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कर्नाटक के हाथियों को रास गया कार्बेट का माहौल
अमर उजाला ब्यूरो रामनगर
Updated Wed, 21 Jun 2017 01:46 AM IST
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रामनगर में कालागढ डिविजन में गश्त के लिए तैयार खड़े हाथी
- फोटो : amar ujala
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कार्बेट नेशनल पार्क में मार्च में कर्नाटक से लाए गए नौ हाथियों को यहां की आबोहवा रास आ गई है। अब वे गश्त को तैयार हो गए हैं। पार्क में अब छह मादा और नौ हाथी हो गए हैं। इससे मानसून सत्र में गश्त में सहूलियत हो गई है।
पार्क के निदेशक सुरेंद्र मेहरा ने बताया कि कर्नाटक से नौ नर हाथियों को यहां लाया गया था। उन्हें एक महीने से अधिक समय तक कालागढ़ डिवीजन में रखा गया था। यहां महावतों के अलावा किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। मकसद यह था कि हाथी पार्क की आबोहवा मे ढल जाएं। उनके लिए पार्क में मिलने वाले खानपान में भी परिवर्तन किया गया था।
यहां के हाथियों को रोटी, गुड़ और गन्ना दिया जाता है, लेकिन कर्नाटक के हाथी भात के बडे़-बडे़ लड्डू खाते थे। हाथियों को यहां के खानपान की आदत डाली गई। अब वे रोटी भी खा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन हाथियों से पार्क की अतिसंवेदनशील दक्षिणी सीमा के बहारी क्षेत्र के साथ ही पार्क के अंदर के क्षेत्रों में भी गश्त की जा रही है।
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तीन हाथी झिरना, तीन हाथी हल्दुपड़ाव के आसपास गश्त करेंगे। एक हाथी पाखरों तक गश्त करेगा। गश्त के दौरान मोरघट्टी मे भी कैंप रहेगा। उन्होंने बताया कि सीटीआर फाउंडेशन के माध्यम से कर्नाटक के ही आठ महावत उनके लिए रखे गए हैं।
उन्हें जंगल के लगभग सभी रूट दिखा दिए गए हैं। इससे पार्क के अतिसंवेदनशील क्षेत्र मे पूर्णत: चौकसी रहने पर संदिग्धों की आवाजाही पर अंकुश लगेगा। हाथियों का हर महीने पार्क के डॉक्टरों की ओर से नियमित चेकअप भी कराया जाएगा।
भोजन में अब चना भी मिलेगा
रामनगर (नैनीताल)। कार्बेट पार्क में अब तक हाथियों को गन्ना, रोटी और गुड़ मिला करता था लेकिन अब मेन्यू में चना भी बढ़ा दिया गया है। निदेशक सुुरेंद्र मेहरा ने बताया कि हाथियों को ताकतवर बनाने के लिए ऐसा किया गया है।
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पार्क के निदेशक सुरेंद्र मेहरा ने बताया कि कर्नाटक से नौ नर हाथियों को यहां लाया गया था। उन्हें एक महीने से अधिक समय तक कालागढ़ डिवीजन में रखा गया था। यहां महावतों के अलावा किसी को जाने की इजाजत नहीं थी। मकसद यह था कि हाथी पार्क की आबोहवा मे ढल जाएं। उनके लिए पार्क में मिलने वाले खानपान में भी परिवर्तन किया गया था।
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यहां के हाथियों को रोटी, गुड़ और गन्ना दिया जाता है, लेकिन कर्नाटक के हाथी भात के बडे़-बडे़ लड्डू खाते थे। हाथियों को यहां के खानपान की आदत डाली गई। अब वे रोटी भी खा रहे हैं। उन्होंने बताया कि इन हाथियों से पार्क की अतिसंवेदनशील दक्षिणी सीमा के बहारी क्षेत्र के साथ ही पार्क के अंदर के क्षेत्रों में भी गश्त की जा रही है।
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तीन हाथी झिरना, तीन हाथी हल्दुपड़ाव के आसपास गश्त करेंगे। एक हाथी पाखरों तक गश्त करेगा। गश्त के दौरान मोरघट्टी मे भी कैंप रहेगा। उन्होंने बताया कि सीटीआर फाउंडेशन के माध्यम से कर्नाटक के ही आठ महावत उनके लिए रखे गए हैं।
उन्हें जंगल के लगभग सभी रूट दिखा दिए गए हैं। इससे पार्क के अतिसंवेदनशील क्षेत्र मे पूर्णत: चौकसी रहने पर संदिग्धों की आवाजाही पर अंकुश लगेगा। हाथियों का हर महीने पार्क के डॉक्टरों की ओर से नियमित चेकअप भी कराया जाएगा।
भोजन में अब चना भी मिलेगा
रामनगर (नैनीताल)। कार्बेट पार्क में अब तक हाथियों को गन्ना, रोटी और गुड़ मिला करता था लेकिन अब मेन्यू में चना भी बढ़ा दिया गया है। निदेशक सुुरेंद्र मेहरा ने बताया कि हाथियों को ताकतवर बनाने के लिए ऐसा किया गया है।