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आसमान से बरसेगी अमृत की बूंदे, कुमाऊं के 94 सरोवर में होंगी जमा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Jun 2022 12:18 AM IST
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Drops of nectar will rain from the sky, will be deposited in 94 lakes of Kumaon
हल्द्वानी। बारिश के पानी को संचय करने लिए कुमाऊं में 94 अमृत सरोवर बनाने की वन विभाग की योजना है। ये अमृत सरोवर भूमि की नमी बढ़ाने के साथ ही वन्यजीवों की प्यास भी बुझाएंगे। इसके अलावा, सिंचाई में भी इस पानी का इस्तेमाल किया जाएगा। इस योजना पर 11.16 करोड़ की धनराशि खर्च होगी।
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वन विभाग जल संचय पर जोर दे रहा है। इस काम में वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। वन विभाग ने जायका परियोजना के माध्यम से वन पंचायतों में बड़ी संख्या में जल संचय के लिए कुंड बनाए हैं जिनका काफी लाभ भी मिला है। ये जल संग्रहण केंद्र वन्यजीवों की प्यास बुझाने में भी मददगार हो रहे हैं। इसके अलावा कई जगहों पर सिंचाई में भी सहायता मिल रही है। अब वन विभाग को 94 अमृत सरोवर बनाने का लक्ष्य दिया गया है।
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दक्षिणी वृत्त, उत्तरी वृत्त और पश्चिमी वृत्त के अधीन आने वाले प्रभागों में अलग-अलग संख्या में अमृत सरोवर बनाए जाएंगे। अल्मोड़ा वन प्रभाग के अल्मोड़ा रेंज के गणनाथ कक्ष संख्या-27 में ही 32000 लीटर क्षमता का सरोवर प्रस्तावित है।
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11 करोड़ से अधिक खर्च होंगे : सीसीएफ कुमाऊं
हल्द्वानी। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं तेजस्विनी पाटिल कहती हैं कि हाल के दिनों में मुख्य सचिव ने नैनीताल जिले का दौरा किया था। वह यहां जल संग्रहित करने के कार्यों से काफी खुश थे। मुख्य सचिव ने अमृत सरोवर के तहत जल संग्रहण के लिए कुंड बनाने के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत पूरे कुमाऊं मंडल में यह कार्य किया जाना है। अल्मोड़ा वन प्रभाग में यह कार्य शुरू कर दिया गया है। 94 कुंडों के निर्माण में 11.16 करोड़ की राशि खर्च होगी। मनरेगा के तहत कार्य किया जाएगा।

पुराने जल कुंडों की क्षमता वृद्धि करने की भी योजना
हल्द्वानी। मुख्य वन संरक्षक कुमाऊं डॉ. पाटिल के अनुसार कुमाऊं में करीब साढ़े तीन छोटे-बड़े जलकुंड और चाल-खाल है। इन सभी जलकुंडों की मरम्मत करने के साथ उनकी क्षमता वृद्धि करने की भी योजना है। इससे भी लाभ होगा।
ये लाभ होंगे
- भूमि के जलस्तर में भी सुधार होगा।
- भूमि में नमी का स्तर बढ़ेगा, इससे वेजिटेशन में लाभ होगा।
- जल संग्रहण कुंडों से सिंचाई का कार्य हो सकेगा, जिससे लोगों की आजीविका में भी सुधार हो सकेगा।
- वन्यजीवों की प्यास बुझाने में मदद मिलेगी।
- वनों में आग के नियंत्रण में भी ये जलकुंड मददगार बनेंगे।
- भविष्य में जलकुंड टूरिस्ट सेंटर के तौर पर भी विकसित हो सकेंगे, जिससे आसपास के लोगों के लिए स्वरोजगार के नए रास्ते खुल सकेंगे।
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