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80 करोड़ पानी में, फिर भी कहीं नहीं लगे मीटर तो कहीं लाइन नहीं
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नैनीताल। एशियन डवलपमेंट बैंक एडीबी की ओर से नगर में पेयजल व्यवस्था सुधार के लिए 80 करोड़ की धनराशि खर्च करने के बावजूद अभी तक कई भवनों में पानी के डिजिटल मीटर नहीं लगे हैं। साथ ही कई घरों को नई पेयजल लाइन से नहीं जोड़ा गया है। यदि पुरानी लाइन बंद कर दी जाए तो सैकड़ों घर पानी से महरूम हो जाएंगे। जलसंस्थान ने एडीबी के अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए 6.15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव बनाकर भेजा है, जो शासन में लंबित है।
नगर की पेयजल व्यवस्था सुधार के लिए वर्ष 2012 से 2018 तक नगर में 80 करोड़ की लागत से कई कार्य किए गए। इनमें नगर की तलहटी में स्थित पंप हाउस से पहाड़ियों पर स्थित टंकियों को जाने वाली राइजिंग मेन को बदलने के साथ ही उपभोक्ताओं के घरों तक की पेयजल लाइन को भी बदला जाना था।
इसके अलावा घरों में डिजिटल मीटर भी लगाए जाने थे। करीब छह वर्ष तक हुए एडीबी के कार्य पर शुरूआत से ही सवालिया निशान लगे। कई बार अयारपाटा, सात नंबर, मेलरोज कंपाउंड समेत विभिन्न स्थानों वर्षों से भूतल में पड़ी पानी की लाइनों को ऊपर ही ऊपर डालने, नालों में वितरण लाइनों के जाल आदि की शिकायतें हुईं और प्रदर्शन भी हुए।
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7500 पानी संयोजनों में से 5875 में डिजिटल मीटल लगे जबकि 1625 में नए मीटर नहीं लग सके। इनके अलावा इन मीटर के इतर कई उपभोक्ताओं को नई लाइन से नहीं जोड़ा गया। इसके चलते विभाग आज भी पेयजल वितरण में दोनों लाइनों से पानी छोड़ता है।
6.15 करोड़ रुपये का भेजा है प्रस्ताव
पूर्व में जन शिकायतों और विरोध प्रदर्शन आदि के बाद एडीबी की ओर से अवशेष कार्यों के लिए प्रस्ताव भेजा गया। इस समय एडीबी की ओर से पेयजल कार्य न करने और अधिकारी न होने के कारण डीएम धीराज गर्ब्याल के आदेश पर जलसंस्थान की ओर से 6.15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
कोट
जिलाधिकारी के आदेश पर विभाग की ओर से 6.15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। यदि शासन की ओर से धन आवंटित किया गया तो अवशेष कार्य पूरे किए जाएंगे। - डीएस बिष्ट, सहायक अभियंता, जलसंस्थान
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नगर की पेयजल व्यवस्था सुधार के लिए वर्ष 2012 से 2018 तक नगर में 80 करोड़ की लागत से कई कार्य किए गए। इनमें नगर की तलहटी में स्थित पंप हाउस से पहाड़ियों पर स्थित टंकियों को जाने वाली राइजिंग मेन को बदलने के साथ ही उपभोक्ताओं के घरों तक की पेयजल लाइन को भी बदला जाना था।
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इसके अलावा घरों में डिजिटल मीटर भी लगाए जाने थे। करीब छह वर्ष तक हुए एडीबी के कार्य पर शुरूआत से ही सवालिया निशान लगे। कई बार अयारपाटा, सात नंबर, मेलरोज कंपाउंड समेत विभिन्न स्थानों वर्षों से भूतल में पड़ी पानी की लाइनों को ऊपर ही ऊपर डालने, नालों में वितरण लाइनों के जाल आदि की शिकायतें हुईं और प्रदर्शन भी हुए।
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7500 पानी संयोजनों में से 5875 में डिजिटल मीटल लगे जबकि 1625 में नए मीटर नहीं लग सके। इनके अलावा इन मीटर के इतर कई उपभोक्ताओं को नई लाइन से नहीं जोड़ा गया। इसके चलते विभाग आज भी पेयजल वितरण में दोनों लाइनों से पानी छोड़ता है।
6.15 करोड़ रुपये का भेजा है प्रस्ताव
पूर्व में जन शिकायतों और विरोध प्रदर्शन आदि के बाद एडीबी की ओर से अवशेष कार्यों के लिए प्रस्ताव भेजा गया। इस समय एडीबी की ओर से पेयजल कार्य न करने और अधिकारी न होने के कारण डीएम धीराज गर्ब्याल के आदेश पर जलसंस्थान की ओर से 6.15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है।
कोट
जिलाधिकारी के आदेश पर विभाग की ओर से 6.15 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। यदि शासन की ओर से धन आवंटित किया गया तो अवशेष कार्य पूरे किए जाएंगे। - डीएस बिष्ट, सहायक अभियंता, जलसंस्थान