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इको सेंसिटिव जोन लागू नहीं होने देंगे
Fri, 21 Jun 2019 01:48 AM IST
Madan Singh
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो
Published by: Madan Singh
Updated Fri, 21 Jun 2019 01:48 AM IST
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रामनगर में जनसुनवाई में विरोध करते हुए ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी।
- फोटो : अमर उजाला
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इको सेंसिटिव जोन को लेकर कॉर्बेट प्रशासन की ओर से आयोजित जनसुनवाई में ग्रामीणों ने पार्क प्रशासन के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। सभी ने एक स्वर में इको सेंसिटिव जोन का विरोध करने का एलान किया, हालांकि पार्क वार्डन की ओर से समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण नहीं माने। इस कारण जन सुनवाई हंगामेदार रही।
कॉर्बेट पार्क की ओर से पार्क के एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के ग्रामीणों के लिए पालिका के ऑडीटोरियम में आपत्तियां दर्ज कराने के लिए जन सुनवाई आयोजित की थी। ग्रामीणों ने अपना विरोध जताना शुरू किया और पार्क वार्डन की ओर से बताया गया कि कॉर्बेट पार्क के कोर जोन से एक किलोमीटर की परिधि नापी जा रही है।
ग्रामीणों को बताया कि ढिकुली, सांवल्दे पूर्व के गांव इको सेंसिटिव जोन से बाहर हो रहे हैं, लेकिन ढेला, ढेला बंदोबस्ती व सांवल्दे पश्चिमी का कुछ हिस्सा इको सेंसिटिव जोन में आ रहा है। इस पर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने विरोध शुरू कर दिया। इसमें सांवल्दे पूर्वी से 373, सांवल्दे पश्चिमी से 634, ढेला से 146, ढिकुली से पांच आपत्तियां लिखित में मिली हैं। इसके अलावा अन्य आपत्तियां ग्रामीणों की ओर से मौखिक आई हैं।
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जनसुनवाई से गायब रहे निदेशक और उपनिदेशक
इको सेंसिटिव जोन की जन सुनवाई के दौरान सीटीआर के निदेशक, उपनिदेशक गायब रहे, जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश दिखा। वहीं ग्रामीणों के तीखे सवालों का जवाब देने में पार्क वार्डन शिवराज चंद्र असहज नजर आ रहे थे। कोर जोन से एक किलोमीटर की नपाई में कौन-कौन गांव बाहर है के सवाल पर वह बार-बार रेंजरों से पूछ कर रहे थे।
इको सेंसिटिव जोन का जनप्रतिनिधियों ने किया विरोध
जनसुनवाई के दौरान पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत, ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी, भाजपा नेता राकेश नैनवाल समेत ललित उप्रेती, प्रभात ध्यानी आदि ने भी मंच पर खड़े होकर इको सेंसिटिव जोन का विरोध किया। कॉर्बेट प्रशासन से कहा कि यदि वह ग्रामीणों का हक मारेंगे तो वह जन आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस मौके पर महेश जोशी, हरीश बेलवाल, मनमोहन सिंह बिष्ट, कृपाल बेलवाल, गोविन्द सिंह, पीसी जोशी, रईस अहमद, गोपालराम, विमला देवी, ललिता रावत, तुलसी छिमवाल, प्रकाश चंद्र बेलवाल, महेश बेलवाल आदि रहे।
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कॉर्बेट पार्क की ओर से पार्क के एक किलोमीटर के दायरे में आने वाले गांवों के ग्रामीणों के लिए पालिका के ऑडीटोरियम में आपत्तियां दर्ज कराने के लिए जन सुनवाई आयोजित की थी। ग्रामीणों ने अपना विरोध जताना शुरू किया और पार्क वार्डन की ओर से बताया गया कि कॉर्बेट पार्क के कोर जोन से एक किलोमीटर की परिधि नापी जा रही है।
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ग्रामीणों को बताया कि ढिकुली, सांवल्दे पूर्व के गांव इको सेंसिटिव जोन से बाहर हो रहे हैं, लेकिन ढेला, ढेला बंदोबस्ती व सांवल्दे पश्चिमी का कुछ हिस्सा इको सेंसिटिव जोन में आ रहा है। इस पर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने विरोध शुरू कर दिया। इसमें सांवल्दे पूर्वी से 373, सांवल्दे पश्चिमी से 634, ढेला से 146, ढिकुली से पांच आपत्तियां लिखित में मिली हैं। इसके अलावा अन्य आपत्तियां ग्रामीणों की ओर से मौखिक आई हैं।
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जनसुनवाई से गायब रहे निदेशक और उपनिदेशक
इको सेंसिटिव जोन की जन सुनवाई के दौरान सीटीआर के निदेशक, उपनिदेशक गायब रहे, जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोश दिखा। वहीं ग्रामीणों के तीखे सवालों का जवाब देने में पार्क वार्डन शिवराज चंद्र असहज नजर आ रहे थे। कोर जोन से एक किलोमीटर की नपाई में कौन-कौन गांव बाहर है के सवाल पर वह बार-बार रेंजरों से पूछ कर रहे थे।
इको सेंसिटिव जोन का जनप्रतिनिधियों ने किया विरोध
जनसुनवाई के दौरान पूर्व विधायक रणजीत सिंह रावत, ब्लॉक प्रमुख संजय नेगी, भाजपा नेता राकेश नैनवाल समेत ललित उप्रेती, प्रभात ध्यानी आदि ने भी मंच पर खड़े होकर इको सेंसिटिव जोन का विरोध किया। कॉर्बेट प्रशासन से कहा कि यदि वह ग्रामीणों का हक मारेंगे तो वह जन आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इस मौके पर महेश जोशी, हरीश बेलवाल, मनमोहन सिंह बिष्ट, कृपाल बेलवाल, गोविन्द सिंह, पीसी जोशी, रईस अहमद, गोपालराम, विमला देवी, ललिता रावत, तुलसी छिमवाल, प्रकाश चंद्र बेलवाल, महेश बेलवाल आदि रहे।