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चंपावत में अपने गढ़ भी नहीं बचा पाई कांग्रेस
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चंपावत उपचुनाव में करारी हार के बाद पत्रकार वार्ता करते कांग्रेस जिलाध्यक्ष पूरन कठायत और पार्ट
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। उपचुनाव में कांग्रेस पार्टी फरवरी में हुए विधानसभा चुनाव की मतगणना के परिणाम के आसपास भी नहीं टिक पाई। परिणाम ऐसे आए कि कांग्रेस अपने गढ़ में भी हार गई। उपचुनाव में कांग्रेस फरवरी में हुए चुनाव के दसवें चक्र में मिले वोटों के बराबर भी मत नहीं पा सकी। विस चुनाव के दसवें चक्र में भाजपा प्रत्याशी को 3430 और कांग्रेस को 3449 वोट मिले थे लेकिन पूरे उपचुनाव में कांग्रेस 3233 वोटों तक ही सिमट कर रह गई।
10 मार्च को हुई मतगणना में कांग्रेस 151 मतदान केंद्रों में से 40 और भाजपा 111 केंद्रों में आगे रही थी। उपचुनाव में भाजपा की ओर से सेंधमारी होने से कांग्रेस अपने परंपरागत गढ़ों से भी वोट पाने में नाकाम रही। कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक समझा जाने वाले नरसिंहडांडा बूथ में कांग्रेस को महज 30 ही वोट मिले। यहां भाजपा को पहली बार सर्वाधिक 370 वोट मिले। भाजपा जिलाध्यक्ष दीप चंद्र पाठक के अनुसार उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता और भविष्य में विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए कांग्रेस को मतदाताओं ने चुनाव मैदान में टिकने नहीं दिया।
डाक मतपत्र में भी सीएम धामी ने बनाई बढ़त
चंपावत। ईवीएम के साथ ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने डाक मतपत्र में भी बढ़त बनाई। ईवीएम के जरिये पड़े 61595 वोटों में से भाजपा को 57268, कांग्रेस को 3147, सपा के मनोज भट्ट को 409, निर्दलीय हिमांशु गढ़कोटी को 399 और नोटा को 372 वोट मिले। डाक मतपत्र में भाजपा को 990, कांग्रेस को 86, सपा को चार, निर्दलीय को तीन और नोटा को पांच वोट मिले। 215 डाक मतपत्र अवैध पाए गए।
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उपचुनाव में मान सम्मान भी गंवाया कांग्रेस ने
चंपावत। उपचुनाव में हारी कांग्रेस अपने मान-सम्मान को भी गंवा बैठी। इसी कारण करारी शिकस्त झेलने से वह यहां पहली बार जमानत भी नहीं बचा सकी। कुल पड़े वोटों में से 5.14 प्रतिशत वोट उसे मिले। आम चुनाव और उपचुनाव के बीच 107 दिनों में कांग्रेस 24010 वोट गंवा बैठी। फरवरी में कांग्रेस को 27243 वोट मिले, तो 31 मई को हुए उपचुनाव में महज 3233 वोट मिल सके। ये तस्वीर उस चंपावत सीट की है, जहां फरवरी 2022 तक हुए पांच विधानसभा चुनाव में दो बार कांग्रेस और तीन बार भाजपा जीती।
इस करारी पराजय के पीछे मुख्यमंत्री का भाजपा प्रत्याशी होना था। इसी कारण उपचुनाव से पहले कांग्रेस में कई दिग्गज नेताओं ने दलबदल किया। बचा खुचा संगठन बेहद कमजोर था, लेकिन जो बचा भी था, उसमें भी खींचतान भी खूब रही। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उपचुनाव में ठीक से जिम्मेदारी नहीं निभाई।
हार की समीक्षा करेगी कांग्रेस : जिलाध्यक्ष
चंपावत। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पूरन सिंह कठायत ने कहा कि पार्टी जनादेश को स्वीकार करती है। पार्टी सबसे बड़ी पराजय की समीक्षा करेगी। चुनाव नतीजा आने के बाद जिलाध्यक्ष ने यहां पत्रकारों को बताया कि चंपावत उपचुनाव में निष्पक्ष तरीके से वोटिंग नहीं हुई है। कई मतदान केंद्रों में फर्जी वोटिंग का उन्होंने आरोप लगाया। कहा कि उपचुनाव में प्रांतीय संगठन के मार्गदर्शन में स्थानीय पदाधिकारियों ने काम किया, लेकिन अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। कठायत ने कहा कि सत्ता पक्ष ने मशीनरी का दुरुपयोग कर उपचुनाव लड़ लोकतंत्र की गरिमा कम की है। इस मौके पर उमेश खर्कवाल, एडवोकेट निर्मल तड़ागी, नीरज वर्मा, सौरभ साह मौजूद थे।
पहली बार आखिरी स्थान पर रहा नोटा
