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आईएफएस संजीव चतुर्वेदी मामला: कैट दिल्ली पीठ में एक और न्यायाधीश अलग, अब तक 17 न्यायाधीश-सदस्य हुए बाहर

Sat, 26 Sep 2026 10:36 PM IST
Heera अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल
अमर उजाला नेटवर्क, नैनीताल Published by: Heera Updated Sat, 26 Sep 2026 10:36 PM IST
सार

उत्तराखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों की सुनवाई से केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की दिल्ली पीठ के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह वर्मा ने स्वयं को अलग कर लिया है। 

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Justice Rajveer Singh Verma of the CAT Delhi bench also recused himself in the Sanjiv Chaturvedi case
उत्तराखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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उत्तराखंड कैडर के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी से जुड़े मामलों की सुनवाई से केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) की दिल्ली पीठ के न्यायमूर्ति राजवीर सिंह वर्मा ने स्वयं को अलग कर लिया है। अब तक चतुर्वेदी से जुड़े मामलों में 17 न्यायाधीश व सदस्य स्वयं को अलग कर चुके हैं।

यह मामला मई 2025 के सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के परिप्रेक्ष्य में आईएफएस अधिकारियों की मूल्यांकन रिपोर्ट के चैनल से संबंधित उत्तराखंड सरकार के नवंबर 2021 के आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है।

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इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय के दो न्यायाधीश, नैनीताल उच्च न्यायालय के चार न्यायाधीश, कैट के अध्यक्ष सहित नौ न्यायाधीश सदस्य तथा जिला न्यायपालिका के दो न्यायिक अधिकारी चतुर्वेदी से संबंधित मामलों की सुनवाई से अलग हो चुके हैं। हालांकि अलग होने के कारण आदेशों में दर्ज नहीं किए गए हैं।

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सितंबर-अक्टूबर 2025 में नैनीताल उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति आलोक वर्मा और न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी ने चतुर्वेदी की ओर से दायर अवमानना मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग किया था।

फरवरी 2024 में नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज तिवारी ने चतुर्वेदी की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई से और मई 2023 में न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल ने चतुर्वेदी के मूल्यांकन रिपोर्ट से जुड़े मामले से स्वयं को अलग किया था।

इससे पहले नवंबर 2013 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने चतुर्वेदी द्वारा दायर एक मामले की सुनवाई से और अगस्त 2016 में न्यायमूर्ति यूयू ललित ने भी उसी मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग किया था। यह मामला हरियाणा में चतुर्वेदी द्वारा उठाए गए भ्रष्टाचार संबंधी मामलों की सीबीआई जांच की मांग से जुड़ा था।

कैट और अन्य अदालतों में भी सुनवाई से अलग हुए जज व सदस्य
मार्च 2019 में तत्कालीन कैट अध्यक्ष न्यायमूर्ति एल नरसिम्हा रेड्डी ने और फरवरी 2021 में कैट दिल्ली के न्यायमूर्ति आरएन सिंह ने भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति से जुड़े मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग किया। नवंबर 2023 में कैट की एक अन्य पीठ ने भी चतुर्वेदी से संबंधित मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग किया था।

अप्रैल 2025 में नैनीताल की एसीजेएम नेहा कुशवाहा ने कैट के न्यायाधीश मनीष गर्ग के विरुद्ध चतुर्वेदी द्वारा दायर मानहानि मामले की सुनवाई से कैट के एक अन्य न्यायाधीश डीएस महरा के साथ पूर्व पारिवारिक संबंध का उल्लेख कर स्वयं को अलग किया था। 

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