अमर उजाला अभियान: कोरोनाकाल में कक्षाओं में छात्रों की उपस्थिति में 40 फीसदी आई कमी
कोरोना काल में पढ़ाई प्रभावित होने से विद्यार्थियों समेत अभिभावक भी चिंतित हैं। अभिभावक किशन चंद्र जोशी, प्रभा भट्ट, सतीश जोशी का कहना है कि कोरोना महामारी ने सबसे अधिक शिक्षा व्यवस्था पर चोट की है।
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कोरोना काल ने विद्यार्थियों की पढ़ाई पर गहरा असर डाला है। दो साल में पढ़ाई का जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई करने की चुनौती शिक्षक, शिक्षार्थियों समेत स्कूल संचालकों के सामने भी है। हालांकि दो साल के कोरोना की मार के बाद इन दिनों सरकारी और निजी स्कूलों में गृह परीक्षाएं हो रहीं हैं। दो साल के बाद पहली बार देखने को मिल रहा है कि स्कूलों में परीक्षा को लेकर ही सही विद्यार्थियों की शत प्रतिशत उपस्थिति दिख रही है।
अल्मोड़ा एडम्स गर्ल्स इंटर कॉलेज में कुल 550 छात्राएं अध्ययनरत हैं। प्रधानाचार्या सुनीति तिमोथी ने बताया कि कोरोना काल में किसी भी छात्रा ने स्कूल नहीं छोड़ा। रैमजे इंटर कॉलेज में 161 विद्यार्थी अध्ययनरत थे। प्रधानाचार्य विनय तिमोथी विल्सन ने बताया कि कोरोना काल में छात्र संख्या में कोई कमी नहीं आई है। छात्रों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही मोड में पढ़ाई की। स्कूल विद्यार्थियों से लगातार ऑनलाइन संपर्क में हैं।
होली एंजिल पब्लिक स्कूल के प्रधानाचार्य डॉ. मनोज चौधरी ने बताया कि ऑनलाइन पढ़ाई के दौरान कक्षा में छात्र संख्या में 40 फीसदी गिरावट आई। उन्होंने बताया कि कोरानाकाल में किसी भी छात्र-छात्राओं ने स्कूल नहीं छोड़ा है। ज्ञान विज्ञान चिल्ड्रन एकेडमी हवालबाग में कोरोनाकाल के शुरुआती दौर में कक्षाओं में छात्र संख्या कम रही। स्थिति सामान्य होने पर कक्षाओं में भी बच्चों की उपस्थिति बढ़ गई। स्कूल के प्रधानाचार्य अशोक पंत ने बताया कि कोरोना के डर से अभिभावकों ने भी बच्चों को घर पर ही ऑनलाइन शिक्षा देना बेहतर समझा। स्थिति सामान्य होने पर कक्षाओं में विद्यार्थियों की उपस्थिति भी बढ़ने लगी। उनके स्कूल में नर्सरी कक्षाओं में प्रवेश कम हुए। इस वजह से छात्र संख्या में कम वृद्धि हुई।
दो साल की क्षतिपूर्ति बनी चुनौती
बागेश्वर। मार्च 2020 के बाद कोरोना की मार के कारण स्कूली पढ़ाई पिछड़ गई है। कोरोना के कारण दो साल में से अधिक अवधि में स्कूल बंद रहे। बच्चे घरों में कैद होकर रह गए। छोटी कक्षा से लेकर बड़ी कक्षा तक के विद्यार्थियों को ऑनलाइन पढ़ाया गया। जिले के कपकोट के तमाम इलाके संचार विहीन हैं। इन इलाकों में ऑनलाइन पढ़ाई में भी बाधा पहुंची। अर्द्धवार्षिक, वार्षिक परीक्षाएं तक नहीं हो पाईं। बगैर परीक्षा दिए विद्यार्थी अगली कक्षा में प्रवेश कर गए। स्कूल बंद रहने के कारण पाठ्यक्रम से करीब 30 प्रतिशत तक की कटौती करनी पड़ी।
कोरोना काल में ढील के दौरान स्कूल खुले भी तो विद्यार्थियों की उपस्थिति 60-65 प्रतिशत से अधिक नहीं पहुंच पाई। कोरोना काल में पहली बार देखने को मिल रहा है कि गृह परीक्षाएं सुचारु ढंग से संपन्न हो रहीं हैं।
स्कूल बोर्ड परीक्षार्थियों का मनोबल बनाने में जुटे स्कूल
बागेश्वर। दो साल में शिक्षण व्यवस्था को पहुंची क्षति से उबरने की सबसे बड़ी चुनौती है। इस समस्या से निपटने के लिए स्कूल रणनीति भी बना रहे हैं। बोर्ड परीक्षार्थियों को किसी तरह की दिक्कत न हो, इसका भी ध्यान रखा जा रहा है। सरस्वती शिशु मंदिर हाईस्कूल में मंगलवार को स्कूल प्रबंधन ने अभिभावकों की बैठक ली। इसमें प्रधानाचार्य रमेश चंद्र असवाल अभिभावकों को बोर्ड परीक्षा के संबंध में टिप्स दिए।
उनका कहना था कि कोरोना काल में पढ़ाई में व्यवधान आया है। इसकी पूर्ति की कोशिश की जा रही है। अभिभावक बोर्ड परीक्षार्थियों पर किसी तरह का दबाव न डालें। उनका हौसला बढ़ाएं। बैठक में अभिभावक पूजा गुरुरानी, शोभा लोहनी, कैलाश नेगी, गोविंद सिंह, गणेश सिंह ने भी सुझाव दिए।
अभिभावक बोले: सरकार, शिक्षा महकमा बनाए कोई ठोस रणनीति
कोरोना काल में पढ़ाई प्रभावित होने से विद्यार्थियों समेत अभिभावक भी चिंतित हैं। अभिभावक किशन चंद्र जोशी, प्रभा भट्ट, सतीश जोशी का कहना है कि कोरोना महामारी ने सबसे अधिक शिक्षा व्यवस्था पर चोट की है। दो साल में हुए नुकसान की भरपाई के लिए स्कूलों के साथ ही सरकार और शिक्षा महकमे को भी ठोस रणनीति बनानी चाहिए।