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एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी आईटीआई के चेयरमैन की जमानत खारिज
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नैनीताल। आईटीआई में एससी-एसटी छात्रवृत्ति घोटाले के आरोपी और सहारनपुर के कृष्णा प्राइवेट आईटीआई के चेयरमैन अनिल कुमार सैनी की जमानत अर्जी जिला एवं सत्र न्यायाधीश आरके खुल्बे ने खारिज कर दी।अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय को बताया गया कि हाईकोर्ट में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान न्यायालय ने छात्रवृत्ति घोटाले की जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद एसआईटी की टीम में शामिल भीमताल थाने के उपनिरीक्षक दान सिंह मेहता को मामले की जांच सौंपी गई।
29 सितंबर,2019 को उपनिरीक्षक मेहता ने भीमताल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की जांच के दौरान उन्हें पता चला कि उत्तर प्रदेश के छुटमलपुर में स्थित कृष्णा आईटीआई के नाम जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल के कार्यालय की तरफ से सात छात्रों की छात्रवृत्ति के रूप में 2 लाख 89 हजार 100 रुपये के चेक छात्रों के भुगतान के लिए पंजाब नेशनल बैंक को भेजे गए थे।
न्यायालय को बताया गया कि जांच अधिकारी ने लाभार्थी छात्रों का भौतिक सत्यापन किया था। जिससे पता चला कि किसी भी छात्र ने कृष्णा आईटीआई में न तो दाखिला लिया और न ही शिक्षा ली। इन युवकों ने जांच अधिकारी को बताया कि कृष्णा प्राइवेट आईटीआई की ओर से वर्ष 2014 में उन्हें डिग्री और छात्रवृत्ति दिलाने का झूठा आश्वासन दिया था और उनसे शैक्षिक अभिलेख लिए थे।
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बाद में छात्रवृत्ति की रकम बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अपने अपने खातों में जमा करा दी। इसके बाद जांच अधिकारी ने प्राइवेट आईटीआई के चेयरमैन अनिल कुमार सैनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सैनी को गिरफ्तार कर लिया था। सोमवार को बचाव पक्ष की ओर से आरोपी सैनी का जमानत प्रार्थना पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने जमानत देने का विरोध किया।
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29 सितंबर,2019 को उपनिरीक्षक मेहता ने भीमताल थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की जांच के दौरान उन्हें पता चला कि उत्तर प्रदेश के छुटमलपुर में स्थित कृष्णा आईटीआई के नाम जिला समाज कल्याण अधिकारी नैनीताल के कार्यालय की तरफ से सात छात्रों की छात्रवृत्ति के रूप में 2 लाख 89 हजार 100 रुपये के चेक छात्रों के भुगतान के लिए पंजाब नेशनल बैंक को भेजे गए थे।
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न्यायालय को बताया गया कि जांच अधिकारी ने लाभार्थी छात्रों का भौतिक सत्यापन किया था। जिससे पता चला कि किसी भी छात्र ने कृष्णा आईटीआई में न तो दाखिला लिया और न ही शिक्षा ली। इन युवकों ने जांच अधिकारी को बताया कि कृष्णा प्राइवेट आईटीआई की ओर से वर्ष 2014 में उन्हें डिग्री और छात्रवृत्ति दिलाने का झूठा आश्वासन दिया था और उनसे शैक्षिक अभिलेख लिए थे।
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बाद में छात्रवृत्ति की रकम बैंक अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से अपने अपने खातों में जमा करा दी। इसके बाद जांच अधिकारी ने प्राइवेट आईटीआई के चेयरमैन अनिल कुमार सैनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर सैनी को गिरफ्तार कर लिया था। सोमवार को बचाव पक्ष की ओर से आरोपी सैनी का जमानत प्रार्थना पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, अभियोजन पक्ष की ओर से जिला शासकीय अधिवक्ता सुशील कुमार शर्मा ने जमानत देने का विरोध किया।