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Nainital News: रिक्टर पैमाने पर 8 तीव्रता का भूकंप भी नहीं हिला पाएगा जमरानी बांध
Sat, 20 Jun 2026 01:07 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 20 Jun 2026 01:07 AM IST
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हल्द्वानी। अगर भविष्य में उत्तराखंड में रिक्टर पैमाने पर आठ तीव्रता का भूकंप भी आता है तब भी जमरानी बांध की डायवर्जन टनलों और पहाड़ियों को नुकसान नहीं पहुंचेगा। परियोजना से जुड़े अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार बांध की डायवर्जन टनलों और आसपास की पहाड़ियों को आधुनिक रॉकबोल्ट तकनीक से मजबूत किया गया है। इसके लिए पहाड़ी में ड्रिल करके 10 हजार से अधिक बोल्ट कसे गए हैं।
रॉकबोल्ट तकनीक के तहत लगभग 100 मीटर ऊंची और 60 मीटर चौड़ी पहाड़ी पर यह विशेष उपचार किया गया। इसके तहत पहले पहाड़ी को 10 मीटर की गहराई तक ड्रिल किया गया। इसके बाद उसमें कंक्रीट भरकर लंबे बोल्ट डाले गए। अंत में पहाड़ी की सतह स्टील की प्लेट लगाकर बोल्ट को कसा गया। जर्मनी और ऑस्ट्रिया की मशीनों से हुए इस कार्य को पूरा होने में करीब नौ माह का समय लगा। विशेषज्ञों का दावा है कि इससे भूस्खलन की आशंकाएं भी काफी हद तक समाप्त हो गई हैं। संवाद
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भूस्खलन से भी सुरक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि रॉकबोल्ट ट्रीटमेंट केवल भूकंप के दौरान संरचना को स्थिर रखने में ही मददगार नहीं है, बल्कि भारी वर्षा या भूगर्भीय हलचलों के दौरान होने वाले भूस्खलन के जोखिम को भी कम करता है। इसी कारण यह तकनीक यूरोप के पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
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बरसात में टनल के भीतर चलता रहेगा काम
3808 करोड़ की परियोजना से भाबर से लेकर यूपी तक के गांवों को पानी मिलेगा। दिसंबर 2029 तक इसका काम पूरा किया जाना है। वर्तमान में टनल की लाइनिंग, कॉफर डैम की रॉफ्ट फाउंडेशन के साथ ही पहाड़ी कटान का काम जारी है। परियोजना अधिकारियों के अनुसार बरसात में टनल के भीतर काम चलेगा। नदी क्षेत्र में काम प्रभावित रहेगा।
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मानसून के लिए तैयार हो रहा कॉज-वे
बरसात में बांध क्षेत्र में काम करने में परेशानी न हो इसके लिए नदी पर कॉज-वे बनाया जा रहा है। इससे पानी की पाइपों के जरिये निकासी होगी और इस हिस्से से वाहनों की आवाजाही की जा सकेगी। परियोजना के उप महाप्रबंधक ललित कुमार के अनुसार बरसात के बाद डायवर्जन टनल से गौला की निकासी शुरू हो जाएगी।
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बांध निर्माण शुरू करने से पहले पहाड़ियों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया था। उसी के आधार पर विदेशी तकनीक से रॉक ट्रीटमेंट कर संरचना को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान की गई है। - उमेश अग्रवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड
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रॉकबोल्ट तकनीक के तहत लगभग 100 मीटर ऊंची और 60 मीटर चौड़ी पहाड़ी पर यह विशेष उपचार किया गया। इसके तहत पहले पहाड़ी को 10 मीटर की गहराई तक ड्रिल किया गया। इसके बाद उसमें कंक्रीट भरकर लंबे बोल्ट डाले गए। अंत में पहाड़ी की सतह स्टील की प्लेट लगाकर बोल्ट को कसा गया। जर्मनी और ऑस्ट्रिया की मशीनों से हुए इस कार्य को पूरा होने में करीब नौ माह का समय लगा। विशेषज्ञों का दावा है कि इससे भूस्खलन की आशंकाएं भी काफी हद तक समाप्त हो गई हैं। संवाद
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भूस्खलन से भी सुरक्षा
विशेषज्ञों का कहना है कि रॉकबोल्ट ट्रीटमेंट केवल भूकंप के दौरान संरचना को स्थिर रखने में ही मददगार नहीं है, बल्कि भारी वर्षा या भूगर्भीय हलचलों के दौरान होने वाले भूस्खलन के जोखिम को भी कम करता है। इसी कारण यह तकनीक यूरोप के पर्वतीय क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है।
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बरसात में टनल के भीतर चलता रहेगा काम
3808 करोड़ की परियोजना से भाबर से लेकर यूपी तक के गांवों को पानी मिलेगा। दिसंबर 2029 तक इसका काम पूरा किया जाना है। वर्तमान में टनल की लाइनिंग, कॉफर डैम की रॉफ्ट फाउंडेशन के साथ ही पहाड़ी कटान का काम जारी है। परियोजना अधिकारियों के अनुसार बरसात में टनल के भीतर काम चलेगा। नदी क्षेत्र में काम प्रभावित रहेगा।
मानसून के लिए तैयार हो रहा कॉज-वे
बरसात में बांध क्षेत्र में काम करने में परेशानी न हो इसके लिए नदी पर कॉज-वे बनाया जा रहा है। इससे पानी की पाइपों के जरिये निकासी होगी और इस हिस्से से वाहनों की आवाजाही की जा सकेगी। परियोजना के उप महाप्रबंधक ललित कुमार के अनुसार बरसात के बाद डायवर्जन टनल से गौला की निकासी शुरू हो जाएगी।
बांध निर्माण शुरू करने से पहले पहाड़ियों का विस्तृत सर्वेक्षण किया गया था। उसी के आधार पर विदेशी तकनीक से रॉक ट्रीटमेंट कर संरचना को दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान की गई है। - उमेश अग्रवाल, प्रोजेक्ट मैनेजर एफकॉन्स इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड