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रैणी आपदा के मामले में केंद्र सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 01 Jul 2021 02:33 AM IST
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Instructions to the Central Government to file a reply in the case of Raini disaster
नैनीताल। हाईकोर्ट ने चमोली के रैणी गांव में सात फरवरी को आई आपदा के संबंध में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद केंद्र सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। एनटीपीसी की ओर से दायर जवाब में 84 परिवारों को मुआवजा दे दिए जाने की जानकारी दी गई। याचिकाकर्ता ने प्रतिबंधित क्षेत्र में हाइड्रोपॉवर प्रोजेक्ट की मंजूरी देने पर सवाल उठाए हैं और आपदा के लिए सरकार और कंपनी की लापरवाही को जिम्मेदार बताते हुए याचिका में इन दोनों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराने का आग्रह किया है।
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सुनवाई के दौरान एनटीपीसी की ओर से अपना जवाब पेश किया गया। इसमें कहा गया कि एनटीपीसी एक जिम्मेदार कंपनी है। सात फरवरी को आई आपदा में कई लोगों ने अपनी जान तक गंवा दी और कई मजदूर अभी लापता हैं। एनटीपीसी मृतक और लापता लोगों के परिवारों को मानकों के अनुसार मुआवजा दे रहा है। अभी तक चिह्नित 84 परिवारों को मुआवजा दे दिया गया है। पहाड़ी क्षेत्रों में होनी वाली आपदाओं की भविष्यवाणी करने के लिए कोई उपकरण नहीं लगाए गए हैं। अगर अर्ली अलार्मिंग सिस्टम लगे होते तो इतने लोगों की जान नहीं जाती।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता पीसी तिवारी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि चमोली के रैणी गांव की गौरा देवी सहित अन्य महिलाओं ने वनों को बचाने के लिए सत्तर के दशक में एक अनूठी पहल की थी। यहीं से चिपको आंदोलन की शुरुआत हुई। याचिकाकर्ता का कहना था कि यही क्षेत्र आज आपदा की मार झेल रहा है। सात फरवरी को आई आपदा में कई लोगों के परिवार उजड़ गए और कितने लोग कंपनियों और सरकार की लापरवाही के कारण मौत की गोद में समा गए। यह प्रतिबंधित क्षेत्र है। यहां नंदा देवी बायोस्फेयर क्षेत्र भी घोषित है फिर सरकार ने यहां पर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बनाने की अनुमति क्यों दी? पहले भी यह क्षेत्र संवेदनशील रहा है।
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याचिकाकर्ता का कहना था कि आपदा के दौरान राज्य के बडे़ नेताओं और अधिकारियों ने यहां का दौरा किया लेकिन पीड़ितों को न तो मुआवजा दिया गया और न ही उनको न्याय मिला। जहां पर यह घटना हुई वहां पर किसी भी तरह का अर्ली अलार्मिंग सिस्टम नहीं लगा था। इस क्षेत्र में एबलांच को आने में 15 मिनट लगे थे। अलार्मिंग सिस्टम होता तो कई लोगों की जान बच सकती थी। याचिकाकर्ता की ओर से आपदा पीड़ितों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग की गई है। याचिका में यह भी मांग की गई है कि सरकार और कंपनी के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए क्योंकि यह आपदा सरकार और कंपनियों की लापरवाही के कारण घटित हुई है।
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