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आपदा प्रभावितों के आंखों में दिखीं बेबसी और नमी

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 27 Oct 2021 02:18 AM IST
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Helplessness and moisture seen in the eyes of the disaster affected
मुक्तेश्वर, (नैनीताल)। प्रकृति ऐसा कहर बरपाएगी ये कभी मुक्तेश्वर वासियों ने सपने में भी नहीं सोचा था। भले ही आपदा थम गई हो पर जिन लोगों ने आपदा में अपना सब कुछ गंवा दिया उनके जख्म कभी नहीं भर पाएंगे। मुक्तेश्वर क्षेत्र में बीते दिनों आपदा में लोगों के घर तहस नहस और काश्तकारों के खेत और फसलें से सब नष्ट हो गईं। गांवों को जोड़ने वाली सड़कें बह गईं। अब लोगों के पास अपनी किस्मत और कुदरत को कोसने के सिवाय कुछ नजर नहीं आ रहा है।
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मुक्तेश्वर में संवाद न्यूज एजेंसी के संवाददाता ने जब धरातल पर उतरकर आपदा प्रभावित क्षेत्र के लोगों से बात की तो उनकी नम आंखों से बेबसी नजर आईं। आपदा प्रभावितों का कहना है कि उनका सब खत्म हो गया अब तो सिर्फ चेहरों पर मायूसी ही बची हुई है।
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इन क्षेत्रों में हुआ नुकसान
मुक्तेश्वर के चौखुटा, दोषापानी, परबड़ा, मझेड़ा गांव, कनियागेर, गंगुवाचोर समेत अन्य गांवों को आपदा से बेहद नुकसान पहुंचा है।
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सड़कें टूट गईं तो बढ़ गई मुश्किल
नैनीताल-मुक्तेश्वर मार्ग पर जगह-जगह मलबा और चीड़ के पेड़ गिरे हुए हैं। गंगुवाचोर के मुख्य मार्ग को काफी नुकसान पहुंचा है। परबड़ा-मझेड़ा गांव को जोड़ने वाला पैदल मार्ग बंद होने से अन्य गांवों के ग्रामीण भी कई किमी की पैदल यात्रा करने को मजबूर है।
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खेतों में नगदी फसलें हुईं बर्बाद
मुक्तेश्वर क्षेत्र में काश्तकारों के खेतों में लगी बीन, पत्ता गोभी, फूल गोभी, टमाटर, शिमला मिर्च समेत अन्य फसलें बर्बाद हो गई हैं। साथ ही किसानों की कई नाली जमीन बह गई है।
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कोट
- प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मिले 1.30 लाख रुपये और अपने लोगों से 2 लाख रुपये कर्ज लेकर मकान बनाया था लेकिन आपदा ने सब खत्म कर दिया। मकान रहने लायक नहीं रहा और घर में रखा समान भी तबाह हो गया। साथ ही जमीन भी बह गई है प्रशासन की ओर से खाद्य सामग्री दी गई है। अब भाई के पास रह रहा हूं और मायूसी के सिवाय कुछ नहीं बचा है। - विद्यासागर, आपदा पीड़ित दोषापानी
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- आपदा में खेत बह गए हैं और खेतों में लगी सब्जियां मलबे में दब गई है। घर के पास लगाए फलदार पेड़ नष्ट हो गए हैं। इस आपदा ने ऐसा मंजर दिखाया है जो कभी नहीं भूल पाएंगे। - बचुली देवी, ग्रामीण कनियागेर
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- बारिश से गंगुवाचोर से धानाचूली को जोड़ने वाला पुराना ग्रामीण मार्ग ध्वस्त हो गया है। इससे घोड़े-खच्चर नहीं चल पा रहे हैं और लोगों को सिर, कंधे और पीठ पर माल ढोना पड़ रहा है। साथ ही खेत बह गए हैं। - गंगा राम, ग्रामीण कनियागेर

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- खेतों के साथ फलदार पेड़ भी बह गए हैं। साथ ही खेतों में लगी फसलों का नामों निशान मिट गया है। इस आपदा ने काश्तकारों की आर्थिक रूप से कमर तोड़ दी है। - नागमल सिंह, ग्रामीण कनियागेर
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