{"_id":"620016a29fd8da3bae678bd8","slug":"demand-for-facility-in-nainital-nainital-news-hld4529832145","type":"story","status":"publish","title_hn":"सरोवर नगरी को मूलभूत सुविधाओं की दरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा की समसया बरकरार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सरोवर नगरी को मूलभूत सुविधाओं की दरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा की समसया बरकरार
विज्ञापन
नैनीताल के तल्लीताल डांठ पर कुछ इस तरह से जमी बर्फ।
- फोटो : NAINITAL
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नैनीताल। राज्य गठन के बाद दोनों राष्ट्रीय दलों ने राज किया। साथ ही नैनीताल की जनता ने चार विधायक दिए। विधायकों ने जन समस्याओं को हल कराने के तमाम दावे तो किए, मगर यह धरातल पर नहीं उतरे। सरोवर नगरी को मूलभूत सुविधाओं की दरकरार है।
शिक्षा का गिरता स्तर
नैनीताल। राज्य गठन के बाद से ही सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल है। 22 वर्षों में सैकड़ों स्कूल बंद हो गए है, तो सैकड़ों बंद होने की कगार पर हैं। नैनीताल जिलें में 19 स्कूल बंद हैं जबकि 157 स्कूलों में छात्रों की संख्या 10 से कम है।
सीटी स्कैन नहीं होने से चलते मरीज हो रहे रेफर
नैनीताल। बीडी पांडे जिला अस्पताल सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है। ऐसे में नैनीताल समेत आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। नगर और आसपास के ग्रामीण इस अस्पताल पर निर्भर हैं। सिर की चोट वाले मरीज को अस्पताल लाने पर प्राथमिक उपचार के बाद सीटी स्कैन के लिए हायर सेंटर भेजा जाता है।
विज्ञापन
पेयजल के लिए भी झेलना पड़ता है संकट
नैनीताल। नगर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पानी की समस्या बनी रहती है। पेयजल आपूर्ति समयानुसार आने के कारण नौकरी पेशा वाले लोगों को पानी के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। नौकरी पेशा वर्ग जब कार्यालय में होता है उस समय पेयजल आपूर्ति की जाती है।
पार्किंग की समस्या जस के तस
नैनीताल। विश्वभर में पर्यटन नगरी के नाम से विख्यात नैनीताल में पार्किंग की समस्या जस की तस बनी हुई है। पर्यटन सीजन में बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। पार्किंग न होने के कारण सैलानियों को नगर के इंट्री प्वाइंट बारापत्थर, रूसी बाईपास और पाईंस के समीप रोककर शटल सेवा से भेजा जाता है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नैनीताल में ही नहीं बल्कि इसके आसपास के छोटे-छोटे पर्यटक स्थलों में भी पार्किंग निर्माण की घोषणा की थी।
सरकारें बदली लेकिन बलियानाले की तस्वीर नहीं
नैनीताल। सरकारें बदलने के बाद भी बलियानाले की तस्वीर नहीं बदल पाई। ट्रीटमेंट के नाम पर ही निर्माणदायी संस्था पहाड़ी पर अब तक करोड़ों बहा चुका है, मगर पहाड़ी पर भूस्खलन रुकने के बजाय स्थिति और भयावह होती जा रही है। बलियानाला पहाड़ी पर रोकथाम को लेकर आज तक कोई खास प्रयास नहीं किए। स्थानीय निवासी डर के साये में जी रहे हैं।
विज्ञापन
शिक्षा का गिरता स्तर
नैनीताल। राज्य गठन के बाद से ही सरकारी स्कूलों की स्थिति बदहाल है। 22 वर्षों में सैकड़ों स्कूल बंद हो गए है, तो सैकड़ों बंद होने की कगार पर हैं। नैनीताल जिलें में 19 स्कूल बंद हैं जबकि 157 स्कूलों में छात्रों की संख्या 10 से कम है।
विज्ञापन
सीटी स्कैन नहीं होने से चलते मरीज हो रहे रेफर
नैनीताल। बीडी पांडे जिला अस्पताल सीटी स्कैन की सुविधा नहीं है। ऐसे में नैनीताल समेत आसपास के क्षेत्रों के मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। नगर और आसपास के ग्रामीण इस अस्पताल पर निर्भर हैं। सिर की चोट वाले मरीज को अस्पताल लाने पर प्राथमिक उपचार के बाद सीटी स्कैन के लिए हायर सेंटर भेजा जाता है।
विज्ञापन
पेयजल के लिए भी झेलना पड़ता है संकट
नैनीताल। नगर के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पानी की समस्या बनी रहती है। पेयजल आपूर्ति समयानुसार आने के कारण नौकरी पेशा वाले लोगों को पानी के लिए काफी जद्दोजहद करनी पड़ती है। नौकरी पेशा वर्ग जब कार्यालय में होता है उस समय पेयजल आपूर्ति की जाती है।
पार्किंग की समस्या जस के तस
नैनीताल। विश्वभर में पर्यटन नगरी के नाम से विख्यात नैनीताल में पार्किंग की समस्या जस की तस बनी हुई है। पर्यटन सीजन में बड़ी संख्या में सैलानी आते हैं। पार्किंग न होने के कारण सैलानियों को नगर के इंट्री प्वाइंट बारापत्थर, रूसी बाईपास और पाईंस के समीप रोककर शटल सेवा से भेजा जाता है। जबकि पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने नैनीताल में ही नहीं बल्कि इसके आसपास के छोटे-छोटे पर्यटक स्थलों में भी पार्किंग निर्माण की घोषणा की थी।
सरकारें बदली लेकिन बलियानाले की तस्वीर नहीं
नैनीताल। सरकारें बदलने के बाद भी बलियानाले की तस्वीर नहीं बदल पाई। ट्रीटमेंट के नाम पर ही निर्माणदायी संस्था पहाड़ी पर अब तक करोड़ों बहा चुका है, मगर पहाड़ी पर भूस्खलन रुकने के बजाय स्थिति और भयावह होती जा रही है। बलियानाला पहाड़ी पर रोकथाम को लेकर आज तक कोई खास प्रयास नहीं किए। स्थानीय निवासी डर के साये में जी रहे हैं।