस्टम विभाग से पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। इस मुकदमे की विवेचना उपनिरीक्षक संजीत सिंह राठौर को सौंपी गई।
जांच के दौरान पुलिस ने एक आरोपी अंशु मौर्या को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो पता चला कि गिरोह का मास्टर माइंड राजस्थान के प्रतापनगर जयपुर निवासी रजत भुटानी है। उसने बागेश्वर की दीपा से प्रेम विवाह किया था। साथ ही बागेश्वर के जाड़ापानी कौशानी निवासी किरन आर्या को अपने साथ सहयोगी के रूप में काम पर रखा।
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एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने तीनों को गिरफ्तार करने के लिए रजत पर ढाई हजार, दीपा और किरन पर 1500-1500 रुपये का इनाम घोषित किया था। कोतवाल संजय कुमार को सूचना मिली कि ठग गिरोह राजस्थान में है। इसी आधार पर उपनिरीक्षक संजीत राठौर और दीपक अरोरा, सिपाही जितेंद्र कुमार, अरुण राठौर, वीरेंद्र चौहान और पूजा की टीम राजस्थान गई। पुलिस ने तीनों को 11 दिसंबर को राजस्थान के सेक्टर 16 पुलिया प्रतापनगर जयपुर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों लोगों से 60-70 लाख रुपये ठग चुका है। पुलिस ने तीनों के पास से एक-एक पासपोर्ट, यूएई की नागरिकता के कागज, तीन मोबाइल सेट बरामद किए।
सीओ का कहना है कि कुमाऊं में भी कई लोगों से तीनों ठगी कर चुके हैं लेकिन किसी ने मुकदमा दर्ज नहीं कराया। हो सकता है कि अब पीड़ित लोग सामने आए। कोतवाल संजय कुमार ने कहा कि तीनों आरोपी दिल्ली मेें भी कई लोगों को ठग चुके हैं। तीनों का आपराधिक इतिहास पता करने के लिए दिल्ली और राजस्थान पुलिस को पत्र भेजा जाएगा।
फेसबुक पर ग्राहकों को फंसाती थी किरन
हल्द्वानी। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार किरन फेसबुक पर चैट करने के बाद लोगों से बातचीत करती थी। पहले पता करती थी कि बात करने वाले के घर में कोई बेरोजगार तो नहीं है। फिर बेरोजगार को नौकरी दिलाने के नाम पर झांसा देती थी। ग्राहकों को डील करने के लिए रजत भुटानी सामने आता था। रजत और दीपा के चक्कर में पड़कर बेरोजगार पैसा दे देते थे।
सिंगापुर जाने से पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया
हल्द्वानी। तीनों ठगी करने के बाद दुबई और मलेशिया भाग जाते थे। अभी तीनों ने सिंगापुर जाने की योजना बनाई थी, लेकिन गिरफ्तारी के बाद तीनों की योजना पर पानी फिर गया।
फेसबुक से ही चैट कर करन ठगी के जाल में फंसा
हल्द्वानी। विवेचक संजीत सिंह राठौर ने बताया कि गिरफ्तार दीपा की बहन हल्दूचौड़ में रहती है। इसी कारण दीपा अपने पति रजत भुटानी के साथ हल्दूचौड़ आती जाती थी। मुकदमा दर्ज होने पर उन्होंने आना कम कर दिया था। जांच में पता चला कि दीपा ने किरन आर्या (24) को बचपन से पाला है। इसी कारण किरन उसके इशारे पर काम करती थी। किरन की जिम्मेदारी बेरोजगार लोगों को नौकरी के नाम पर फंसाना था। आगे की जिम्मेदारी आरोपी रजत पर थी। दिल्ली में इस गिरोह ने काफी लोगों के साथ ठगी की है। पुलिस इस मामले में जानकारी इकट्ठा कर रही है। तीनों अदालत के आदेश पर जेल में दाखिल कराए गए हैं।
