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Nainital News: शोध प्रकाशनों के गुणवत्ता मानक तय करेगा कुमाऊं विश्वविद्यालय
Sat, 26 Jul 2025 02:22 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 26 Jul 2025 02:22 AM IST
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नैनीताल। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की ओर से कंसोर्टियम फॉर ऐकडेमिक एंड एथिक्स सूची को समाप्त करने के बाद उच्च शिक्षण संस्थानों पर शोध प्रकाशनों की गुणवत्ता संबंधी ज़िम्मेदारी बढ़ गई है। इसके लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत के नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने एक विशेषज्ञ समिति का गठन किया है जो तय करेगी कि किन शोध पत्रिकाओं को प्रत्यक्ष नियुक्तियों और कॅरिअर एडवांसमेंट स्कीम के तहत मान्यता दी जाए।
प्रो.रावत ने कहा है कि विवि की अकादमिक साख और शोध संस्कृति के भविष्य के लिए गुणवत्ता वाले शोध ही मान्य होने चाहिए। उनके नेतृत्व में गठित टीम न्यूनतम गुणवत्ता के मानक तय कर शोध को नई दिशा प्रदान करेगी। समिति इस बात पर विशेष ध्यान देगी कि संकाय सदस्यों की पदोन्नति के लिए केवल वही शोध कार्य मान्य हों जो विश्वसनीय जर्नलों में प्रकाशित हुए हों। समिति में वरिष्ठ प्रोफेसर, अन्य विवि के विशेषज्ञ समेत दिल्ली विवि के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को शामिल किया गया है। इनमें भूगोल, वनस्पति विज्ञान, भू-विज्ञान, हिंदी, प्रबंधन, इतिहास, रसायन, वाणिज्य, भौतिकी तथा राजनीति शास्त्र जैसे विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं। कुलपति ने कहा कि यह कदम न केवल विवि के शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाएगा, बल्कि शिक्षकों और शोधार्थियों को भी गुणवत्ता आधारित शोध की ओर प्रेरित करेगा।
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प्रो.रावत ने कहा है कि विवि की अकादमिक साख और शोध संस्कृति के भविष्य के लिए गुणवत्ता वाले शोध ही मान्य होने चाहिए। उनके नेतृत्व में गठित टीम न्यूनतम गुणवत्ता के मानक तय कर शोध को नई दिशा प्रदान करेगी। समिति इस बात पर विशेष ध्यान देगी कि संकाय सदस्यों की पदोन्नति के लिए केवल वही शोध कार्य मान्य हों जो विश्वसनीय जर्नलों में प्रकाशित हुए हों। समिति में वरिष्ठ प्रोफेसर, अन्य विवि के विशेषज्ञ समेत दिल्ली विवि के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों को शामिल किया गया है। इनमें भूगोल, वनस्पति विज्ञान, भू-विज्ञान, हिंदी, प्रबंधन, इतिहास, रसायन, वाणिज्य, भौतिकी तथा राजनीति शास्त्र जैसे विषयों के विशेषज्ञ शामिल हैं। कुलपति ने कहा कि यह कदम न केवल विवि के शैक्षणिक स्तर को ऊंचा उठाएगा, बल्कि शिक्षकों और शोधार्थियों को भी गुणवत्ता आधारित शोध की ओर प्रेरित करेगा।
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