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चंदन तस्करों का कन्नौज कनेक्शन, वन विभाग का टेंशन

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Fri, 03 Jan 2020 01:09 AM IST
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forest department is confused from the connection of chandan tree smuggler  with kannauj
हल्द्वानी। तराई-भावर के जंगलों से चंदन के पेड़ों के अवैध कटान और तस्करी करने वाले तस्करों का कन्नौज कनेक्शन उनके लिए सबसे बड़ा सहारा बन रहा है। कन्नौज के चंदन माफिया से तस्करों को डिमांड के साथ ही हर तरह की मदद भी मिल रही है। वन महकमा चंदन तस्करों की धरपकड़ तो कर रहा है लेकिन इस कनेक्शन को नहीं तोड़ पा रहा है।
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तराई-भावर के जंगलों में काफी मात्रा में प्राकृतिक रूप से सफेद चंदन उगता है। आसानी से उगने के कारण वन विभाग द्वारा इसका किसी भी तरह से प्लांटेशन भी नहीं किया जाता है। हल्द्वानी वन प्रभाग के साथ ही तराई पूर्वी केंद्रीय वन प्रभाग में भी काफी मात्रा में चंदन के पेड़ हैं और भारी मात्रा में ही इनका अवैध कटान भी तस्करों द्वारा किया जाता है। वर्ष 2019 में तराई पूर्वी वन प्रभाग में तस्करों ने चंदन के पांच और हल्द्वानी वन प्रभाग में चार पेड़ों को काट दिया।
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कन्नौज में चंदन से ईत्र आदि बनाने का कारोबार बड़े स्तर पर चलता है और इसी के लिए इसकी तस्करी भी की जाती है। सूत्रों के अनुसार स्थानीय स्तर पर चंदन की तस्करी करने वालों को कन्नौज के चंदन माफियाओं का संरक्षण प्राप्त है। कुछ समय पूर्व तराई केंद्रीय वन प्रभाग द्वारा पकड़े गए एक तस्कर की जमानत भी कन्नौज के लोगों ने कराई। सूत्रों के अनुसार चंदन माफिया स्थानीय तस्करों को चंदन की डिमांड देने के साथ ही उनके रहने-खाने आदि की सुविधा भी उपलब्ध कराते हैं। वन विभाग के पास कुछ ऐेसे मामले भी आए हैं जिनमें यूपी के तस्कर यहां किराए पर रहकर चंदन तस्करी को अंजाम देते रहे।
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घरों के आंगन में लगे पेड़ों पर भी सेंधमारी
तराई पूर्वी वन प्रभाग और हल्द्वानी वन प्रभाग में सिर्फ जंगल में उगे पेड़ों पर ही तस्करों की नजर नहीं है। दोनों वन प्रभाग में कुछ घरों के आंगन में लगे चंदन के पेड़ों को भी तस्कर काट कर ले गए। दो माह पूर्व हल्द्वानी वन प्रभाग के तिकोनिया स्थित दफ्तर परिसर में लगे दो पेड़ों को भी तस्करों ने काटा था।

बुरादे से लगाते हैं खुशबू का पता
सफेद चंदन के पेड़ को पूरी तरह से परिपक्व होने में करीब 15 से 20 साल का समय लगता है। लेकिन दस साल के बाद इसके हार्ड रूट से खुशबु आने लगती है। तस्कर पेड़ काटने से पहले उस पर हल्की आरी चलाते हैं और उसे सूंघकर खुशबू का पता लगाते हैं। कई बार खुशबू ना होने के बाद भी तस्कर उसे ले जाते हैं और असली चंदन के साथ मिलाकर बेच देते हैं।
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