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गृह जनपद में नियुक्त पीसीएस अधिकारी का सोमवार तक तबादला करे सरकार : हाईकोर्ट

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Sep 2021 02:26 AM IST
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Government should transfer the PCS officer appointed in the home district by Monday: High Court
नैनीताल। नगर निगम रुड़की की भूमि पर बनी दुकानों को अपने ही लोगोें आवंटित करने के मामले में हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से फिर पूछा है कि एक स्थायी पीसीएस अधिकारी की नियुक्ति उसके गृह जनपद में कैसे कर दी गई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार के इस निर्णय को मौखिक तौर पर गलत करार देते हुए कहा कि सरकार इस अधिकारी का तबादला सोमवार तक करे अन्यथा कोर्ट ट्रांसफर पॉलिसी को निरस्त कर सकती है।
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शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि 1946 की तबादला नियमावली के अनुसार यदि किसी स्थायी महिला अधिकारी की शादी उसके गृह जिले से बाहर होती है और उसका पता बदल जाता है तो उसी जिले में उसकी नियुक्ति हो सकती है, जबकि उत्तराखंड ट्रांसफ र पॉलिसी 2017 यह कहती है कि किसी भी अधिकारी की नियुक्ति अपने होम टाउन में नहीं हो सकती है। इस महिला अधिकारी ने शादी के बाद अपना पता बदल दिया है, लेकिन उसका गृह जनपद वही है। याचिकाकर्ता का यह भी कहना था कि इस अधिकारी ने उत्तराखंड महिला आरक्षण का लाभ भी लिया है।
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बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि मुख्य नगर आयुक्त की नियुक्ति अपने ही होम टाउन में कैसे कर दी गई। हाईकोर्ट में मामले की अगली सुनवाई की सोमवार को होगी। मामले की सुनवाई वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई।
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यह है मामला
रुड़की निवासी आशीष सैनी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि नगर निगम रुड़की ने नगर निगम की भूमि पर वर्ष 2011 से 2013 के बीच करीब 24 दुकानें बनाई थीं, जिन्हें तत्कालीन मेयर ने बिना किसी विज्ञप्ति के अपने ही लोगों को आवंटित कर दिया। बाद में दुकानों की छतों का अधिकार भी उन लोगों को दे दिया।
इसे 2015 में हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। कोर्ट ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए थे कि मामले की जांच कर रिपोर्ट कोर्ट में पेश करें। रिपोर्ट में जांच सही पाई गई। इसके खिलाफ दुकानदारों ने खंडपीठ में चुनौती दी, जिसे खंडपीठ ने खारिज कर सचिव शहरी विकास को निर्देश दिए थे कि दुकानों को खाली कराने के लिए अंतिम निर्णय लें और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराएं। कोर्ट के आदेश पर सचिव शहरी विकास ने दुकानों का आवंटन निरस्त कर दिया था।

खंडपीठ के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को सही मानते हुए दुकानदारों को 2020 तक दुकानें खाली करने का समय दिया लेकिन अभी तक दुकानें खाली नहीं कराई गईं हैं। याचिकाकर्ता का कहना था कि मुख्य नगर आयुक्त रुड़की की ही स्थायी निवासी हैं। उनकी यहां नियुक्ति गलत तरीके से की गई है।
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