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सीओ भूपेंद्र सिंह धोनी ने बहुउद्देशीय भवन में बताया कि पुरानी आईटीआई रोड निवासी करन सिंह ने ठग गिरोह के खिलाफ पांच जनवरी 2020 को मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि गिरोह के सदस्यों ने करन के भाई से कस्टम विभाग में नौकरी दिलाने के नाम पर नौ लाख रुपये ठग लिए थे। गिरोह ने नियुक्ति पत्र भी दिया था लेकिन कस्टम विभाग से पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी है। इस मुकदमे की विवेचना उपनिरीक्षक संजीत सिंह राठौर को सौंपी गई।
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जांच के दौरान पुलिस ने एक आरोपी अंशु मौर्या को गिरफ्तार कर पूछताछ की तो पता चला कि गिरोह का मास्टर माइंड राजस्थान के प्रतापनगर जयपुर निवासी रजत भुटानी है। उसने बागेश्वर की दीपा से प्रेम विवाह किया था। साथ ही बागेश्वर के जाड़ापानी कौशानी निवासी किरन आर्या को अपने साथ सहयोगी के रूप में काम पर रखा।
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एसएसपी सुनील कुमार मीणा ने तीनों को गिरफ्तार करने के लिए रजत पर ढाई हजार, दीपा और किरन पर 1500-1500 रुपये का इनाम घोषित किया था। कोतवाल संजय कुमार को सूचना मिली कि ठग गिरोह राजस्थान में है। इसी आधार पर उपनिरीक्षक संजीत राठौर और दीपक अरोरा, सिपाही जितेंद्र कुमार, अरुण राठौर, वीरेंद्र चौहान और पूजा की टीम राजस्थान गई। पुलिस ने तीनों को 11 दिसंबर को राजस्थान के सेक्टर 16 पुलिया प्रतापनगर जयपुर से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि यह गिरोह नौकरी दिलाने के नाम पर बेरोजगारों लोगों से 60-70 लाख रुपये ठग चुका है। पुलिस ने तीनों के पास से एक-एक पासपोर्ट, यूएई की नागरिकता के कागज, तीन मोबाइल सेट बरामद किए।
सीओ का कहना है कि कुमाऊं में भी कई लोगों से तीनों ठगी कर चुके हैं लेकिन किसी ने मुकदमा दर्ज नहीं कराया। हो सकता है कि अब पीड़ित लोग सामने आए। कोतवाल संजय कुमार ने कहा कि तीनों आरोपी दिल्ली मेें भी कई लोगों को ठग चुके हैं। तीनों का आपराधिक इतिहास पता करने के लिए दिल्ली और राजस्थान पुलिस को पत्र भेजा जाएगा।
फेसबुक पर ग्राहकों को फंसाती थी किरन
हल्द्वानी। पुलिस की पूछताछ में पता चला कि गिरफ्तार किरन फेसबुक पर चैट करने के बाद लोगों से बातचीत करती थी। पहले पता करती थी कि बात करने वाले के घर में कोई बेरोजगार तो नहीं है। फिर बेरोजगार को नौकरी दिलाने के नाम पर झांसा देती थी। ग्राहकों को डील करने के लिए रजत भुटानी सामने आता था। रजत और दीपा के चक्कर में पड़कर बेरोजगार पैसा दे देते थे।
सिंगापुर जाने से पहले ही पुलिस ने पकड़ लिया
हल्द्वानी। तीनों ठगी करने के बाद दुबई और मलेशिया भाग जाते थे। अभी तीनों ने सिंगापुर जाने की योजना बनाई थी, लेकिन गिरफ्तारी के बाद तीनों की योजना पर पानी फिर गया।
फेसबुक से ही चैट कर करन ठगी के जाल में फंसा
हल्द्वानी। विवेचक संजीत सिंह राठौर ने बताया कि गिरफ्तार दीपा की बहन हल्दूचौड़ में रहती है। इसी कारण दीपा अपने पति रजत भुटानी के साथ हल्दूचौड़ आती जाती थी। मुकदमा दर्ज होने पर उन्होंने आना कम कर दिया था। जांच में पता चला कि दीपा ने किरन आर्या (24) को बचपन से पाला है। इसी कारण किरन उसके इशारे पर काम करती थी। किरन की जिम्मेदारी बेरोजगार लोगों को नौकरी के नाम पर फंसाना था। आगे की जिम्मेदारी आरोपी रजत पर थी। दिल्ली में इस गिरोह ने काफी लोगों के साथ ठगी की है। पुलिस इस मामले में जानकारी इकट्ठा कर रही है। तीनों अदालत के आदेश पर जेल में दाखिल कराए गए हैं।