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Nainital News: डीएफओ को फटकारा, ग्रामीणों का रास्ता खोलने के दिए निर्देश
Sat, 05 Apr 2025 02:31 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
संवाद न्यूज एजेंसी, नैनीताल
Updated Sat, 05 Apr 2025 02:31 AM IST
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हाईकोर्ट
नैनीताल। बर्ड सेंचुरी पंगूट में बूढ़ पंगूट के लोगों का ब्रिटिश कालीन रास्ता बंद करने के मामले में हाईकोर्ट ने डीएफओ को फटकार लगाई है। मुख्य न्यायाधीश जी नरेंद्र एवं न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने कहा कि शनिवार तक ग्रामवासियों का रास्ता खोलकर रिपोर्ट पेश करें। कोर्ट में शनिवार को भी मामले की सुनवाई होगी।
बूढ़ पंगूट निवासी भावना व प्रेमलता बुधलाकोटी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि वन विभाग ने बर्ड सेंचुरी के नाम पर उनका ब्रिटिश कालीन आम रास्ता बंद कर दिया है। यह पगडंडी है और बाद में यह बर्ड सेंचुरी घोषित हुआ है।
याचियों ने कहा कि वन विभाग ने एक बिल्डर को लाभ पहुंचाने के लिए यह निर्णय लिया है। बिल्डर ने वन विभाग की भूमि पर अवैध रोड का निर्माण तक करा लिया है। पूर्व में भी विभाग ने इसी तरह का निर्णय लेकर एक अन्य गांव का रास्ता बंद कर दिया था। इसे भी कोर्ट ने खोलने के आदेश दिए थे।
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याचिका में कहा गया कि उनके यहां कई तरह के मरीज हैं, रास्ता बंद होने से वे लोग उपचार के लिए बाहर नहीं जा पा रहे हैं। डीएफओ ने कोर्ट में पेश होकर विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि रास्ता एनजीटी के आदेश पर बंद किया गया है। इसका विरोध करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि वे प्रकृति प्रेमी हैं। यह आरक्षित वन क्षेत्र घोषित है, इसलिए वे अपने मवेशी इसमें नहीं जाने देते हैं। जंगल की रक्षा करना उनकी भी जिम्मेदारी है, जब आग लगती है ग्रामवासी ही फर्स्ट फायरमैन की तरह कार्य करते हैं।
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बूढ़ पंगूट निवासी भावना व प्रेमलता बुधलाकोटी ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि वन विभाग ने बर्ड सेंचुरी के नाम पर उनका ब्रिटिश कालीन आम रास्ता बंद कर दिया है। यह पगडंडी है और बाद में यह बर्ड सेंचुरी घोषित हुआ है।
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याचियों ने कहा कि वन विभाग ने एक बिल्डर को लाभ पहुंचाने के लिए यह निर्णय लिया है। बिल्डर ने वन विभाग की भूमि पर अवैध रोड का निर्माण तक करा लिया है। पूर्व में भी विभाग ने इसी तरह का निर्णय लेकर एक अन्य गांव का रास्ता बंद कर दिया था। इसे भी कोर्ट ने खोलने के आदेश दिए थे।
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याचिका में कहा गया कि उनके यहां कई तरह के मरीज हैं, रास्ता बंद होने से वे लोग उपचार के लिए बाहर नहीं जा पा रहे हैं। डीएफओ ने कोर्ट में पेश होकर विभाग का पक्ष रखते हुए कहा कि रास्ता एनजीटी के आदेश पर बंद किया गया है। इसका विरोध करते हुए ग्रामीणों ने कहा कि वे प्रकृति प्रेमी हैं। यह आरक्षित वन क्षेत्र घोषित है, इसलिए वे अपने मवेशी इसमें नहीं जाने देते हैं। जंगल की रक्षा करना उनकी भी जिम्मेदारी है, जब आग लगती है ग्रामवासी ही फर्स्ट फायरमैन की तरह कार्य करते हैं।