{"_id":"5f6907bf8ebc3ee2b75507ee","slug":"jamrani-haidakhan-temple-will-not-shift-haldwani-news-hld3977863167","type":"story","status":"publish","title_hn":"जमरानी : शिफ्ट नहीं होगा हैड़ाखान मंदिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
जमरानी : शिफ्ट नहीं होगा हैड़ाखान मंदिर
विज्ञापन
हल्द्वानी। जमरानी बांध के डूब क्षेत्र में आ रहे प्रसिद्ध हैड़ाखान मंदिर को शिफ्ट नहीं करने का फैसला लिया गया है। जनता की धार्मिक भावनाओं को देखते हुए एलीवेटेड संरचनाओं के तहत उसी स्थल पर मंदिर का निर्माण किया जाएगा। मंदिर निर्माण से पूर्व स्थल का मृदा परीक्षण कराया जाएगा। मृदा परीक्षण पर ही मंदिर के स्थायित्व का पता लग पाएगा।
जमरानी बांध परियोजना निर्माण में क्षेत्र के आठ गांवों के अलावा हैड़ाखान मंदिर डूब क्षेत्र में आ रहा है। डूब क्षेत्र के ग्रामीणों के पुनर्वास और विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है लेकिन हैड़ाखान मंदिर के साथ लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। जमरानी बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता (पुनर्वास) बीबी पांडे ने बताया कि मंदिर को एलीवेटेड संरचनाओं के तहत उसी स्थल पर मौजूदा ऊंचाई से अधिक ऊंचाई का बनाने का फैसला लिया गया है।
मंदिर निर्माण से पूर्व स्थल का मृदा परीक्षण विशेषज्ञों से कराया जाएगा। मृदा परीक्षण पर ही मंदिर का स्थायित्व निर्भर करेगा। मृदा परीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद सलाहकार की मदद से इसका नक्शा तैयार किया जाएगा। मंदिर को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए तकनीकी पहलू देखे जा रहे हैं। सबकुछ सही पाए जाने पर मजबूत पिलरों की मदद से उसी स्थल पर मंदिर को ऊंचा उठाया जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जमरानी बांध परियोजना निर्माण में क्षेत्र के आठ गांवों के अलावा हैड़ाखान मंदिर डूब क्षेत्र में आ रहा है। डूब क्षेत्र के ग्रामीणों के पुनर्वास और विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है लेकिन हैड़ाखान मंदिर के साथ लोगों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। जमरानी बांध परियोजना के अधिशासी अभियंता (पुनर्वास) बीबी पांडे ने बताया कि मंदिर को एलीवेटेड संरचनाओं के तहत उसी स्थल पर मौजूदा ऊंचाई से अधिक ऊंचाई का बनाने का फैसला लिया गया है।
विज्ञापन
मंदिर निर्माण से पूर्व स्थल का मृदा परीक्षण विशेषज्ञों से कराया जाएगा। मृदा परीक्षण पर ही मंदिर का स्थायित्व निर्भर करेगा। मृदा परीक्षण की रिपोर्ट आने के बाद सलाहकार की मदद से इसका नक्शा तैयार किया जाएगा। मंदिर को मजबूत और टिकाऊ बनाने के लिए तकनीकी पहलू देखे जा रहे हैं। सबकुछ सही पाए जाने पर मजबूत पिलरों की मदद से उसी स्थल पर मंदिर को ऊंचा उठाया जाएगा।
विज्ञापन