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चिंताजनक: आंखों को लग रही स्क्रीन टाइम की नजर, मोबाइल से चिपके रहने से समय से पहले बदल रहा चश्मे का नंबर

Mon, 25 Aug 2025 11:01 AM IST
हीरा मेहरा चंद्रेश पांडेय, अमर उजाला
चंद्रेश पांडेय, अमर उजाला Published by: हीरा मेहरा Updated Mon, 25 Aug 2025 11:01 AM IST
सार

यदि आप घंटों तक मोबाइल या लेपटॉप देखते हैं तो संभल जाइये। नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को बीमार बना रहा है। 

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Due to excessive use of mobile the number of glasses is changing prematurely
सांकेतिक तस्वीर। (आंख)

विस्तार

यदि आप घंटों तक मोबाइल या लेपटॉप देखते हैं तो संभल जाइये। ऐसा करना आपके और आपकी आंखों की सेहत के लिए अच्छा नहीं है। नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ता स्क्रीन टाइम बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक को बीमार बना रहा है। इससे आंखों में सूखापन बढ़ रहा है। जो लोग चश्मा लगाते हैं, उनके चश्मे का नंबर भी समय से पहले बदल रहा है।

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सुशीला तिवारी राजकीय चिकित्सालय के नेत्र रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना 150-200 मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल के डॉक्टरों के मुताबिक इनमें से 40-50 मरीज आंखों में थकान होने की शिकायत लेकर आते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि जब उनसे दिन भर में मोबाइल अथवा लेपटॉप देखने को लेकर सवाल किया जाता है तो जवाब होता है कम से कम सात से आठ घंटे। डॉक्टर कहते हैं कि लगातार सात आठ घंटे अथवा इससे अधिक मोबाइल, लेपटॉप या कंप्यूटर पर काम करना आंखों के लिए नुकसानदेय हो सकता है।

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14 से 30 वर्ष आयु के अधिक मरीज
स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों में आने वाली दिक्कतों को लेकर जो मरीज एसटीएच में पहुंच रहे हैं उनमें 14 से 30 वर्ष तक के बच्चों और युवाओं की संख्या अधिक है।

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कमजोर होने लगती हैं आंखों की मांसपेशियां
एसटीएच के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जीएस तितियाल बताते हैं कि दिन भर में तीन घंटे से अधिक स्क्रीन टाइम होने पर आंखों में थकावट व सिरदर्द की समस्या हो सकती है। इसके अलावा स्क्रीन टाइम बढ़ने से आंखों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं जिससे आंखों की नमी सूख जाती है। उनके मुताबिक स्क्रीन पर अधिक समय बिताने से बच्चों की ध्यान केंद्रित करने की क्षमता भी कम होने लगती है।


छोटे बच्चों को मोबाइल से दूर रखें
डॉ. तितियाल कहते हैं कि छोटे बच्चों को दूध पिलाना हो या खाना खिलाना हो, या फिर उन्हें शांत रखना हो। इसके लिए महिलाएं मोबाइल में कोई कार्टून फिल्म चलाकर उसे बच्चों के हाथ में दे देती हैं और छोटे बच्चे घंटों तक उसे देखते रहते हैं। इससे बच्चों की आंखों पर प्रभाव पड़ता है। मोबाइल में गेम खेलने की लत भी आंखों से खिलवाड़ करना है।

कैसे करें बचाव
डॉ. तितियाल कहते हैं कि जरूरी होने पर ही स्क्रीन पर नजर दौड़ाएं, अन्यथा प्रयास करें कि मोबाइल, लेपटॉप अथवा डेस्कटॉप आदि से दूरी बनी रहे। वह कहते हैं कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल न दें। बच्चों को खाली समय में खेलकूद के लिए प्रेरित करें।

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