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कब्रों की होगी जांच मगर हल्द्वानी के लिए आईएसबीटी जरूरी: आर्य
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 May 2017 01:48 AM IST
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यशपाल आर्य
- फोटो : अमरउजाला
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आईएसबीटी की जमीन पर खुदाई में कब्रें मिली हैं, इनकी सत्यता की जांच की जाएगी लेकिन हल्द्वानी के विकास के लिए आईएसबीटी बेहद जरूरी है। यह प्रोजेक्ट किसी भी सूरत में लटकाया नहीं जाएगा। यह बात परिवहन मंत्री यशपाल आर्य ने कब्रनुमा चबूतरों का निरीक्षण के दौरान कही।
बृहस्पतिवार को यशपाल आर्य ने प्रशासन और परिवहन अधिकारियों के साथ गौला नदी के किनारे सटे आठ हेक्टेयर जंगलात की जमीन पर बन रहे निर्माणाधीन इंटर स्टेट बस टर्मिनल पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने खुदाई के दौरान जमीन से निकलने वाली कंकालों व कब्रों का निरीक्षण किया।
बाद में अधिकारियों और कार्यदायी संस्था नागार्जुन से भी गोपनीय बातचीत की। उन्होंने कहा कि तीन-चार दशक पूर्व यह इलाका नदी का था। यहां कब्रें हैं इनसे इनकार नहीं किया जा सकता है। इन कब्रों में कई छोटी-छोटी हैं। इनमें सीमेंट की कब्रों के अलावा जो कब्रें दिखाई दे रही हैं वे 10-15 साल पुरानी है।
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हालांकि अब ये कब्रें यहां कैसे आई इसकी सत्यता की जांच कराई जाएगी। आर्य ने कहा कि हल्द्वानी के लिए विकास के लिए आईएसबीटी एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। रोडवेज पर दबाव पड़ रहा था इसलिए यहां शिफ्ट करने की योजना है।
कब्रों की जांच तो होती रहेगी लेकिन आईएसबीटी के प्रोजेक्ट को किसी भी कीमत पर लटकने नहीं दिया जाएगा। आर्य ने बताया कि हड्िडयों के सैंपल लेकर डीएनए और कार्बन डेटिंग की जांच के लिए भेजे जाएंगे।
रिपोर्ट के बाद सारी सत्यता सामने आ जाएगी। उन्होंने कार्यदायी संस्था को फिलहाल काम रोकने के निर्देश और कब्रों से किसी भी किस्म की छेड़छाड़ नहीं करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान आरटीओ राजीव महरा, एसडीएम एपी वाजपेयी, एएफ रेड्डी, तरुण बंसल आदि भी मौजूद थे।
कंकाल मिले, डीएनए जांच के लिए भेजे
बृहस्पतिवार को भी आईएसबीटी की जमीन से हड्डियों के टुकड़े मिले हैं पुलिस ने इनको कब्जे में ले लिया है। पुलिस अब इनको डीएनए व कार्बन डेटिंग की जांच के लिए भेजेगी।
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बृहस्पतिवार को यशपाल आर्य ने प्रशासन और परिवहन अधिकारियों के साथ गौला नदी के किनारे सटे आठ हेक्टेयर जंगलात की जमीन पर बन रहे निर्माणाधीन इंटर स्टेट बस टर्मिनल पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने खुदाई के दौरान जमीन से निकलने वाली कंकालों व कब्रों का निरीक्षण किया।
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बाद में अधिकारियों और कार्यदायी संस्था नागार्जुन से भी गोपनीय बातचीत की। उन्होंने कहा कि तीन-चार दशक पूर्व यह इलाका नदी का था। यहां कब्रें हैं इनसे इनकार नहीं किया जा सकता है। इन कब्रों में कई छोटी-छोटी हैं। इनमें सीमेंट की कब्रों के अलावा जो कब्रें दिखाई दे रही हैं वे 10-15 साल पुरानी है।
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हालांकि अब ये कब्रें यहां कैसे आई इसकी सत्यता की जांच कराई जाएगी। आर्य ने कहा कि हल्द्वानी के लिए विकास के लिए आईएसबीटी एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है। रोडवेज पर दबाव पड़ रहा था इसलिए यहां शिफ्ट करने की योजना है।
कब्रों की जांच तो होती रहेगी लेकिन आईएसबीटी के प्रोजेक्ट को किसी भी कीमत पर लटकने नहीं दिया जाएगा। आर्य ने बताया कि हड्िडयों के सैंपल लेकर डीएनए और कार्बन डेटिंग की जांच के लिए भेजे जाएंगे।
रिपोर्ट के बाद सारी सत्यता सामने आ जाएगी। उन्होंने कार्यदायी संस्था को फिलहाल काम रोकने के निर्देश और कब्रों से किसी भी किस्म की छेड़छाड़ नहीं करने के निर्देश दिए हैं। इस दौरान आरटीओ राजीव महरा, एसडीएम एपी वाजपेयी, एएफ रेड्डी, तरुण बंसल आदि भी मौजूद थे।
कंकाल मिले, डीएनए जांच के लिए भेजे
बृहस्पतिवार को भी आईएसबीटी की जमीन से हड्डियों के टुकड़े मिले हैं पुलिस ने इनको कब्जे में ले लिया है। पुलिस अब इनको डीएनए व कार्बन डेटिंग की जांच के लिए भेजेगी।