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बिना बांध के कैसे होगी हल्द्वानी में पानी की व्यवस्था
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हल्द्वानी। जमरानी बांध परियोजना इकाई के आर्थिक सर्वेक्षण में इस पर भी मंथन किया जा रहा है कि बिना बांध के हल्द्वानी में पेयजल की व्यवस्था कैसे हो सकती है। बांध के बिना पेयजल को लेकर एक ठोस समानांतर विकल्प तलाशा जा रहा है। इस विकल्प में पेयजल का आधार भूजल को बनाया गया है और गिरते भूजल स्तर को सुधारने के तौर-तरीके अपनाने पर जोर दिया गया है।
जमरानी बांध परियोजना इकाई सूत्रों के मुताबिक बिना बांध के हल्द्वानी में मौजूदा आबादी के लिए करीब 122 नए नलकूप बनाने होंगे। यह रिपोर्ट पेयजल निगम की सर्वे में तैयार की गई है। 122 नलकूपों पर आने वाले खर्च के साथ ही पर्याप्त भूजल उपलब्ध होगा या नहीं, इसका भी अध्ययन किया जा रहा है। आर्थिक सर्वे में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था को शामिल किया गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड हल्द्वानी को सेमी क्रिटिकल जोन घोषित कर चुका है और उसकी रिपोर्ट में हल्द्वानी में नए नलकूपों के छिद्रण पर रोक लगाई गई है। ऐसी स्थिति में जमरानी बांध परियोजना इकाई भूजल स्तर में वृद्धि के उपाय तलाश करेगी।
सर्वेक्षण में इस बात का भी उल्लेख किया जाएगा कि 122 नलकूपों को बनाने में कितनी लागत आएगी, यह संभव होगा या नहीं। किन्हीं परिस्थितियों में अगर बांध नहीं बनता है तो पेयजल का बेहतर विकल्प क्या होगा। इस पर गहन मंथन किया जाएगा। यह रिपोर्ट आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान तैयार की जाएगी।
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- कतिपय कारणों से अगर बांध नहीं बनता है तो हल्द्वानी में पेयजल का विकल्प क्या होगा, इसका सर्वे किया जा रहा है। यह बिंदु बांध परियोजना के आर्थिक सर्वेक्षण में शामिल किया गया है। पेयजल निगम की 122 नलकूपों की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए और केंद्रीय भूजल बोर्ड की सेमी क्रिटिकल जोन की रिपोर्ट को शामिल करते हुए भूजल स्तर बढ़ाने के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। - भारत भूषण पांडेय, अधिशासी अभियंता जमरानी बांध परियोजना कार्यक्रम क्रियान्वयन इकाई
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जमरानी बांध परियोजना इकाई सूत्रों के मुताबिक बिना बांध के हल्द्वानी में मौजूदा आबादी के लिए करीब 122 नए नलकूप बनाने होंगे। यह रिपोर्ट पेयजल निगम की सर्वे में तैयार की गई है। 122 नलकूपों पर आने वाले खर्च के साथ ही पर्याप्त भूजल उपलब्ध होगा या नहीं, इसका भी अध्ययन किया जा रहा है। आर्थिक सर्वे में पेयजल की वैकल्पिक व्यवस्था को शामिल किया गया है। केंद्रीय भूजल बोर्ड हल्द्वानी को सेमी क्रिटिकल जोन घोषित कर चुका है और उसकी रिपोर्ट में हल्द्वानी में नए नलकूपों के छिद्रण पर रोक लगाई गई है। ऐसी स्थिति में जमरानी बांध परियोजना इकाई भूजल स्तर में वृद्धि के उपाय तलाश करेगी।
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सर्वेक्षण में इस बात का भी उल्लेख किया जाएगा कि 122 नलकूपों को बनाने में कितनी लागत आएगी, यह संभव होगा या नहीं। किन्हीं परिस्थितियों में अगर बांध नहीं बनता है तो पेयजल का बेहतर विकल्प क्या होगा। इस पर गहन मंथन किया जाएगा। यह रिपोर्ट आर्थिक सर्वेक्षण के दौरान तैयार की जाएगी।
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- कतिपय कारणों से अगर बांध नहीं बनता है तो हल्द्वानी में पेयजल का विकल्प क्या होगा, इसका सर्वे किया जा रहा है। यह बिंदु बांध परियोजना के आर्थिक सर्वेक्षण में शामिल किया गया है। पेयजल निगम की 122 नलकूपों की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए और केंद्रीय भूजल बोर्ड की सेमी क्रिटिकल जोन की रिपोर्ट को शामिल करते हुए भूजल स्तर बढ़ाने के विकल्पों पर विचार किया जाएगा। - भारत भूषण पांडेय, अधिशासी अभियंता जमरानी बांध परियोजना कार्यक्रम क्रियान्वयन इकाई