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समय से पहले ही पहुंच गई मेहमान चिड़िया अबाबील

Mon, 08 Feb 2016 12:51 AM IST
कमलेश जोशी/अमर उजाला ब्यूरो, भवाली । (नैनीताल)।
कमलेश जोशी/अमर उजाला ब्यूरो, भवाली । (नैनीताल)। Updated Mon, 08 Feb 2016 12:51 AM IST
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Guests arrived prematurely swallow bird

मौसम में हुए बदलाव से जहां एक ओर सूखे की स्थिति पैदा हो गई है वहीं दूसरी ओर इसका असर पशु पक्षियों पर भी नजर आने लगा है।

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हर साल गर्मियों में दक्षिण अफ्रीका से आने वाली मेहमान चिड़िया अबाबील इस बार निर्धारित समय से डेढ़ माह पहले ही पहाड़ में पहुंचकर घरों और दुकानों में घौंसले बनाने में जुट गई है।

 वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय से पहले गर्मी शुरू होने के कारण ही यह चिड़िया पहाड़ में पहुंच गई है। दक्षिण अफ्रीका की इस चिड़िया की 75 प्रजातियां हैं।
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द नॉलेज आफ साइंस नामक पुस्तक में इस चिड़िया का नाम स्वैलो (हिरूडोरस्टिका) और मार्टिन (डोलोशोन उर्निका) बताया गया है। जबकि उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में इसे धनपुतई व गौताई के नाम से भी जाना जाता है।
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 दक्षिण अफ्रीका में इसे अबाबील के नाम से जाना जाता है। पिछले साल तक धनपुतई मार्च के दूसरे हफ्ते में पहाड़ में आती थी लेकिन इस बार पहाड़ में हिमपात और बारिश न होने के कारण समय से पहले गर्मी महसूस होने लगी है लिहाजा उक्त चिड़िया यहां पहुंच गई है।

वन क्षेत्राधिकारी प्रकाश जोशी कहते हैं कि अप्रैल के दूसरे सप्ताह में यह अंडे देती है। इसका भोजन कीट पतंगे हैं जिन्हें यह हवा में उड़ते हुए ही पकड़ लेती है। इसकी लंबाई लगभग साढ़े सात इंच तक होती है। इसके माथे पर लाल रंग, गले पर नीली और लाल पट्टी तथा ऊपरी भाग नीले रंग का होता है।

धनपुतई की खास बात यह है कि यह जमीन पर नहीं बैठती और अधिकांश समय या तो उड़ती रहती है या फिर पेड़ों और बिजली के तारों में बैठी नजर आती है। पहाड़ में धनपुतई के आगमन को शुभ माना जाता है।


व्यापार मंडल के पूर्व उपाध्यक्ष नवनीत बिनवाल और नंदा देवी महोत्सव कमेटी के उपाध्यक्ष कंचन बिनवाल ने बताया कि धनपुतई ने दुकानों और घरों में घोंसले बनाने शुरू कर दिए हैं। सितंबर में धनपुतई अपने मूल स्थान की ओर वापस लौट जाती है।

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