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Nainital News: परीक्षाफल में गड़बड़ी, छात्रों के भविष्य से खेल रहा कुमाऊं विवि
Tue, 02 Jul 2024 07:18 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Tue, 02 Jul 2024 07:18 AM IST
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कुमाऊं विवि
हल्द्वानी। कुमाऊं विश्वविद्यालय का एक और अजब-गजब कारनामा सामने आया है। 24 जून को विवि की ओर से जारी बीए तृतीय वर्ष के रिजल्ट में कई छात्रों के बेहद कम नंबर आए हैं। समाजशास्त्र के एक पेपर में छात्रों को तीन, चार, पांच, सात और नौ अंक प्राप्त हुए हैं जबकि दूसरे पेपर में 25 से अधिक नंबर आए हैं। परीक्षा देने के बाद भी कई छात्रों के रिजल्ट में नंबर नहीं चढ़े हैं।
एमबीपीजी कॉलेज से बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा देने वाले हिमांशु बिष्ट ने बताया कि समाजशास्त्र के एक पेपर में उनके पांच नंबर हैं जबकि दूसरे पेपर में 28 नंबर चढ़े हैं। इससे पूर्व बीए द्वितीय वर्ष में एक पेपर में 37 और दूसरे में 39 नंबर मिले थे। इस बार कुमाऊं विवि की लापरवाही की वजह से गलत अंक चढ़े हैं। हिमांशु ने बताया कि राजनीतिक विज्ञान के दोनों पेपर दिए थे लेकिन एक पेपर में मार्क्स मिसिंग (एमएम) लिखा दिखा रहा है। इसी तरह राकेश सिंह बोरा को समाजशास्त्र के एक पेपर में तीन और दूसरे पेपर में 32 अंक, नीतू मौर्या के एक पेपर में चार और दूसरे पेपर में 26, आसी रानू के एक पेपर में सात और दूसरे पेपर में 28 नंबर प्राप्त हुए हैं। ऐसे कई मामले हैं जिनमें छात्रों को बेहद कम अंक मिले हैं। छात्रों ने कुमाऊं विवि की कार्यप्रणाली के खिलाफ रोष जताया है।
हर साल रिजल्ट में गड़बड़ी के सामने आते हैं मामले
हल्द्वानी। यह पहला मौका नहीं है जब कुमाऊं विवि की ओर से जारी रिजल्ट में गड़बड़ी हुई है। कमोबेश हर साल विवि की लापरवाही का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। छात्रों की ओर से कुमाऊं विवि की वेबसाइट से आरटीआई दाखिल करने के बाद उन्हें परीक्षा की कॉपी मिलेगी। इसके बाद छात्र प्रोफेसर से कॉपी के मूल्यांकन की दोबारा जांच करा सकते हैं। मूल्यांकन में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो छात्र कुमाऊं विवि में रिव्यू के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं कई छात्र इस प्रक्रिया में उलझने के बजाय दोबारा परीक्षा देते हैं। इस कारण उनका एक साल बर्बाद हो जाता है।
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इस मामले में समिति के माध्यम से जांच की जाएगी कि मूल्यांकन सही हुआ है या नहीं। मूल्यांकन में यदि को त्रुटि पाई जाती है तो समिति के निर्णय के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. महेंद्र राणा, परीक्षा नियंत्रक, कुमाऊं विवि
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एमबीपीजी कॉलेज से बीए तृतीय वर्ष की परीक्षा देने वाले हिमांशु बिष्ट ने बताया कि समाजशास्त्र के एक पेपर में उनके पांच नंबर हैं जबकि दूसरे पेपर में 28 नंबर चढ़े हैं। इससे पूर्व बीए द्वितीय वर्ष में एक पेपर में 37 और दूसरे में 39 नंबर मिले थे। इस बार कुमाऊं विवि की लापरवाही की वजह से गलत अंक चढ़े हैं। हिमांशु ने बताया कि राजनीतिक विज्ञान के दोनों पेपर दिए थे लेकिन एक पेपर में मार्क्स मिसिंग (एमएम) लिखा दिखा रहा है। इसी तरह राकेश सिंह बोरा को समाजशास्त्र के एक पेपर में तीन और दूसरे पेपर में 32 अंक, नीतू मौर्या के एक पेपर में चार और दूसरे पेपर में 26, आसी रानू के एक पेपर में सात और दूसरे पेपर में 28 नंबर प्राप्त हुए हैं। ऐसे कई मामले हैं जिनमें छात्रों को बेहद कम अंक मिले हैं। छात्रों ने कुमाऊं विवि की कार्यप्रणाली के खिलाफ रोष जताया है।
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हर साल रिजल्ट में गड़बड़ी के सामने आते हैं मामले
हल्द्वानी। यह पहला मौका नहीं है जब कुमाऊं विवि की ओर से जारी रिजल्ट में गड़बड़ी हुई है। कमोबेश हर साल विवि की लापरवाही का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। छात्रों की ओर से कुमाऊं विवि की वेबसाइट से आरटीआई दाखिल करने के बाद उन्हें परीक्षा की कॉपी मिलेगी। इसके बाद छात्र प्रोफेसर से कॉपी के मूल्यांकन की दोबारा जांच करा सकते हैं। मूल्यांकन में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो छात्र कुमाऊं विवि में रिव्यू के लिए आवेदन कर सकता है। वहीं कई छात्र इस प्रक्रिया में उलझने के बजाय दोबारा परीक्षा देते हैं। इस कारण उनका एक साल बर्बाद हो जाता है।
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इस मामले में समिति के माध्यम से जांच की जाएगी कि मूल्यांकन सही हुआ है या नहीं। मूल्यांकन में यदि को त्रुटि पाई जाती है तो समिति के निर्णय के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. महेंद्र राणा, परीक्षा नियंत्रक, कुमाऊं विवि