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थर्टी मीटर टेलीस्कोप से अध्ययन के बाद बदलेगी ब्रह्मांड की परिभाषा
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नैनीताल में ऐरीज की तीन दिवसीय टीएमटी कार्यशाला में मौजूद लोग।
- फोटो : NAINITAL
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नैनीताल। विश्व की सबसे बड़ी थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी) से अध्ययनों के बाद ब्रह्मांड की परिभाषा भी बदल सकती है। वैज्ञानिकों की कई अनसुलझी जिज्ञासाएं तो सुलझेंगी ही साथ ही आकाशगंगा में मौजूद तारों, पिंडों, क्षुद्र ग्रहों की खोज और उनकी आंतरिक हलचल के बारे में भी आसानी से पता चल पाएगा। इसका सबसे अधिक लाभ ब्रह्मांड पर शोधकार्य कर रहे शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को मिलेगा। यह बातें आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) की ओर से थर्टी मीटर टेलीस्कोप को लेकर आयोजित तीन दिनी संगोष्ठी में वैज्ञानिकों ने कही।
थर्टी मीटर टेलीस्कोप पांच देशों कनाडा, चीन, अमेरिका, जापान और भारत का संयुक्त उपक्रम है। इसके तहत अमेरिका के हवाई द्वीप में इसे स्थापित करने की कवायद जारी है। इस परियोजना में भारत की दस प्रतिशत सहभागिता है। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) भी इस टेलीस्कोप को बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
इस टेलीस्कोप के निर्माण की कार्ययोजना बनाने के उद्देश्य से एरीज की ओर से मल्लीताल स्थित आरएस टोलिया उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी में बृहस्पतिवार को संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया, इसमें देश भर के 17 संस्थानों के 110 वैज्ञानिक प्रतिभाग कर रहे हैं। इस दौरान वैज्ञानिकों ने परियोजना में प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों और सॉफ्टवेयरों को लेकर विचार-विमर्श किया।
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संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए मुख्य अतिथि कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. केएस राना ने कहा कि टीएमटी की स्थापना से एस्ट्रो क्षेत्र में कार्य करने वाले देश के वैज्ञानिकों को प्रेरणा मिलेगी। साथ ही एस्ट्रोनॉमी क्षेत्र में युवाओं के लिए कई अवसर उपलब्ध हैं। ऐसे आविष्कारों से प्रेरणा लेकर युवाओं को इस क्षेत्र के लिए आगे आना चाहिए। इस दौरान वैज्ञानिकों ने बताया कि दूरबीन परियोजना के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफीजिक्स, आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) और इंडियन इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीसीए) को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं, जो 30 मीटर व्यास की दूरबीन के लेंस, सॉफ्टवेयरों और अन्य कलपुर्जों का निर्माण करेगा।
टीएमटी के एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. रामा प्रकाश ने बताया कि इस दिनों परियोजना के लिए वैज्ञानिक शोध में जुटे हुए हैं, लगभग 70 से 80 फीसदी शोधकार्य पूरा हो चुका है, जो अगले वर्ष तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक यह टेलीस्कोप कार्य करना शुरू कर देगा। उन्होंने दावा किया है कि नई तकनीकी से लैस टीएमटी ब्रह्मांड की सबसे सटीक जानकारी देने वाली दूरबीन होगी।
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भारतीय वैज्ञानिकों को दूरबीन पर कार्य करने को मिलेगी 20 रातें
टीएमटी परियोजना की एडवाइजरी अध्यक्ष शिवरानी ने बताया कि परियोजना में भारत की भी सहभागिता होने के कारण भारतीय वैज्ञानिकों को दूरबीन में करीब 20 रात कार्य करने को मिलेगा। वर्तमान में सबसे बड़ी 10 मीटर व्यास की दूरबीन पर शोध के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को केवल एक रात का समय मिलता है, जिसके लिए देश को करीब 50 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि एक रात के शोध से इतनी जानकारियां जुटाई जा सकती है कि दो पीएचडी पूरी हो सके तो टीएमटी में 20 रातों का समय मिलने के बाद ब्रह्मांड की कई खोजे सामने आएगी।
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वर्तमान दूरबीन से तीन गुना बड़ी होगी टीएमटी
टीएमटी एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. रामा प्रकाश बताया कि वर्तमान में अमेरिका में 10 मीटर व्यास की दो सबसे बड़ी दूरबीन स्थापित की गई है। इसके अलावा यूरोप में आठ मीटर की चार दूरबीनें स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि टीएमटी विश्व की सबसे बड़ी 30 मीटर व्यास की दूरबीन होगी, जिससे अन्य दूरबीनों की अपेक्षा अधिक गहनता से ब्रह्मांड की जानकारी मिल पाएगी।
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हवाई द्वीप में नहीं तो लापामा में स्थापित होगी दूरबीन
