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दुर्गापाल, यशपाल के मूछों की लड़ाई आई सामने
राजेश नेगी
Updated Fri, 23 Sep 2016 12:09 AM IST
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राजनीति
- फोटो : demo
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बिंदुखत्ता नगरपालिका बनाए जाने के बाद शुरू हुई जन विरोध की आंधी राज्य सरकार के यू टर्न लेने पर थमी ही थी कि नगरवासियों को मालिकाना हक दिलाए जाने का मुद्दा श्रम मंत्री हरीश दुर्गापाल पर फिर भारी पड़ता नजर आ रहा है।
पहले बिंदुखत्ता और अब मालिकाना हक को लेकर विपक्षियों के साथ ही कांग्रेसियों का सामने आना श्रम मंत्री को घेरने की रणनीति मानी जा रही है।
बिंदुखत्ता पालिका के विरोध का मामला हो या अब नए सर्किल रेट को लेकर श्रम मंत्री की घेराबंदी, इसके पीछे कांग्रेसी नेता और लालकुआं विधानसभा से पिछले चुनाव में कांग्रेस से प्रत्याशी रहे हरेंद्र बोरा हैं।
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बताया जाता है कि उन्हें राजस्व मंत्री यशपाल आर्य का समर्थन है। सियासी गलियारों में यहां तक कहा जा रहा है कि राजस्व मंत्री हर हाल में हरेंद्र बोरा को कांग्रेस से प्रत्याशी बनाना चाहते हैं। मालिकाना हक को लेकर कांग्रेसियों ने दोबारा कैबिनेट मंत्री हरीश दुर्गापाल के लिए मुश्किलें पैदा कर दी हैं।
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बहरहाल ‘‘श्रम मंत्री शर्म करो, सर्किल रेट कम करो’’ के नारों के साथ शुरू हुआ यह विरोध सियासी गलियारों में बेहद तेजी से अपनी जगह बना रहा है। एक के बाद एक श्रम मंत्री दुर्गापाल द्वारा की जा रही डैमेज कंट्रोल की रणनीति जहां विफल साबित हो रही है, वहीं विपक्ष ने इन मुद्दों को कांग्रेसियों में दो फाड़ कर सियासी लाभ लेने की दिशा में भी महत्वपूर्ण सफलता हासिल कर ली है।
यह विरोध सूबे के दो कैबिनेट मंत्रियों के बीच चल रही रसूख की लड़ाई है या फिर वाकई जनता के लिए सर्किल रेट बढ़ना, असलियत चाहे जो हो, दोनों ही दशा में सत्तारूढ़ दल मुश्किलों में फंसता नजर आ रहा है। बिंदुखत्ता नगरपालिका मुद्दे के बाद अब नगर के मालिकाना हक के अहम फैसले को भी दुर्गापाल की घेरेबंदी के रूप में देखा जा रहा है।