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एसटीएच में चार साल बाद शुरू हुई लिथोट्रिप्सी मशीन
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी।
Updated Thu, 11 Aug 2016 12:00 AM IST
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एसटीएच में चार वर्षों से बंद पड़ी लिथोट्रिप्सी मशीन बुधवार से शुरू हो गई। लिथोट्रिप्सी मशीन शुरू होने से किडनी में स्टोन की समस्या झेल रहे मरीजों को राहत मिलेगी। जबकि कुछ नई मशीनें भी खरीदी गई हैं।
एसटीएच डाक्टरों की कमी के साथ बदहाल मशीनों से भी जूझ रहा है। सी आर्म मशीन भी पिछले आठ माह से खराब थी। जबकि एमसीआई ने निरीक्षण के दौरान मोबाइल एक्सरे और स्टेशनरी एक्सरे मशीन न होने पर टीम ने मान्यता में आपत्ति लगा दी थी।
सी आर्म मशीन के लिए टेंडर निकाले गए थे। बुधवार को दो सी आर्म मशीनें शुरू की गई। एक मशीन सर्जरी और एक आर्थोपेडिक विभाग के लिए आई है। अब आर्थोपेडिक के आपरेशन हो सकेंगे।
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जबकि दो मोबाइल एक्सरे और दो स्टेशनरी एक्सरे मशीन भी आई हैं। मोबाइल एक्सरे मशीन का प्रयोग बिस्तर से हिलडुल न सकने वाले मरीजों के एक्सरे करने में होता है। लिथोस्ट्रोपी मशीन से बिना चीरफाड़ किए किडनी के स्टोन को तोड़कर यूरिन के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है।
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एसटीएच डाक्टरों की कमी के साथ बदहाल मशीनों से भी जूझ रहा है। सी आर्म मशीन भी पिछले आठ माह से खराब थी। जबकि एमसीआई ने निरीक्षण के दौरान मोबाइल एक्सरे और स्टेशनरी एक्सरे मशीन न होने पर टीम ने मान्यता में आपत्ति लगा दी थी।
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सी आर्म मशीन के लिए टेंडर निकाले गए थे। बुधवार को दो सी आर्म मशीनें शुरू की गई। एक मशीन सर्जरी और एक आर्थोपेडिक विभाग के लिए आई है। अब आर्थोपेडिक के आपरेशन हो सकेंगे।
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जबकि दो मोबाइल एक्सरे और दो स्टेशनरी एक्सरे मशीन भी आई हैं। मोबाइल एक्सरे मशीन का प्रयोग बिस्तर से हिलडुल न सकने वाले मरीजों के एक्सरे करने में होता है। लिथोस्ट्रोपी मशीन से बिना चीरफाड़ किए किडनी के स्टोन को तोड़कर यूरिन के रास्ते बाहर निकाल दिया जाता है।