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Nainital News: हनुमान चालीसा पाठ करते हुए बनेगा मालपुए का प्रसाद
Wed, 12 Jun 2024 06:06 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Wed, 12 Jun 2024 06:06 AM IST
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कैंची धाम में वृंदावन से मालपुए बनाने के लिए पहुंचे कारीगर। संवाद
- फोटो : कैंची धाम में वृंदावन से मालपुए बनाने के लिए पहुंचे कारीगर। संवाद
भवाली (नैनीताल)। जितना महत्व हर वर्ष 15 जून को कैंची धाम स्थापना दिवस का है, उतना ही महत्व यहां मिलने वाला मालपुए के प्रसाद का भी है। मालपुआ का प्रसाद बनाने के कड़े नियम हैं। मालपुएं बनाने का काम 12 जून बुधवार से शुरू होगा। शुद्ध देशी घी से बने मालपुए बनाने में वही श्रद्धालु भाग ले सकता है जो व्रत पर हो और धोती, कुर्ता धारण कर उस अवधि में लगातार हनुमान चालीसा का पाठ कर रहा हो। प्रसाद के रूप में मालपुए बांटने की इच्छा नीब करौरी महाराज की ही थी।
ट्रस्ट के प्रबंधक प्रदीप साह ने बताया कि प्रसाद बांटने के लिए लाखों की संख्या में कागज की थैलियां मंगाई गई है। मालपुए के प्रसाद के साथ आलू की सब्जी भी दी जाती है। मंदिर ट्रस्ट के पंकज निगल्टिया ने बताया कि कारीगरों का दल यहां पहुंच चुका है। मालपुआ प्रसाद बनाने का जिम्मा देख रहे एमपी सिंह ने बताया कि प्रसाद शुद्धता के साथ बनाया जाता है। सिंह ने बताया जिस जगह पर मालपुआ बनाया जाएगा वहां विधि-विधान से भट्टी का पूजन कर दिया गया है। बुधवार से मालपुआ बनाने का काम शुरू हो जाएगा। 15 जून को बाबा को भोग लगाने के बाद ही इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। कैची मंदिर के प्रसाद की महत्ता इतनी है कि इसे पाने के लिए लोग दूर-दूर से यहां मंदिर में पहुंचते हैं। जो लोग यहां नहीं पहुंच पाते वह अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के माध्यम से प्रसाद मंगाते हैं। संवाद
वृंदावन से 44 कारीगरों का दल पहुंचा कैंचीधाम
44 कारीगरों का दल कैंची धाम में प्रसाद के रूप में मिलने वाले मालपुआ बनाने के लिए वृंदावन से यहां पहुंच चुका है। ये कारीगर वृंदावन से आए बृजबिहरी के नेतृत्व में मालपुआ बनाने का काम करेंगे। साथ ही सहयोग के लिए लगभग दो दर्जन लोग मंदिर ट्रस्ट के भी मौजूद रहेंगे।
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ट्रस्ट के प्रबंधक प्रदीप साह ने बताया कि प्रसाद बांटने के लिए लाखों की संख्या में कागज की थैलियां मंगाई गई है। मालपुए के प्रसाद के साथ आलू की सब्जी भी दी जाती है। मंदिर ट्रस्ट के पंकज निगल्टिया ने बताया कि कारीगरों का दल यहां पहुंच चुका है। मालपुआ प्रसाद बनाने का जिम्मा देख रहे एमपी सिंह ने बताया कि प्रसाद शुद्धता के साथ बनाया जाता है। सिंह ने बताया जिस जगह पर मालपुआ बनाया जाएगा वहां विधि-विधान से भट्टी का पूजन कर दिया गया है। बुधवार से मालपुआ बनाने का काम शुरू हो जाएगा। 15 जून को बाबा को भोग लगाने के बाद ही इसे प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। कैची मंदिर के प्रसाद की महत्ता इतनी है कि इसे पाने के लिए लोग दूर-दूर से यहां मंदिर में पहुंचते हैं। जो लोग यहां नहीं पहुंच पाते वह अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के माध्यम से प्रसाद मंगाते हैं। संवाद
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वृंदावन से 44 कारीगरों का दल पहुंचा कैंचीधाम
44 कारीगरों का दल कैंची धाम में प्रसाद के रूप में मिलने वाले मालपुआ बनाने के लिए वृंदावन से यहां पहुंच चुका है। ये कारीगर वृंदावन से आए बृजबिहरी के नेतृत्व में मालपुआ बनाने का काम करेंगे। साथ ही सहयोग के लिए लगभग दो दर्जन लोग मंदिर ट्रस्ट के भी मौजूद रहेंगे।
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