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उत्तराखंड बोर्ड में काम बढ़े पर पद नहीं
दीप चंद्र बेलवाल, रामनगर
Updated Sun, 15 May 2016 11:10 PM IST
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कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद पर काम का बोझ दिनोंदिन बढ़ता जा रहा है। लेकिन, राज्य सरकार न तो पदों की संख्या बढ़ाने को तैयार है और न ही खाली पदों पर नियुक्ति ही की जा रही है। ऐसे में वार्षिक परीक्षाओं के प्रबंधन की गाड़ी बमुश्किल धकेल रहे बोर्ड से यह उम्मीद करना बेमानी है कि वह शिक्षा प्रणाली पर शोध या पाठ्यक्रमों को सही ढंग से अंजाम दे पाएगा।
वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोती लाल बोरा ने पहाड़ के छात्रों को सुविधा की सुविधा के लिए रामनगर में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने के निर्देश दिए थे। पृथक राज्य बनने के बाद यूपी बोर्ड का यही क्षेत्रीय कार्यालय उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद में बदल गया। इसके मुख्य भवन का लोकार्पण 19 जून 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री नरेंद्र सिंह भंडारी ने किया।
परिषद के अपर सचिव विनोद प्रसाद सिमल्टी ने बताया कि वर्तमान में अधिकारियों, कर्मचारियों के 130 पद स्वीकृत हैं। इसमें छह पद अधिकारी और 125 पद कर्मचारियों के हैं। अधिकारियों में एक सचिव, दो अपर सचिव, दो संयुक्त सचिव के पद पूर्ण हैं, जबकि उपसचिव का पद खाली चल रहा है। वहीं कर्मचारियों के 125 पदों में से कई पद खाली हैं। उन्होंने बताया कि परिषद हाईस्कूल, इंटर की परीक्षाओं के अलावा एकीकृत छात्रवृत्ति, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, यूटीईटी, संस्कृत, एकलव्य आवासीय परीक्षा, एनएसएस बी, सी परीक्षाएं करा रहा है।
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डिजिटलाइजेशन की तैयारियां जोरों पर
रामनगर। सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर उत्तराखंड बोर्ड में भी डिजिटलाइजेशन की तैयारियां जोरों पर है। अधिकारियों का दावा है कि 80 प्रतिशत से अधिक काम हो गया है। शेष काम जल्द हो जाएगा।
अब तक बने सभापति
रामनगर। उत्तराखंड बोर्ड में अब तक नौ सभापति शामिल हुए। इसमें वर्ष 2001 से 2004 में एमसी पंत, 2004 से 2005 में पुष्पा मानस, 2005 से 2007 में एसके माहेश्वरी, 2007 से 2007 तक सुवर्द्धन, 2007 से 2008 एनएसपी पांडे, 2008 से 2010 पुष्पा मानस, 2010 से 2011 सौजन्या, 2011 से 2014 में चंद्र सिंह ग्वाल, 2014 से अब राकेश कुमार कुंवर।
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वर्ष 1994 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोती लाल बोरा ने पहाड़ के छात्रों को सुविधा की सुविधा के लिए रामनगर में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद का क्षेत्रीय कार्यालय खोलने के निर्देश दिए थे। पृथक राज्य बनने के बाद यूपी बोर्ड का यही क्षेत्रीय कार्यालय उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद में बदल गया। इसके मुख्य भवन का लोकार्पण 19 जून 2002 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी और तत्कालीन शिक्षा मंत्री नरेंद्र सिंह भंडारी ने किया।
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परिषद के अपर सचिव विनोद प्रसाद सिमल्टी ने बताया कि वर्तमान में अधिकारियों, कर्मचारियों के 130 पद स्वीकृत हैं। इसमें छह पद अधिकारी और 125 पद कर्मचारियों के हैं। अधिकारियों में एक सचिव, दो अपर सचिव, दो संयुक्त सचिव के पद पूर्ण हैं, जबकि उपसचिव का पद खाली चल रहा है। वहीं कर्मचारियों के 125 पदों में से कई पद खाली हैं। उन्होंने बताया कि परिषद हाईस्कूल, इंटर की परीक्षाओं के अलावा एकीकृत छात्रवृत्ति, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, यूटीईटी, संस्कृत, एकलव्य आवासीय परीक्षा, एनएसएस बी, सी परीक्षाएं करा रहा है।
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डिजिटलाइजेशन की तैयारियां जोरों पर
रामनगर। सीबीएसई बोर्ड की तर्ज पर उत्तराखंड बोर्ड में भी डिजिटलाइजेशन की तैयारियां जोरों पर है। अधिकारियों का दावा है कि 80 प्रतिशत से अधिक काम हो गया है। शेष काम जल्द हो जाएगा।
अब तक बने सभापति
रामनगर। उत्तराखंड बोर्ड में अब तक नौ सभापति शामिल हुए। इसमें वर्ष 2001 से 2004 में एमसी पंत, 2004 से 2005 में पुष्पा मानस, 2005 से 2007 में एसके माहेश्वरी, 2007 से 2007 तक सुवर्द्धन, 2007 से 2008 एनएसपी पांडे, 2008 से 2010 पुष्पा मानस, 2010 से 2011 सौजन्या, 2011 से 2014 में चंद्र सिंह ग्वाल, 2014 से अब राकेश कुमार कुंवर।