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Nainital News: जंगल की रक्षक और महिलाओं की प्रेरणा हैं हंसा दी
Mon, 17 Mar 2025 01:49 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Mon, 17 Mar 2025 01:49 AM IST
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हल्द्वानी। पर्यावरण संरक्षण की जंग हो या महिलाओं के अधिकारों की लड़ाई, दृढ़ संकल्प के साथ मोर्चा संभाल उसे अंजाम तक पहुंचाने वाले लोग कम ही मिलते हैं। ऐसी ही एक शख्सियत हैं धारी ब्लॉक के धानाचूली निवासी पूर्व ग्राम प्रधान और वर्तमान वन पंचायत सरपंच हंसा लोधियाल। उन्हें समाज का हर वर्ग आज हंसा दी के नाम से पहचानता है।
सामाजिक दुश्वारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ते उन्हें धमकियों और विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। अपने साहस और नेतृत्व क्षमता से न केवल अपने गांव, बल्कि पूरे उत्तराखंड में एक मिसाल कायम की। अपने दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाल सिंह लोधियाल और पिता राम सिंह को श्रेय देते हुए वह कहती हैं- हमने भागना सीखा नहीं, डटे रहेंगे, हमेशा घर पर यही सुना और इस बात को आत्मसात कर लिया। रुद्रपुर स्थित नवोदय स्कूल से 12वीं पास करने के बाद हल्द्वानी से एमकॉम किया और वर्ष 2014 में लोगों के कहने पर प्रधान का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिसके बाद शुरू हुआ असली सफर।
पर्यावरण संरक्षण और भूमि माफिया से संघर्ष
क्षेत्र में बाहरी बिल्डरों द्वारा अवैध निर्माण और जंगलों के अंधाधुंध दोहन के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हंसा को कई बार धमकियों का सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। वर्ष 2020 में वन पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद जल संरक्षण और वन सुरक्षा के लिए चाल-खाल बनवाए। पांच हेक्टेयर में बांज, बुरांश, तेजपत्ता सहित अन्य प्रजाति के पौधे रोपकर वन पंचायत की बंजर जमीन को हरा-भरा कर दिया। जंगल बचाने के लिए हरी पत्ती, पेड़ काटने का शुल्क निर्धारण किया, जंगलों में महिलाओं और युवाओं की टोली सुरक्षा के लिए मुस्तैद की और अवैध पातन और कटान करने के खिलाफ मुहिम चलाई। अपनी पंचायत से अन्यत्र सूखे पत्ते आदि ले जाने पर गाड़ियों से शुल्क लेकर वन पंचायत की आय में वृद्धि की।
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महिलाओं के लिए राज्य की पहली कैशलेस डेयरी की शुरूआत
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने मनरेगा योजना के तहत 150 महिलाओं को रोजगार दिलाया और 100 से अधिक महिलाओं को डेयरी सहकारी समिति से जोड़ा। यह डेयरी राज्य की ऐसी पहली महिला डेयरी बनी, जिसका पैसा सीधा महिलाओं के खाते में आया। इतना ही नहीं, उन्होंने पंचायत में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित करने की भी पहल की। ताकि उसमें महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।
सरकार और वन विभाग को लेकर है दिल में टीस
हंसा बताती हैं एक जनहित याचिका का संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 में आदेश देते हुए प्रभागीय वन अधिकारियों को पंचायती वन भूमि के खसरा और नक्शा वन पंचायत सरपंचों को उपलब्ध कराए जाने को कहा था। लेकिन इतना लंबा समय बीत जाने के बावजूद विभाग द्वारा कुछ भी उपलब्ध नहीं करवाया जा सका। नक्शों को राज्य सरकार की वेबसाइट पर भी अपलोड नहीं किया जा सका। उन्होंने कहा कि ऐसे हालातों में पारदर्शिता बन पाना और वन भूमि पर अवैध कब्जे की पहचान असंभव है। धानाचूली और अघरिया वन पंचायत में सीमांकन को लेकर विवाद है, जिसे सुलझाया जाना जरूरी है, वरना वन संपदा को नुकसान पहुंच रहा है।
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सामाजिक दुश्वारियों के खिलाफ लड़ाई लड़ते उन्हें धमकियों और विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। अपने साहस और नेतृत्व क्षमता से न केवल अपने गांव, बल्कि पूरे उत्तराखंड में एक मिसाल कायम की। अपने दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी लाल सिंह लोधियाल और पिता राम सिंह को श्रेय देते हुए वह कहती हैं- हमने भागना सीखा नहीं, डटे रहेंगे, हमेशा घर पर यही सुना और इस बात को आत्मसात कर लिया। रुद्रपुर स्थित नवोदय स्कूल से 12वीं पास करने के बाद हल्द्वानी से एमकॉम किया और वर्ष 2014 में लोगों के कहने पर प्रधान का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिसके बाद शुरू हुआ असली सफर।
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पर्यावरण संरक्षण और भूमि माफिया से संघर्ष
क्षेत्र में बाहरी बिल्डरों द्वारा अवैध निर्माण और जंगलों के अंधाधुंध दोहन के खिलाफ आवाज उठाने के कारण हंसा को कई बार धमकियों का सामना करना पड़ा, लेकिन हार नहीं मानी। वर्ष 2020 में वन पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद जल संरक्षण और वन सुरक्षा के लिए चाल-खाल बनवाए। पांच हेक्टेयर में बांज, बुरांश, तेजपत्ता सहित अन्य प्रजाति के पौधे रोपकर वन पंचायत की बंजर जमीन को हरा-भरा कर दिया। जंगल बचाने के लिए हरी पत्ती, पेड़ काटने का शुल्क निर्धारण किया, जंगलों में महिलाओं और युवाओं की टोली सुरक्षा के लिए मुस्तैद की और अवैध पातन और कटान करने के खिलाफ मुहिम चलाई। अपनी पंचायत से अन्यत्र सूखे पत्ते आदि ले जाने पर गाड़ियों से शुल्क लेकर वन पंचायत की आय में वृद्धि की।
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महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्होंने मनरेगा योजना के तहत 150 महिलाओं को रोजगार दिलाया और 100 से अधिक महिलाओं को डेयरी सहकारी समिति से जोड़ा। यह डेयरी राज्य की ऐसी पहली महिला डेयरी बनी, जिसका पैसा सीधा महिलाओं के खाते में आया। इतना ही नहीं, उन्होंने पंचायत में एक कौशल विकास केंद्र स्थापित करने की भी पहल की। ताकि उसमें महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत हो सकें।
सरकार और वन विभाग को लेकर है दिल में टीस
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