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नंधौर इको सेंसिटिव जोन में खनन कराने की तैयारी
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हल्द्वानी। नंधौर सेंक्चुरी के इको सेंसिटिव जोन में आने वाले अपर नंधौर में खनन कराने की तैयारी है। यहां पर आपदा एक्ट के तहत मिलने वाली अनुमति के आधार पर खनन कार्य कराया जाएगा। कार्य कराने वाली संस्था, खनन अवधि भी तय कर दी गई है। खनन के लिए जल्द ही सीमांकन कराया जाना है। इस आदेश से जंगलात में खलबली मची हुई है।
नंधौर नदी के डाउन क्षेत्र में पांच गेटों के माध्यम से खनन होता है। सूत्रों के अनुसार पिछले साल अपर नंधौर नदी में जमा मलबे का संयुक्त सर्वे हुआ था। इसमें भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, प्रशासन, वन विभाग आदि के अधिकारी शामिल हुए थे। सात जनवरी को सचिव मीनाक्षी सुंदरम का एक पत्र जारी हुआ। इसमें आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के उपबंध, उत्तराखंड रिवर ड्रेजिंग नीति-2021 के तहत नदी को चैनेलाइजशन, नदी के बहाव को सुव्यवस्थित करने और आसपास के गांवों को बाढ़ और जनहानि से बचाने का जिक्र करते हुए मलबा निकासी का आदेश दिया गया। निकाले गए मलबे का इस्तेमाल किस काम के लिए होगा, यह मलबा निकासी कौन करेगा, यह कार्य छह माह तक होगा, इसका जिक्र अनुमति में है। सूत्रों के अनुसार जिस अपर नंधौर नदी में मलबा निपटाने का काम होगा वह नंधौर सेंक्चुरी क्षेत्र ( मसवाड़ी कंपार्टमेंट) में आता है। इस संबंध में जिलाधिकारी ने भी हल्द्वानी प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी को पत्र लिखा है, इसमें वन विभाग को नियमानुसार अपेक्षित सहयोग प्रदान करने के लिए कहा गया है। कहा जा रहा है कि मलबा निपटान केलिए संयुक्त सीमांकन कराने को भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने भी एक पत्र भेजा था।
इको सेंसेटिव जोन में खनन प्रतिबंध
हल्द्वानी। नंधौर इको सेंसिटिव जोन करीब दो साल पहले बना था। इको सेंसिटव जोन में वाणिज्यिक खनन, पत्थर उत्खनन आदि पर रोक है। इस संबंध में जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल का कहना है कि इस मामले में शासन से पत्र आया था, उसी क्रम में संयुक्त सीमांकन के लिए पत्र लिखा गया था। डीएफओ बाबूलाल का कहना है कि नंधौर इको सेेंसिटव जोन में आता है। आपदा एक्ट के तहत जिलाधिकारी को शक्तियां प्राप्त हैं। अगर खनन किया जाना है तो पर्यावरणीय नियमों का अनुपालन होना चाहिए।
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नंधौर नदी के डाउन क्षेत्र में पांच गेटों के माध्यम से खनन होता है। सूत्रों के अनुसार पिछले साल अपर नंधौर नदी में जमा मलबे का संयुक्त सर्वे हुआ था। इसमें भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग, प्रशासन, वन विभाग आदि के अधिकारी शामिल हुए थे। सात जनवरी को सचिव मीनाक्षी सुंदरम का एक पत्र जारी हुआ। इसमें आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के उपबंध, उत्तराखंड रिवर ड्रेजिंग नीति-2021 के तहत नदी को चैनेलाइजशन, नदी के बहाव को सुव्यवस्थित करने और आसपास के गांवों को बाढ़ और जनहानि से बचाने का जिक्र करते हुए मलबा निकासी का आदेश दिया गया। निकाले गए मलबे का इस्तेमाल किस काम के लिए होगा, यह मलबा निकासी कौन करेगा, यह कार्य छह माह तक होगा, इसका जिक्र अनुमति में है। सूत्रों के अनुसार जिस अपर नंधौर नदी में मलबा निपटाने का काम होगा वह नंधौर सेंक्चुरी क्षेत्र ( मसवाड़ी कंपार्टमेंट) में आता है। इस संबंध में जिलाधिकारी ने भी हल्द्वानी प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी को पत्र लिखा है, इसमें वन विभाग को नियमानुसार अपेक्षित सहयोग प्रदान करने के लिए कहा गया है। कहा जा रहा है कि मलबा निपटान केलिए संयुक्त सीमांकन कराने को भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग ने भी एक पत्र भेजा था।
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इको सेंसेटिव जोन में खनन प्रतिबंध
हल्द्वानी। नंधौर इको सेंसिटिव जोन करीब दो साल पहले बना था। इको सेंसिटव जोन में वाणिज्यिक खनन, पत्थर उत्खनन आदि पर रोक है। इस संबंध में जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल का कहना है कि इस मामले में शासन से पत्र आया था, उसी क्रम में संयुक्त सीमांकन के लिए पत्र लिखा गया था। डीएफओ बाबूलाल का कहना है कि नंधौर इको सेेंसिटव जोन में आता है। आपदा एक्ट के तहत जिलाधिकारी को शक्तियां प्राप्त हैं। अगर खनन किया जाना है तो पर्यावरणीय नियमों का अनुपालन होना चाहिए।
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