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मत विभाजन में भाजपा के साथ थे बागी
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, नैनीताल।
Updated Wed, 27 Apr 2016 12:14 AM IST
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नैनीताल। बागी विधायकों के मामले में सोमवार को हाईकोर्ट ने विधानसभा स्पीकर गोविंद सिंह कुंजवाल से जो सवाल किए थे मंगलवार को उनके वकील पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं उनके बेटे अमित सिब्बल ने कोर्ट में स्पीकर का पक्ष रखा। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट में न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तिथि नियत की है।
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बता दें कि सोमवार को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सीए सुंदरम और दिनेश द्विवेदी ने हाईकोर्ट में बागी विधायकों का पक्ष रखा था। मंगलवार को स्पीकर के अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सोमवार को कोर्ट की ओर से पूछे गए सवाल ‘विधायकों की बर्खास्तगी 27 को ही क्यों की गई जबकि 28 को फ्लोर टेस्ट होना था’ के जवाब में कहा कि बर्खास्तगी 27 को की गई क्योंकि विधायक बागी हो गए थे। कोर्ट के सवाल ‘सदन में वित्त विधेयक पारित हुआ या नहीं’ के जवाब में कहा कि वित्त विधेयक पास हो गया था, लेकिन सदन में घोषणा पत्र में विरोध हुआ था।
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18 मार्च को विधानसभा में विनियोग विधेयक पास हो गया था। लेकिन सदन के बाहर नौ विधायकों द्वारा विधेयक पास न होने का तर्क देना सदन की कार्यवाही में नहीं होता है। इन विधायकों ने डिमांड ऑफ ग्रांट के प्रस्ताव रखे थे, जो मंजूर हुए थे। इन विधायकों ने किसी भी विभाग के बजट पर आपत्ति दर्ज नहीं की थी। केवल विनियोग विधेयक के पारित होने के समय शोर शराबा हुआ जिसे स्पीकर ने पारित घोषित कर दिया।
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सिब्बल ने कहा कि उनका वित्त विधेयक पारित होने संबंधी कोई बिंदु नहीं है बल्कि बागी विधायकों द्वारा सदन के बाद गैलरी और बस समेत जहाजों में भाजपा के साथ जाना उनका मुख्य मुद्दा है। कपिल सिब्बल ने कहा कि इन 9 बागियों में से एक पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और दूसरा कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत हैं।
कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा कि भाजपा ने 18 मार्च की सुबह ही सरकार के अल्पमत में होने की बात इसलिए कही थी क्योंकि उनके 26 और कांग्रेस के 9 बागी विधायकों ने पत्र में हस्ताक्षर किए थे जो इन 9 विधायकों का चरित्र दिखाता है। यह भी कहा कि बागियों सहित 35 विधायकों ने राज्यपाल से सदन में मत विभाजन की मांग की थी जिसका मतलब ये हुआ कि वो सरकार गिराना चाहते थे क्योंकि उन्होंने दूसरा गठबंधन कर लिया था।
कर्नाटक के येदियुरप्पा केस को कपिल सिब्बल ने उत्तराखंड से भिन्न बताते हुए कहा कि वहां के 13 विधायकों ने राज्यपाल को अलग-अलग ज्ञापन देकर सरकार को बर्खास्त करने की मांग की थी, लेकिन उत्तराखंड के नौ विधायकों ने भाजपा के 26 विधायकों के साथ संयुक्त ज्ञापन राज्यपाल को देकर सरकार की बर्खास्तगी की मांग की थी जो स्वेच्छा से पार्टी छोड़ने के अंतर्गत दल बदल कानून में आता है।
स्पीकर की ओर से कपिल सिब्बल ने यह भी कहा कि बर्खास्त विधायकों ने मुख्यमंत्री का विरोध नहीं किया था, क्योंकि उन्होंने अपने किसी विरोधी पत्र में मुख्यमंत्री का जिक्र तक नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ये दर्शाता है कि याचिकाकर्ता का मुख्यमंत्री का विरोध वाला दावा गलत है।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने मामले की अग्रीम सुनवाई के लिए 28 अप्रैल की तिथि नियत की है। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता दिनेश द्विवेदी, पूर्व महाधिवक्ता यूके उनियाल, साकेत बहुगुणा तथा विकास बहुगुणा पैरवी के दौरान मौजूद रहे।
क्या है मामला - बागी विधायक सुबोध उनियाल, शैला रानी रावत, उमेश शर्मा काऊ, कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन, हरक सिंह रावत, अमृता रावत, शैलेंद्र मोहन सिंघल औप प्रदीप बत्रा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 27 मार्च को स्पीकर की ओर से उनकी सदस्यता को समाप्त करने के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
जिसमें उन्होंने कहा कि पार्टी की खिलाफत नहीं की थी वे केवल मुख्यमंत्री का विरोध कर रहे थे। बागियों ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि 18 मार्च को वित्त विधेयक के खिलाफ उन्होंने सदन में मत विभाजन की मांग की थी। इसका आशय यह नहीं है कि वे कांग्रेस छोड़कर दूसरी पार्टी में चले गए हैं।
नैनीताल। हाईकोर्ट में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान बागियों की ओर से उनके अधिवक्ता सीए सुंदरम ने कहा था कि 26 मार्च को जब उन्होंने स्पीकर से आरोपों की प्रतिलिपि मांगी तो स्पीकर ने कहा था कि आरोपों की प्रति उन्हें 25 मार्च को दे दी गई थी।
विधानसभा में स्पीकर की ओर से उन्हें बताया गया था कि अंतिम सुनवाई 27 मार्च को सुबह 9 बजे होगी, लेकिन उस दिन उन्हें सुनवाई का मौका नहीं दिया। बागियों की ओर से कोर्ट को बताया गया कि स्पीकर ने इस संबंध में विभिन्न समाचार चैनलों में वक्तव्य दिए थे, जिनकी वीडियो फुटेज कोर्ट में पेश की जा सकती है। इसके बाद याचिकाकर्ता ने मंगलवार को इस संबंध की सीडी कोर्ट में पेश की।