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मनसा देवी रोपवे टेंडर मामला राज्य में भ्रष्टाचार का गंभीर उदाहरण : यशपाल आर्य
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हल्द्वानी। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि हरिद्वार मनसा देवी रोपवे का टेंडर का मामला राज्य में व्याप्त भ्रष्टाचार का एक गंभीर उदाहरण है। उन्होंने कहा कि भ्रष्ट सिस्टम किस तरीके से लोगों की जान से खिलवाड़ करने से भी नहीं चूक रहा है, यह इसकी बानगी है।
जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हरिद्वार नगर निगम ने मनसा देवी रोपवे के संचालन और रखरखाव के लिए टेंडर जारी किया था जिसमें रोपवे का अनुभव रखने वाली कंपनियों को ही शामिल किया गया था। बाद में इस टेंडर में बदलाव कर दिया गया। कहा कि हरिद्वार नगर निगम ने मार्च में पात्रता मानदंड को चुपचाप बढ़ा दिया और रोपवे के अनुभव वाली कंपनियों के साथ-साथ रोपवे ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल चलाने वाली, पुल और हाईवे बनाने वाली यहां तक कि टेलीकॉम सेक्टर की कंपनियों से बोली मंगा ली।
आर्य ने कहा कि रोपवे के संचालन के लिए कंपनियों की अनुभवहीनता के कारण सुरक्षा पर सवाल उठने लगे और ये बदलाव नगर आयुक्त नंदन कुमार ने नगर निगम बोर्ड की मंजूरी के बिना किए थे जिससे प्रक्रियागत खामियों और पारदर्शिता पर सवाल उठे। इसमें जरा सी चूक हो जाए तो लोगों की जान का खतरा हो जाता है। इस टेंडर के बदलाव के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दायर किया गया। अब हाईकोर्ट ने हरिद्वार नगर निगम की ओर से संशोधित ईओआई पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है जिसमें राजमार्गों, पुलों, मेट्रो, सुरंगों, दूरसंचार और अस्पतालों से जुड़ी कंपनियों को रोपवे परियोजना के लिए बोली लगाने की अनुमति दी गई है। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि टेंडर फिलहाल रोक दिया है। कोर्ट ने इसे गंभीर विषय मानते हुए इसे मानव जिंदगी से खिलवाड़ करने वाला बताया। कहा कि सरकार को इस गंभीर भ्रष्टाचार के विषय की विस्तृत और निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
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जारी बयान में नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि हरिद्वार नगर निगम ने मनसा देवी रोपवे के संचालन और रखरखाव के लिए टेंडर जारी किया था जिसमें रोपवे का अनुभव रखने वाली कंपनियों को ही शामिल किया गया था। बाद में इस टेंडर में बदलाव कर दिया गया। कहा कि हरिद्वार नगर निगम ने मार्च में पात्रता मानदंड को चुपचाप बढ़ा दिया और रोपवे के अनुभव वाली कंपनियों के साथ-साथ रोपवे ऑपरेशन के लिए हॉस्पिटल चलाने वाली, पुल और हाईवे बनाने वाली यहां तक कि टेलीकॉम सेक्टर की कंपनियों से बोली मंगा ली।
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आर्य ने कहा कि रोपवे के संचालन के लिए कंपनियों की अनुभवहीनता के कारण सुरक्षा पर सवाल उठने लगे और ये बदलाव नगर आयुक्त नंदन कुमार ने नगर निगम बोर्ड की मंजूरी के बिना किए थे जिससे प्रक्रियागत खामियों और पारदर्शिता पर सवाल उठे। इसमें जरा सी चूक हो जाए तो लोगों की जान का खतरा हो जाता है। इस टेंडर के बदलाव के खिलाफ हाईकोर्ट में मामला दायर किया गया। अब हाईकोर्ट ने हरिद्वार नगर निगम की ओर से संशोधित ईओआई पर राज्य सरकार को फटकार लगाई है जिसमें राजमार्गों, पुलों, मेट्रो, सुरंगों, दूरसंचार और अस्पतालों से जुड़ी कंपनियों को रोपवे परियोजना के लिए बोली लगाने की अनुमति दी गई है। नेता प्रतिपक्ष का कहना है कि टेंडर फिलहाल रोक दिया है। कोर्ट ने इसे गंभीर विषय मानते हुए इसे मानव जिंदगी से खिलवाड़ करने वाला बताया। कहा कि सरकार को इस गंभीर भ्रष्टाचार के विषय की विस्तृत और निष्पक्ष जांच करानी चाहिए।
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