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UK: हल्द्वानी का नक्शा क्यों बिगाड़ रहे हैं वास्तुकार? सरकारी जमीन पर चला अवैध कंस्ट्रक्शन का खेल; खास रिपोर्ट

Thu, 13 Nov 2025 03:28 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी
अमर उजाला नेटवर्क, हल्द्वानी Published by: हीरा मेहरा Updated Thu, 13 Nov 2025 03:28 PM IST
सार

हल्द्वानी में स्वीकृत नक्शों की आड़ में अवैध निर्माण हो रहा है। ऊंचापुल इलाके में सरकारी जमीन पर एक नाले के ऊपर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण इसका उदाहरण है।  था। 

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Illegal construction is taking place in Haldwani under the guise of approved maps
ऊंचा पुल चौराहे के निकट नाले पर हुए अवैध निर्माण को ध्वस्त करती जेसीबी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शहर को नियोजित ढंग से अच्छे स्वरूप में बसाने वाले वास्तुकारों के हाथों ही शहर का हुलिया बिगड़ रहा है। ऐसा इसलिए कि नक्शे की आड़ में हल्द्वानी का नक्शा खराब करने का एक तरह से सुनियोजित खेल चल रहा है। अगर ऐसा नहीं होता तो स्वीकृत नक्शे का बोर्ड लगाकर ऊंचापुल में सरकारी जमीन पर भला इतना बड़ा अतिक्रमण कैसे खड़ा हो सकता था? वह भी एक नाले के ऊपर...। जब एक पत्रकार को यहां अधमरा किया तो शहर के जिम्मेदार जागे। तब उन्हें कई पीलरों में खड़ा वह अवैध निर्माण दिखा जो अब तक वैध तरीके से लगातार अपना विस्तार कर रहा था। इस कांड के बाद अब मशीनरी ढूंढेगी कि शहर में कितनी जगह ऐसा हुआ है। यानी ‘खोज से पहरा भला’ वाली कहावत को जिला विकास प्राधिकरण के इंजीनियरों ने पूरी तरह झुठला दिया। अवैध निर्माण पर पहरा देने में नाकामयाब हुए तो अब उन अवैध बिल्डिंग की खोज करने निकलेंगे जो अब तक वैध ही हैं। देखें अब उनके हाथ क्या लगता है और कितने वैध, अवैध की श्रेणी में आते हैं...और आखिर में कार्रवाई क्या होती है।

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माफिया का बोलबाला, मशीनरी हुई ध्वस्त
प्राधिकरण के जिम्मेदार अधिकारी और इंजीनियर भवन मानचित्र स्वीकृत करने के बाद आंखें बंद कर ले रहे हैं। इसके बाद कोई स्वीकृत नक्शे की आड़ में कितना ही अवैध निर्माण कर ले, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। इसके चलते शहर में माफिया का बोलबाला है और सरकारी मशीनरी इनके आगे पूरी तरह ध्वस्त है।

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सूत्रों के मुताबिक ऊंचापुल में जिस अवैध निर्माण कार्य की रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार से मारपीट की घटना हुई थी, उसका भवन मानचित्र प्राधिकरण से स्वीकृत था। स्वीकृत मानचित्र के आधार पर निर्माण पहले ही हो चुका था। अब उसी नक्शे की आड़ में अभियंताओं की मिलीभगत से मकान से सटे नाले की जमीन पर निर्माण कराया जा रहा था। अफसरों और आम लोगों की आंखों में धूल झोंकने के लिए मौके पर एक ऐसा बोर्ड लगा दिया गया जिसमें भवन मानचित्र स्वीकृत होने संबंधी जानकारी दर्ज थी। मंगलवार तक प्राधिकरण के अफसरों और आम लोगों को धोखा देने वाला यह बोर्ड निर्माण स्थल पर लगा हुआ था जबकि बुधवार को यह बोर्ड गायब हो गया था।

