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चार माह में एससी-एसटी कर्मियों का डाटा एकत्र करे सरकार
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नैनीताल। हाईकोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण को लेकर दायर पुनर्विचार याचिका को निस्तारित करते हुए राज्य सरकार को चार माह के भीतर सरकारी विभागों में कार्यरत अनुसूचित जाति व जनजाति वर्ग के कर्मचारियों का डाटा एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने उसके बाद पदोन्नति में आरक्षण पर निर्णय लेने के निर्देश सरकार को दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार विनोद प्रकाश नौटियाल ने हाईकोर्ट के 1 अप्रैल 2019 को ज्ञान चंद बनाम उत्तराखंड सरकार के तहत पारित आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एम नागराज, उसके बाद जनरल सिंह और अन्य मामलों में दिए गए निर्णयों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने के निर्देश देते हुए इसके खिलाफ राज्य सरकार की ओर से जारी नियमावली को निरस्त कर दिया था।
विनोद प्रकाश नौटियाल ने पुनर्विचार याचिका में विभिन्न तर्कों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण को निरस्त करने की अपील की थी। इसके बाद कोर्ट ने 8 नवंबर को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को खंडपीठ ने पुनर्विचार याचिका को निस्तारित करते हुए राज्य सरकार को चार माह के भीतर सरकारी विभागों में कार्यरत अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कर्मचारियों का डाटा एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इसके बाद ही पदोन्नति में आरक्षण पर निर्णय लेने के निर्देश सरकार को दिए हैं।
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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार विनोद प्रकाश नौटियाल ने हाईकोर्ट के 1 अप्रैल 2019 को ज्ञान चंद बनाम उत्तराखंड सरकार के तहत पारित आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के एम नागराज, उसके बाद जनरल सिंह और अन्य मामलों में दिए गए निर्णयों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण देने के निर्देश देते हुए इसके खिलाफ राज्य सरकार की ओर से जारी नियमावली को निरस्त कर दिया था।
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विनोद प्रकाश नौटियाल ने पुनर्विचार याचिका में विभिन्न तर्कों के आधार पर पदोन्नति में आरक्षण को निरस्त करने की अपील की थी। इसके बाद कोर्ट ने 8 नवंबर को सुनवाई पूरी कर निर्णय सुरक्षित रख लिया था। शुक्रवार को खंडपीठ ने पुनर्विचार याचिका को निस्तारित करते हुए राज्य सरकार को चार माह के भीतर सरकारी विभागों में कार्यरत अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के कर्मचारियों का डाटा एकत्र करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने इसके बाद ही पदोन्नति में आरक्षण पर निर्णय लेने के निर्देश सरकार को दिए हैं।
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