चंपावत। चंपावत उपचुनाव में नोटा (इनमें से कोई नहीं) आखिरी स्थान पर रहा। चंपावत सीट पर यह पहला मामला है, जब नोटा अंतिम स्थान पर रहा। इस बार नोटा को 377 मत मिले। इससे पूर्व तक नोटा यहां भाजपा और कांग्रेस के बाद तीसरे नंबर पर रहा था।
2014 से लोकसभा और विधानसभा की चंपावत सीट में अब तक नोटा का प्रदर्शन
चुनाव नोटा के वोट
लोकसभा चुनाव 2014 1058
विधानसभा चुनाव 2017 1044
लोकसभा चुनाव 2019 1037
विधानसभा चुनाव 2022 0933
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10 मार्च को हुई मतगणना में कांग्रेस 151 मतदान केंद्रों में से 40 और भाजपा 111 केंद्रों में आगे रही थी। उपचुनाव में भाजपा की ओर से सेंधमारी होने से कांग्रेस अपने परंपरागत गढ़ों से भी वोट पाने में नाकाम रही। कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक समझा जाने वाले नरसिंहडांडा बूथ में कांग्रेस को महज 30 ही वोट मिले। यहां भाजपा को पहली बार सर्वाधिक 370 वोट मिले। भाजपा जिलाध्यक्ष दीप चंद्र पाठक के अनुसार उपचुनाव में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की लोकप्रियता और भविष्य में विकास की अपार संभावनाओं को देखते हुए कांग्रेस को मतदाताओं ने चुनाव मैदान में टिकने नहीं दिया।
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डाक मतपत्र में भी सीएम धामी ने बनाई बढ़त
चंपावत। ईवीएम के साथ ही सीएम पुष्कर सिंह धामी ने डाक मतपत्र में भी बढ़त बनाई। ईवीएम के जरिये पड़े 61595 वोटों में से भाजपा को 57268, कांग्रेस को 3147, सपा के मनोज भट्ट को 409, निर्दलीय हिमांशु गढ़कोटी को 399 और नोटा को 372 वोट मिले। डाक मतपत्र में भाजपा को 990, कांग्रेस को 86, सपा को चार, निर्दलीय को तीन और नोटा को पांच वोट मिले। 215 डाक मतपत्र अवैध पाए गए।
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उपचुनाव में मान सम्मान भी गंवाया कांग्रेस ने
चंपावत। उपचुनाव में हारी कांग्रेस अपने मान-सम्मान को भी गंवा बैठी। इसी कारण करारी शिकस्त झेलने से वह यहां पहली बार जमानत भी नहीं बचा सकी। कुल पड़े वोटों में से 5.14 प्रतिशत वोट उसे मिले। आम चुनाव और उपचुनाव के बीच 107 दिनों में कांग्रेस 24010 वोट गंवा बैठी। फरवरी में कांग्रेस को 27243 वोट मिले, तो 31 मई को हुए उपचुनाव में महज 3233 वोट मिल सके। ये तस्वीर उस चंपावत सीट की है, जहां फरवरी 2022 तक हुए पांच विधानसभा चुनाव में दो बार कांग्रेस और तीन बार भाजपा जीती।
इस करारी पराजय के पीछे मुख्यमंत्री का भाजपा प्रत्याशी होना था। इसी कारण उपचुनाव से पहले कांग्रेस में कई दिग्गज नेताओं ने दलबदल किया। बचा खुचा संगठन बेहद कमजोर था, लेकिन जो बचा भी था, उसमें भी खींचतान भी खूब रही। सूत्र बताते हैं कि कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने उपचुनाव में ठीक से जिम्मेदारी नहीं निभाई।
हार की समीक्षा करेगी कांग्रेस : जिलाध्यक्ष
चंपावत। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पूरन सिंह कठायत ने कहा कि पार्टी जनादेश को स्वीकार करती है। पार्टी सबसे बड़ी पराजय की समीक्षा करेगी। चुनाव नतीजा आने के बाद जिलाध्यक्ष ने यहां पत्रकारों को बताया कि चंपावत उपचुनाव में निष्पक्ष तरीके से वोटिंग नहीं हुई है। कई मतदान केंद्रों में फर्जी वोटिंग का उन्होंने आरोप लगाया। कहा कि उपचुनाव में प्रांतीय संगठन के मार्गदर्शन में स्थानीय पदाधिकारियों ने काम किया, लेकिन अपेक्षित नतीजे नहीं मिले। कठायत ने कहा कि सत्ता पक्ष ने मशीनरी का दुरुपयोग कर उपचुनाव लड़ लोकतंत्र की गरिमा कम की है। इस मौके पर उमेश खर्कवाल, एडवोकेट निर्मल तड़ागी, नीरज वर्मा, सौरभ साह मौजूद थे।
पहली बार आखिरी स्थान पर रहा नोटा
चंपावत। चंपावत उपचुनाव में नोटा (इनमें से कोई नहीं) आखिरी स्थान पर रहा। चंपावत सीट पर यह पहला मामला है, जब नोटा अंतिम स्थान पर रहा। इस बार नोटा को 377 मत मिले। इससे पूर्व तक नोटा यहां भाजपा और कांग्रेस के बाद तीसरे नंबर पर रहा था।
2014 से लोकसभा और विधानसभा की चंपावत सीट में अब तक नोटा का प्रदर्शन
चुनाव नोटा के वोट
लोकसभा चुनाव 2014 1058
विधानसभा चुनाव 2017 1044
लोकसभा चुनाव 2019 1037
विधानसभा चुनाव 2022 0933