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नाले के किनारे कैसे स्वीकृत हो गया मकान का नक्शा
ऊंचापुल क्षेत्र में बुधवार को प्रशासन और प्राधिकरण की टीम ने जिस अवैध निर्माण कार्य को ध्वस्त कराया उसका नक्शा कैसे पास हो गया? इसे लेकर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि उक्त भवन नाले से सटा हुआ है जबकि नाले के आसपास मानचित्र स्वीकृत नहीं हो सकता है। यह भी चर्चा है कि यदि मानचित्र स्वीकृत नहीं था तो प्राधिकरण ने अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? और यदि मानचित्र स्वीकृत था तो फिर प्राधिकरण ने बुधवार को मौके पर निर्माण कार्य क्यों ध्वस्त करा दिया।

ऐसे शुरू होता है कंपाउंडिंग का खेल
स्वीकृत मानचित्र की आड़ में कई लोग मकान के आगे-पीछे अवैध निर्माण कर लेते हैं। सूचना मिलने पर अभियंता मौके पर पहुंच जाते हैं और भवन स्वामी से अवैध निर्माण की बात कहकर उसे दबाव में ले लेते हैं। नोटिस जारी करने के बाद यही अभियंता भवन स्वामी को अवैध निर्माण कार्य को वैध बनाने के लिए कंपाउंडिंग का खेल बताते हैं। कंपाउंडिंग के रूप में प्राधिकरण शुल्क जमा कराकर अवैध निर्माण को वैध कर देता है। ऐसा करने से इंजीनियरों की भी चांदी कटती है और भवन स्वामी को भी फायदा मिलता है।

मजिस्ट्रेट के पास है संयुक्त सचिव का कार्यभार
शहर में सिटी मजिस्ट्रेट के पास प्राधिकरण के संयुक्त सचिव का अतिरिक्त कार्यभार है। सिटी मजिस्ट्रेट स्तर से आवासीय भवनों के नक्शे स्वीकृत होते हैं जबकि व्यावसायिक श्रेणी के भवन मानचित्रों की स्वीकृति जिला विकास प्राधिकरण के सचिव देते हैं।

अधिकारियों ने अवैध निर्माण ध्वस्त कराया
पत्रकार की पिटाई के बाद चर्चा में आए ऊंचापुल स्थित अवैध निर्माण को बुधवार को जिला प्रशासन और प्राधिकरण की टीम ने ध्वस्त कर दिया है। बुधवार सुबह नौ बजे अपर जिलाधिकारी विवेक राय, नगर आयुक्त परितोष वर्मा और जिला विकास प्राधिकरण के सचिव विजय नाथ शुक्ला दलबल के साथ मौके पर पहुंचे। प्राधिकरण सचिव विजय नाथ शुक्ला ने बताया कि प्राधिकरण ने इस स्थान पर पूर्व में जो नक्शा पास किया था, वह भूमिधरी जमीन पर पास था। बुधवार को जो निर्माण कार्य ध्वस्त किया गया वह नाले की सरकारी जमीन पर अतिक्रमण कर किया गया था।

नालों से सटे निर्माण कार्यों की जांच के निर्देश
ऊंचापुल क्षेत्र में नाले पर हुए अवैध निर्माण के बाद प्राधिकरण सचिव ने जिले में प्राकृतिक नालों से सटे निर्माण कार्यों की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने भी नाले की भूमि पर निर्माण किया होगा तो नक्शा निरस्तीकरण के साथ ही निर्माण कार्य को ध्वस्त किया जाएगा। प्राधिकरण सचिव विजय नाथ शुक्ला ने बताया कि नक्शा स्वीकृत करते समय आवेदक का नाम, पता, भूमि स्वामित्व का रिकॉर्ड, श्रेणी आदि को देखा जाता है। आवेदक को स्वीकृत नक्शे के आधार पर ही निर्माण कार्य करना चाहिए। नक्शे से अलग हटकर निर्माण अवैध निर्माण की श्रेणी में आता है। निर्माण स्थल पर स्वीकृत नक्शे की संख्या, आवेदक का नाम, पता आदि एक बोर्ड पर अंकित करना होता है। नक्शा केवल वैध जमीन पर ही स्वीकृत होता है लेकिन लोग इस नक्शे की आड़ में अवैध निर्माण कर देते हैं। उन्होंने कहा कि अब ऐसा न हो, इसके लिए सख्ती बरती जाएगी। बताया कि सभी एई व जेई को अपने-अपने क्षेत्रों में नालों से सटे भवनों की जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी ने नाले की अथवा सरकारी भूमि पर कब्जा किया होगा तो उसका नक्शा निरस्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

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