टीएमटी के एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. रामा प्रकाश ने बताया कि परियोजना के तहत अमेरिका के हवाई में दूरबीन को स्थापित किया जाना है, लेकिन कुछ धार्मिक और संस्कृति से जुड़े कारणों के चलते स्थानीय लोग दूरबीन वहां लगाने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिसका विकल्प स्पेन स्थित लापामा द्वीप को चुना गया है। यदि हवाई में दूरबीन स्थापित नहीं की जा सकी तो लापामा में इसे स्थापित किया जाएगा।
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थर्टी मीटर टेलीस्कोप पांच देशों कनाडा, चीन, अमेरिका, जापान और भारत का संयुक्त उपक्रम है। इसके तहत अमेरिका के हवाई द्वीप में इसे स्थापित करने की कवायद जारी है। इस परियोजना में भारत की दस प्रतिशत सहभागिता है। नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) भी इस टेलीस्कोप को बनाने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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इस टेलीस्कोप के निर्माण की कार्ययोजना बनाने के उद्देश्य से एरीज की ओर से मल्लीताल स्थित आरएस टोलिया उत्तराखंड प्रशासनिक अकादमी में बृहस्पतिवार को संगोष्ठी का शुभारंभ किया गया, इसमें देश भर के 17 संस्थानों के 110 वैज्ञानिक प्रतिभाग कर रहे हैं। इस दौरान वैज्ञानिकों ने परियोजना में प्रयोग किए जाने वाले उपकरणों और सॉफ्टवेयरों को लेकर विचार-विमर्श किया।
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संगोष्ठी की शुरुआत करते हुए मुख्य अतिथि कुमाऊं विवि के कुलपति प्रो. केएस राना ने कहा कि टीएमटी की स्थापना से एस्ट्रो क्षेत्र में कार्य करने वाले देश के वैज्ञानिकों को प्रेरणा मिलेगी। साथ ही एस्ट्रोनॉमी क्षेत्र में युवाओं के लिए कई अवसर उपलब्ध हैं। ऐसे आविष्कारों से प्रेरणा लेकर युवाओं को इस क्षेत्र के लिए आगे आना चाहिए। इस दौरान वैज्ञानिकों ने बताया कि दूरबीन परियोजना के लिए इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफीजिक्स, आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) और इंडियन इंटर यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स (आईयूसीसीए) को अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं, जो 30 मीटर व्यास की दूरबीन के लेंस, सॉफ्टवेयरों और अन्य कलपुर्जों का निर्माण करेगा।
टीएमटी के एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. रामा प्रकाश ने बताया कि इस दिनों परियोजना के लिए वैज्ञानिक शोध में जुटे हुए हैं, लगभग 70 से 80 फीसदी शोधकार्य पूरा हो चुका है, जो अगले वर्ष तक पूरा हो जाएगा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2030 तक यह टेलीस्कोप कार्य करना शुरू कर देगा। उन्होंने दावा किया है कि नई तकनीकी से लैस टीएमटी ब्रह्मांड की सबसे सटीक जानकारी देने वाली दूरबीन होगी।
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भारतीय वैज्ञानिकों को दूरबीन पर कार्य करने को मिलेगी 20 रातें
टीएमटी परियोजना की एडवाइजरी अध्यक्ष शिवरानी ने बताया कि परियोजना में भारत की भी सहभागिता होने के कारण भारतीय वैज्ञानिकों को दूरबीन में करीब 20 रात कार्य करने को मिलेगा। वर्तमान में सबसे बड़ी 10 मीटर व्यास की दूरबीन पर शोध के लिए भारतीय वैज्ञानिकों को केवल एक रात का समय मिलता है, जिसके लिए देश को करीब 50 लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि एक रात के शोध से इतनी जानकारियां जुटाई जा सकती है कि दो पीएचडी पूरी हो सके तो टीएमटी में 20 रातों का समय मिलने के बाद ब्रह्मांड की कई खोजे सामने आएगी।
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वर्तमान दूरबीन से तीन गुना बड़ी होगी टीएमटी
टीएमटी एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. रामा प्रकाश बताया कि वर्तमान में अमेरिका में 10 मीटर व्यास की दो सबसे बड़ी दूरबीन स्थापित की गई है। इसके अलावा यूरोप में आठ मीटर की चार दूरबीनें स्थापित हैं। उन्होंने बताया कि टीएमटी विश्व की सबसे बड़ी 30 मीटर व्यास की दूरबीन होगी, जिससे अन्य दूरबीनों की अपेक्षा अधिक गहनता से ब्रह्मांड की जानकारी मिल पाएगी।
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हवाई द्वीप में नहीं तो लापामा में स्थापित होगी दूरबीन
टीएमटी के एसोसिएट प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. रामा प्रकाश ने बताया कि परियोजना के तहत अमेरिका के हवाई में दूरबीन को स्थापित किया जाना है, लेकिन कुछ धार्मिक और संस्कृति से जुड़े कारणों के चलते स्थानीय लोग दूरबीन वहां लगाने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जिसका विकल्प स्पेन स्थित लापामा द्वीप को चुना गया है। यदि हवाई में दूरबीन स्थापित नहीं की जा सकी तो लापामा में इसे स्थापित किया जाएगा।