{"_id":"2b693700b271f4c6004e3ae845525cf4","slug":"inside-the-smart-criminal-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"चार बच्चे, चार सुराग और चालाक अपराधी अंदर","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
चार बच्चे, चार सुराग और चालाक अपराधी अंदर
ब्यूरो/अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Wed, 13 May 2015 01:41 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एक शादी समारोह जहां पर बड़ी संख्या में लोग आते हैं, वहां पर एक बच्ची के साथ दुष्कर्म का प्रयास होता है पर मौके पर कोई ऐसा ठोस सुराग नहीं मिलता, जिससे अपराधी को पकड़ना तो दूर उसकी पहचान तक हो सके। ऐसे में इस केस को सुलझाने में बच्चे ही मददगार बने हैं। उनके अपराधी के बारे में बताए ब्यौरे के आधार पर पुलिस एक के बाद एक सिरों को जोड़ती हुई अपराधी तक पहुंची।
विज्ञापन
जांच टीम में लगे पुलिस कर्मी बताते हैं कि घटना के बाद आरोपी फरार हो गया था। पहली चुनौती तो उसकी पहचान करनी थी। इसके लिए टीम ने बच्चों की मदद लेने का फैसला किया। एसओ मुखानी संजय पांडेय कहते हैं कि इसमें चार बच्चे बेहद स्मार्ट थे, वह बिना डरे, घबराए एक के बाद एक महत्वपूर्ण जानकारी देते गए। जब बच्ची के रोने की आवाज सुनकर एक महिला घटना स्थल की तरफ गई, तो अपराधी भागने लगा। इस दौरान पहले वह एक दीवार और फिर पानी के कूलर से टकराया। उस वक्त वहां बच्चे मौजूद थे, उन्होंने उसकी शक्ल देखी थी। उनसे पता चला कि अपराधी ने नीली जींस और सफेद शर्ट पहनी थी।
विज्ञापन
ऐसे में वीडियो फिल्म के आधार पर ऐसे कपड़े पहने लोगों से पूछताछ शुरू की, तो बच्चों ने दूसरा सुराग देते हुए बताया कि अपराधी की नीली जींस में ऊपर की तरफ एक खास तरह का ‘फैशन का पैटर्न’ बना था, जब हमने वीडियो फिल्म में डांस की फिल्म दिखाई तो उसमें भी बहुत साफ उसका फोटो नहीं आ रहा था। हालांकि अंदेशा हो गया था। फिर हमें तीसरा सुराग मिला। बच्चों ने बताया कि अपराधी ने पीछे की तरफ से ‘एक खास तरह’ से बाल को काटा था। इसी बीच पुलिस टीम ने पहचान और स्पष्ट करने के लिए जहां पर शादी थी, उस परिवार में करीब छह महीने पहले भी एक शादी हुई थी। उस शादी की फिल्म और फोटो मंगाई गई।
विज्ञापन
इसमें हरीश साफ तौर पर दिखाई दे रहा था, जिसको समारोह में आए लोगों ने भी पहचान लिया। जब हमने हरीश के बारे में पता कर लिया, उसके नंबर पर नजर रखी गई तो पता चला कि वह रात को अक्सर फोन बंद कर देता है। यह भी एक सुराग की तरह था। बाद में उसको पकड़ कर बच्चों, समारोह में मौजूद लोग और पीड़ित बच्ची से पहचान कराई, तो उन्होंने पहचान लिया। इस तरह एक चालाक अपराधी हत्थे चढ़ गया।