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डीएम साहब, अब तो रुकवा दो पब्लिक स्कूलों की मनमानी
ब्यूरो/ हल्द्वानी
Updated Tue, 05 Apr 2016 12:44 AM IST
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पब्लिक स्कूलों की मनमानी रोकने को लेकर अभी तक शिक्षा विभाग और प्रशासन ने कोई कदम नहीं उठाया है। कई स्कूलों में एडमिशन फीस और वार्षिक मेंटीनेंस के नाम पर हजारों रुपये वसूल किए जाने से अभिभावक त्रस्त हैं। कई अभिभावकों ने गुहार की है कि डीएम साहब, अब तो पब्लिक स्कूलों की इस मनमानी पर अंकुश लगवा दो।
नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही पब्लिक स्कूलों की मनमानी शुरू हो गई है। पिछले वर्ष तय हुआ था कि कोई भी स्कूल अभिभावकों की सहमति से मासिक फीस या बस किराया बढ़ाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अधिकांश पब्लिक स्कूलों में ने अभिभावकों की सहमति ही नहीं। अभिभावकों ने फीस बढ़ाने का कारण पूछा भी तो स्कूलों ने कह दिया कि दस प्रतिशत फीस बढ़ाने का अधिकार है जबकि कई स्कूलों ने तो 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है।
इसी के साथ दूसरी मदों में भी बढ़ोत्तरी कर अभिभावकों से वसूली की जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि हर साल स्कूलों में यही मनमानी होती है मगर आज तक इस पर रोक लगाने को कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इधर, स्कूलों ने अभिभावकों से फीस तो जमा करवा ली है मगर उन्हें फीस बुक नहीं दी। ताकि अभिभावकों को यह पता न लग सके कि किस मद में कितनी धनराशि स्कूल ने बढ़ाई है। मुख्य शिक्षा अधिकारी आरएल आर्या ने बताया कि स्कूलों की मनमानी को लेकर उन्होंने शिकायतें करने के लिए फैक्स नंबर और फोन नंबर भी जारी किए हैं। उन्होंने कहा जब तक कोई लिखित शिकायत नहीं आएगी तब तक कार्रवाई करना मुश्किल है।
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स्मार्ट क्लास के नाम पर भी वसूलते हैं फीस
अभिभावकों की शिकायत है कि स्कूल संचालक स्मार्ट क्लास की सुविधा के नाम पर इसकी फीस भी वसूलते हैं मगर बच्चों को पढ़ाया नहीं जाता। किसी स्कूल में हफ्ते में एक दो दिन बच्चों को स्मार्ट क्लास में पढ़ा भी दिया जाता है तो अधिकांश में सिर्फ फीस ही ली जा रही है।
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नया शिक्षा सत्र शुरू होते ही पब्लिक स्कूलों की मनमानी शुरू हो गई है। पिछले वर्ष तय हुआ था कि कोई भी स्कूल अभिभावकों की सहमति से मासिक फीस या बस किराया बढ़ाएगा। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अधिकांश पब्लिक स्कूलों में ने अभिभावकों की सहमति ही नहीं। अभिभावकों ने फीस बढ़ाने का कारण पूछा भी तो स्कूलों ने कह दिया कि दस प्रतिशत फीस बढ़ाने का अधिकार है जबकि कई स्कूलों ने तो 20 प्रतिशत तक फीस बढ़ा दी है।
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इसी के साथ दूसरी मदों में भी बढ़ोत्तरी कर अभिभावकों से वसूली की जा रही है। अभिभावकों का कहना है कि हर साल स्कूलों में यही मनमानी होती है मगर आज तक इस पर रोक लगाने को कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इधर, स्कूलों ने अभिभावकों से फीस तो जमा करवा ली है मगर उन्हें फीस बुक नहीं दी। ताकि अभिभावकों को यह पता न लग सके कि किस मद में कितनी धनराशि स्कूल ने बढ़ाई है। मुख्य शिक्षा अधिकारी आरएल आर्या ने बताया कि स्कूलों की मनमानी को लेकर उन्होंने शिकायतें करने के लिए फैक्स नंबर और फोन नंबर भी जारी किए हैं। उन्होंने कहा जब तक कोई लिखित शिकायत नहीं आएगी तब तक कार्रवाई करना मुश्किल है।
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स्मार्ट क्लास के नाम पर भी वसूलते हैं फीस
अभिभावकों की शिकायत है कि स्कूल संचालक स्मार्ट क्लास की सुविधा के नाम पर इसकी फीस भी वसूलते हैं मगर बच्चों को पढ़ाया नहीं जाता। किसी स्कूल में हफ्ते में एक दो दिन बच्चों को स्मार्ट क्लास में पढ़ा भी दिया जाता है तो अधिकांश में सिर्फ फीस ही ली जा रही है।