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देहरादून के एमकेपी में 45 लाख के गबन के मामले में मांगा जवाब

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2020 01:27 AM IST
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high court asked answer on the matter of corruption in mkp of dehradun
प्रतीकात्मक फोटो
नैनीताल। हाईकोर्ट ने देहरादून के महादेवी कन्या पाठशाला में हुए 45 लाख रुपये के गबन के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को 13 फरवरी तक जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश रिपोर्ट पर याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने आपत्ति करते हुए कहा कि सरकार ने बिना मौके पर गए संबंधित जांच रिपोर्ट बना कर इसे कोर्ट में पेश कर दिया है। कोर्ट ने इस पर नाराजगी जताई है।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार महादेवी कन्या पाठशाला (एमकेपी) की पूर्व छात्र सोनिया बेनीवाल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि यहां विवि अनुदान आयोग की ओर से दी गई 45 लाख रुपये की धनराशि का गबन किया गया है। कहा कि यूजीसी ने 45 लाख की ग्रांट एमकेपी में छात्राओं की शिक्षा के लिए जारी की थी। एमकेपी किसी भी बुनियादी सुधार के लिए यूजीसी की ग्रांट पर ही निर्भर है और इसी ग्रांट से पूर्व में कैंपस में वाईफाई आदि लगा था। वित्तीय वर्ष 2012-2013 में इस धनराशि का इस्तेमाल एप्पल के महंगे उपकरण खरीदने में किया गया और यह उपकरण 2019 के परीक्षण में पाए ही नहीं गए। याचिका में कहा कि इसमें टेंडर प्रक्रिया न करते हुए केवल कोटेशन के आधार पर रुपयों की बंदरबांट की गई।
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याचिका में कहा कि एक स्थान पर ऑर्डर की तिथि के बाद का कोटेशन लगाया गया। किसी जगह बिल से अधिक का भुगतान किया गया और किसी जगह बिल से कम भुगतान किया गया। याचिका में कहा कि इसमें न ज्यादा धनराशि को वापस लेने के कोई कदम उठाए गए और न ही कम धनराशि के संबंध में पूर्ण बिल की मांग की गई। साथ ही यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा कराए गए ऑडिट में भी इसे गलत पाया गया।
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सीएजी से भी इस प्रकरण की जांच कराई गई, जिसमें खरीदारों पर शक जताया गया। मामले में 2016-2017 में एफआईआर दर्ज कराई गई लेकिन मामले को दबा दिया गया। जनवरी 2019 में शासन के स्थलीय निरक्षण के दौरान भी सात लाख 68 हजार की सामग्री पाई ही नहीं गई। इस वजह से यूजीसी ने एमकेपी को अपनी अगली पंच वर्षीय योजना में धनराशि ही नहीं दी। इससे छात्राओं की शिक्षा की स्थिति खराब होती जा रही है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को 13 फरवरी तक जवाब पेश करने के निर्देश दिए।
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