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जंगलात ने डीएम को भेजा पत्र, कई सुझाव रखे
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हल्द्वानी। नंधौर अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन में खनन (मलबा निस्तारण) कराने की तैयारी की जा रही है, इसको लेकर वन विभाग ने जिलाधिकारी नैनीताल को एक पत्र भेजा है। इसमें उक्त कार्य कराने में कोई विधिक समस्या उत्पन्न न हो, उसके लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इसमें खनिज मात्रा का निर्धारण का कार्य, पर्यावरणीय मंजूरी आदि प्राप्त करने का अनुरोध किया गया है।
नंधौर नदी के अपर एरिया में खनन (आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के उपबंध अन्य किसी विधि या अधिनियम से असंगत होते हुए भी प्रभावी होने के दृष्टिगत उत्तराखंड रिवर ड्रेजिंग नीति-2021 के तहत ड्रेजिंग कार्य) कराने की तैयारी की जा रही है, यह इलाका नंधौर अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन में आता है। ऐसे में जंगलात में खलबली मची हुई है। इस मामले में हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने जिलाधिकारी को एक पत्र लिखा है। इसमें कई बातों का अनुरोध किया गया है। इसमें कहा गया है कि संबंधित आरक्षित वन क्षेत्र एवं नंधौर अभयारण्य का इको सेंसिटिव जोन है, इस जोन की एक निगरानी समिति है। जिसके अध्यक्ष डीएम है। इस समिति की रिपोर्ट प्राप्त कर ली जाए। संबंधित क्षेत्र आबादी से दूर है। जो मलबे की निकासी होनी है, उसकी मात्रा का निर्धारण भारतीय जल एवं मृदा संरक्षण संस्थान, आईआईटी रुड़की से स्थलीय निरीक्षण कराने के साथ रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सुनिश्चित किया जाए। यह भी कहा गया है कि वन्यजीव अभयारण्य के इको सेंसिटिव व शिवालिक एलिफेंट रिजर्व का भाग है, ऐसे में नेशनल बोर्ड आफ वाइल्ड लाइफ से भी रिपोर्ट प्राप्त कर लिया जाए। इसके अलावा पर्यावरणीय स्वीकृति भी प्राप्त कर ली जाएं। इसके अलावा जंगलात ने कुछ विधिक मामलों( कोर्ट के आर्डर) का भी जिक्र किया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
हल्द्वानी। जिलाधिकारी डीएस गर्ब्याल का कहना है कि अभी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र प्राप्त होने के और उसे देखने के बाद आगे निर्णय लिए जाएंगे। डीएफओ, हल्द्वानी वन प्रभाग बाबूलाल का कहना है कि जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है, जिसमें सभी विधिक पहलुओं से अवगत कराया गया है।
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नंधौर नदी के अपर एरिया में खनन (आपदा प्रबंधन अधिनियम-2005 के उपबंध अन्य किसी विधि या अधिनियम से असंगत होते हुए भी प्रभावी होने के दृष्टिगत उत्तराखंड रिवर ड्रेजिंग नीति-2021 के तहत ड्रेजिंग कार्य) कराने की तैयारी की जा रही है, यह इलाका नंधौर अभयारण्य के इको सेंसिटिव जोन में आता है। ऐसे में जंगलात में खलबली मची हुई है। इस मामले में हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ ने जिलाधिकारी को एक पत्र लिखा है। इसमें कई बातों का अनुरोध किया गया है। इसमें कहा गया है कि संबंधित आरक्षित वन क्षेत्र एवं नंधौर अभयारण्य का इको सेंसिटिव जोन है, इस जोन की एक निगरानी समिति है। जिसके अध्यक्ष डीएम है। इस समिति की रिपोर्ट प्राप्त कर ली जाए। संबंधित क्षेत्र आबादी से दूर है। जो मलबे की निकासी होनी है, उसकी मात्रा का निर्धारण भारतीय जल एवं मृदा संरक्षण संस्थान, आईआईटी रुड़की से स्थलीय निरीक्षण कराने के साथ रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सुनिश्चित किया जाए। यह भी कहा गया है कि वन्यजीव अभयारण्य के इको सेंसिटिव व शिवालिक एलिफेंट रिजर्व का भाग है, ऐसे में नेशनल बोर्ड आफ वाइल्ड लाइफ से भी रिपोर्ट प्राप्त कर लिया जाए। इसके अलावा पर्यावरणीय स्वीकृति भी प्राप्त कर ली जाएं। इसके अलावा जंगलात ने कुछ विधिक मामलों( कोर्ट के आर्डर) का भी जिक्र किया है।
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क्या कहते हैं अधिकारी
हल्द्वानी। जिलाधिकारी डीएस गर्ब्याल का कहना है कि अभी पत्र प्राप्त नहीं हुआ है। पत्र प्राप्त होने के और उसे देखने के बाद आगे निर्णय लिए जाएंगे। डीएफओ, हल्द्वानी वन प्रभाग बाबूलाल का कहना है कि जिलाधिकारी को पत्र भेजा गया है, जिसमें सभी विधिक पहलुओं से अवगत कराया गया है।
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