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नैनीताल की ठंडी सड़क पर भूस्खलन
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नैनीताल के ठंड़ी सड़क स्थित पाषाण देवी मंदिर के पास हुआ भूस्खलन।
- फोटो : NAINITAL
नैनीताल। ठंडी सड़क में एक पखवाड़ा पहले शुरू हुआ भूस्खलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। शनिवार सुबह एक बार फिर पहाड़ी से भारी मात्रा में आया मलबा नैनीझील में पहुंच गया। प्रशासन की ओर से भूस्खलन पर रोक लगाने के लिए अस्थायी उपाय भी शुरू नहीं किए गए हैं।
लगभग एक पखवाड़ा पहले ठंडी सड़क में पाषाण देवी मंदिर के पास पहाड़ी में भूस्खलन शुरू हुआ था। जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद पालिका ने ठंडी सड़क में पैदल आवाजाही पर रोक लगाते हुए सड़क के दोनों ओर तारबाड़ कर दिया था। दूसरी ओर लोनिवि ने पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए मौके पर पॉलीथीन की शीट बिछाई थी।
बावजूद पहाड़ी पर लगातार भूस्खलन हो रहा है। शनिवार सुबह भी मौके पर मिट्टी और पत्थर गिरकर झील में समाते रहे। जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने कुमऊं विवि के भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. चारू चंद्र पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर कर भूस्खलन रोकने के उपाय खोजने के निर्देश दिए थे और पहाड़ी के अस्थायी इलाज के लिए दस लाख रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन अब तक मौके पर अस्थायी कार्य शुरू नहीं हुए हैं। लगातार भूस्खलन से केपी छात्रावास के भवनों पर भी खतरा मंडरा रहा है। लोनिवि और पालिका के अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में अभी अस्थायी रूप से कार्य नहीं कराए गए हैं।
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भूगर्भीय दृष्टि से कमजोर है ठंडी सड़क की पहाड़ी
नैनीताल। भूगर्भ वैज्ञानिक डॉ. बहादुर सिंह कोटलिया का कहना है कि ठंडी सड़क से सटी पहाड़ी तीव्र ढलान वाली होने के साथ भूगर्भीय दृष्टि से कमजोर है। पहाड़ी में पूर्व के वर्षों में भारी भरकम निर्माण कार्य हुए हैं इसका दबाव पहाड़ी पर पड़ रहा है। प्रो. कोटलिया का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से राजभवन, डीएसबी परिसर के गेट, फ्लैट्स मैदान, बैंड स्टेंड से ग्रांड होटल होते हुए सात नंबर की ओर के क्षेत्र में लगातार धंसाव हो रहा है। वर्ष 1998 में डीएसबी परिसर के गेट के पास बड़ा भूस्खलन हुआ था। प्रो. कोटलिया का कहना है कि तीव्र ढलान, लगातार होते निर्माण कार्य और भूगर्भीय कंपनों के कारण ठंडी सड़क की पहाड़ी रुक-रुककर दरक रही है।
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लगभग एक पखवाड़ा पहले ठंडी सड़क में पाषाण देवी मंदिर के पास पहाड़ी में भूस्खलन शुरू हुआ था। जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद पालिका ने ठंडी सड़क में पैदल आवाजाही पर रोक लगाते हुए सड़क के दोनों ओर तारबाड़ कर दिया था। दूसरी ओर लोनिवि ने पहाड़ी से हो रहे भूस्खलन को रोकने के लिए मौके पर पॉलीथीन की शीट बिछाई थी।
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बावजूद पहाड़ी पर लगातार भूस्खलन हो रहा है। शनिवार सुबह भी मौके पर मिट्टी और पत्थर गिरकर झील में समाते रहे। जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने कुमऊं विवि के भूगर्भ वैज्ञानिक प्रो. चारू चंद्र पंत की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर कर भूस्खलन रोकने के उपाय खोजने के निर्देश दिए थे और पहाड़ी के अस्थायी इलाज के लिए दस लाख रुपये स्वीकृत किए थे, लेकिन अब तक मौके पर अस्थायी कार्य शुरू नहीं हुए हैं। लगातार भूस्खलन से केपी छात्रावास के भवनों पर भी खतरा मंडरा रहा है। लोनिवि और पालिका के अधिकारियों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश के कारण भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र में अभी अस्थायी रूप से कार्य नहीं कराए गए हैं।
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भूगर्भीय दृष्टि से कमजोर है ठंडी सड़क की पहाड़ी
नैनीताल। भूगर्भ वैज्ञानिक डॉ. बहादुर सिंह कोटलिया का कहना है कि ठंडी सड़क से सटी पहाड़ी तीव्र ढलान वाली होने के साथ भूगर्भीय दृष्टि से कमजोर है। पहाड़ी में पूर्व के वर्षों में भारी भरकम निर्माण कार्य हुए हैं इसका दबाव पहाड़ी पर पड़ रहा है। प्रो. कोटलिया का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों से राजभवन, डीएसबी परिसर के गेट, फ्लैट्स मैदान, बैंड स्टेंड से ग्रांड होटल होते हुए सात नंबर की ओर के क्षेत्र में लगातार धंसाव हो रहा है। वर्ष 1998 में डीएसबी परिसर के गेट के पास बड़ा भूस्खलन हुआ था। प्रो. कोटलिया का कहना है कि तीव्र ढलान, लगातार होते निर्माण कार्य और भूगर्भीय कंपनों के कारण ठंडी सड़क की पहाड़ी रुक-रुककर दरक रही है।