नंधौर अभ्यारण्य का इको सेंसेटिव जोन तय
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नंधौर अभ्यारण्य के इको सेंसेटिव जोन का एरिया तय कर दिया गया है। करीब साठ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल इको सेंसेटिव जोन में आयेगा। इसमें वन विभाग ने गांवों को बाहर कर दिया है। इसका प्रस्ताव तैयार कर केंद्र के नेशनल टाइगर कंजरवेशन अथारिटी (एनटीसीए) को भेजा गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इको सेंसेटिव जोन घोषित करने का आदेश दिया है। इसके बाद से जंगलात जोन की सीमा तय करने के काम में जुटा था। अब वन विभाग ने नंधौर अभ्यारण्य की सीमा तय कर उसका प्रस्ताव एनटीसीए को भेजा है। इसमें अभ्यारण्य को छोड़कर 60 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल का हिस्सा लिया गया है। इसमें जंगल और आसपास के गांवों को छोड़ दिया गया है।
जो क्षेत्र शामिल किया गया है, उसमें हल्द्वानी वन प्रभाग पूरा(डांडा, नंधौर, जौलासाल, छकाता रेंज), तराई पूर्वी वन प्रभाग का दक्षिण जौलासाल, रनसाली, किलपुरा, खटीमा और चंपावत वन प्रभाग का कुछ हिस्सा शामिल है। यह प्रस्ताव बीते दिनों देहरादून के माध्यम से एनटीसीए को भेजा गया है। जहां से अंतिम प्रक्रिया पूरी होगी। वनाधिकारियों के अनुसार इको सेंसेटिव जोन बनने से गांव वालों के हक हकूक आदि पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। पूर्व की स्थिति के हिसाब से ही उनके अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
कड़ी प्रक्रिया के बाद भूमि हस्तांतरण
हल्द्वानी। इको सेंसेटिव जोन बनने से वन भूमि हस्तांतरण के लिए कड़ी प्रक्रिया से गुजरना होगा। सामान्य तौर पर वन भूमि मिल जाती है, अब यह नहीं होगा। प्रयोक्ता एजेंसी को ज्यादा कारण देना होगा।