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रिजर्व शिवालिक एलिफेंट कॉरिडोर को निरस्त करने के मामले में सुनवाई 8 सितंबर को
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नैनीताल। हाइकोर्ट ने विकास के नाम पर रिजर्व शिवालिक एलिफेंट कॉरिडोर को निरस्त करने और देहरादून दिल्ली नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के मामले में दायर दोनों जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 सितंबर की तिथि नियत की है। पूर्व तिथि को कोर्ट ने कहा था कि संतुलित विकास के लिए पर्यावरण संरक्षण और विकास, दोनों का संतुलन जरूरी है।
कोर्ट ने एनएचएआई से पूछा था कि दिल्ली देहरादून हाईवे के चौड़ीकरण में पड़ रहे पेड़ों को बचाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से भी कहा था कि वह कोर्ट को बताए कि किस तरीके से 2500 साल के वृक्ष काटने से दून को क्षति होगी और क्या इस क्षति की भरपाई अधिक वृक्षारोपण करके नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इन बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 8 सितंबर की तिथि नियत की है।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी रीनू पाल व अमित खोलिया ने हाईकोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर कर कहा था कि 24 नवंबर 2020 को स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में प्रदेश के विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तार करने लिए शिवालिक एलिफेंट रिजर्व फारेस्ट को डी-नोटिफाइड करने का निर्णय लिया गया था। इस नोटिफिकेशन को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार के इस डी-नोटिफिकेशन के आदेश पर रोक पहले ही लगा चुकी है।
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कोर्ट ने एनएचएआई से पूछा था कि दिल्ली देहरादून हाईवे के चौड़ीकरण में पड़ रहे पेड़ों को बचाने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से भी कहा था कि वह कोर्ट को बताए कि किस तरीके से 2500 साल के वृक्ष काटने से दून को क्षति होगी और क्या इस क्षति की भरपाई अधिक वृक्षारोपण करके नहीं की जा सकती। कोर्ट ने इन बिंदुओं पर सुनवाई के लिए 8 सितंबर की तिथि नियत की है।
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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी रीनू पाल व अमित खोलिया ने हाईकोर्ट में दो अलग-अलग जनहित याचिकाएं दायर कर कहा था कि 24 नवंबर 2020 को स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में प्रदेश के विकास कार्यों को बढ़ावा देने के लिए देहरादून जौलीग्रांट एयरपोर्ट के विस्तार करने लिए शिवालिक एलिफेंट रिजर्व फारेस्ट को डी-नोटिफाइड करने का निर्णय लिया गया था। इस नोटिफिकेशन को याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार के इस डी-नोटिफिकेशन के आदेश पर रोक पहले ही लगा चुकी है।
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